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अबू सलेम मामला: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, भारत सरकार के पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन से न्यायपालिका स्वतंत्र

Thu, 05 May 2022 10:17 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 05 May 2022 10:17 PM IST
सार

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि सरकार तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी द्वारा पुर्तगाल सरकार को दिए गए आश्वासन से बंधी है और वह उचित समय पर इसका पालन करेगी।

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Abu Salem case: judiciary independent of the assurance given by the Government of India to Portugal says centre in SC
abu salem - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 2002 में गैंगस्टर अबू सलेम के प्रत्यर्पण के दौरान पुर्तगाल सरकार को दिए गए आश्वासन से न्यायपालिका स्वतंत्र है और यह कार्यपालिका पर निर्भर करता है कि वह उचित स्तर पर इस पर फैसला करे। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने गैंगस्टर अबू सलेम की एक याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें 1993 के मुंबई विस्फोट मामले में उसने अपनी उम्रकैद को चुनौती दी है। सलेम ने इस आधार पर चुनौती दी है कि उसकी सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती क्योंकि सरकार ने पुर्तगाल सरकार को उसके प्रत्यर्पण के दौरान ऐसा आश्वासन दिया था। 

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केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि सरकार तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी द्वारा पुर्तगाल सरकार को दिए गए आश्वासन से बंधी है और वह उचित समय पर इसका पालन करेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की ओर से दिया गया यह आश्वासन न्यायपालिका पर थोपा नहीं जा सकता। कार्यपालिका उचित स्तर पर इस पर कार्रवाई करेगी। हम इस संबंध में आश्वासन से बंधे हैं। न्यायपालिका स्वतंत्र है और वह कानून के अनुसार आगे बढ़ सकती है। 
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पीठ ने नटराज से कहा कि सलेम का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ऋषि मल्होत्रा की दलील यह है कि अदालत को गंभीर आश्वासन पर फैसला करना चाहिए और उसकी सजा को उम्रकैद से घटाकर 25 साल करना चाहिए या सरकार को निर्देश देना चाहिए कि वह प्रत्यर्पण के दौरान दिए गए गंभीर आश्वासन पर फैसला करे। शीर्ष अदालत ने कहा कि दूसरा मुद्दा एक समायोजित अवधि को लेकर है क्योंकि दलील यह है कि उसे यहां की अदालत के आदेश पर जारी रेड कॉर्नर नोटिस के बाद पुर्तगाल में गिरफ्तार किया गया था और वह भारत के लिए प्रत्यर्पण तक हिरासत में रहा।
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नटराज ने कहा कि सलेम फर्जी पासपोर्ट से जुड़े एक अलग मामले में हिरासत में रहा था। विशेष टाडा अदालत ने 25 फरवरी, 2015 को 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की उनके ड्राइवर मेहंदी हसन के साथ हत्या के एक अन्य मामले में सलेम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्ष 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी सलेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर, 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। जून 2017 में सलेम को दोषी ठहराया गया और बाद में मुंबई में 1993 के सीरियल धमाके मामले में उसकी भूमिका के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

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