फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   abhishek banerjee meets lok sabha speaker om birla over 20 rebel tmc mps disqualification

खतरे में TMC के बागी सांसदों की कुर्सी: अभिषेक बनर्जी ने की ओम बिरला से मुलाकात, क्या-क्या हुई बात?

Mon, 27 Jul 2026 08:13 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 27 Jul 2026 08:13 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनाव हारने के बाद टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत कर दी है। इन सांसदों ने कार्रवाई से बचने के लिए त्रिपुरा की पार्टी एनसीपीआई में विलय की घोषणा की है। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर बागी सांसदों को संसद से अयोग्य ठहराने की मांग उठाई है। फिलहाल स्पीकर ने बागी 20 सांसदों के बैठने की व्यवस्था तो अलग कर दी है, पर विलय की कानूनी मंजूरी अभी बाकी है।
 

विज्ञापन
abhishek banerjee meets lok sabha speaker om birla over 20 rebel tmc mps disqualification
अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने तृणमूल कांग्रेस की नींव हिला दी है। चुनाव हारने के बाद पार्टी का अंदरूनी गुटबाज़ी का विवाद अब दिल्ली के सबसे बड़े मंच, यानी हमारी संसद तक पहुंच चुका है। टीएमसी संसदीय दल के प्रमुख अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके दफ्तर में मुलाकात की। लगभग 20 मिनट तक चली इस सीधी बातचीत में माहौल काफी गर्म रहा। अभिषेक ने सीधे तौर पर बागी सांसदों को बर्खास्त करने का दबाव बनाया।
विज्ञापन


क्या वाकई बचा पाएंगे अपनी कुर्सी?
यह पूरा विवाद जून के महीने से शुरू हुआ था। बंगाल चुनाव में हार का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ा जाने लगा। इसके बाद पार्टी में दो फाड़ हो गए। इस बगावत का नेतृत्व कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं, बल्कि टीएमसी के पुराने दिग्गज सुदीप बंद्योपाध्याय और डॉ. काकोली घोष दस्तीदार कर रहे हैं। टीएमसी के पास लोकसभा में कुल 28 सांसद थे। इनमें से 20 सांसदों ने बगावत का रास्ता चुन लिया।
विज्ञापन


दलबदल विरोधी कानून' (10वीं अनुसूची) के तहत सदस्यता जाने का डर था। इससे बचने के लिए बागी सांसदों ने दिमाग लगाया। उन्होंने त्रिपुरा की 'राष्ट्रवादी सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में अपने गुट के विलय का ऐलान कर दिया। कानूनन यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद एक साथ अलग होकर दूसरी पार्टी में मिलते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। यहाँ 28 में से 20 सांसद बागी हैं, जो दो-तिहाई से ज्यादा हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: केस लड़ेंगे कपिल सिब्बल, फंड जुटाने के लिए वेबसाइट: सीजेपी ने शुरू किया नया अभियान, क्या है पूरी योजना?


संसद में क्यों मचा इतना हंगामा?
20 जुलाई सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ है। सत्र चालू होने से पहले सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसी बैठक में नया सियासी भूचाल आ गया। केंद्र सरकार ने इस बैठक में एनसीपीआई पार्टी को भी न्योता भेजा था। इस बात पर टीएमसी समेत बाकी विपक्षी दल भड़क गए।

विपक्षी नेताओं का तर्क था कि जब तक स्पीकर महोदय विलय को सरकारी मान्यता नहीं देते, तब तक एनसीपीआई को बुलाना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने विरोध में बैठक का बहिष्कार किया, हालांकि बाद में वे वापस आ गए। मानसून सत्र के पहले दिन स्पीकर ओम बिरला ने 20 बागी सांसदों को टीएमसी के मुख्य गुट से अलग बैठने की इजाजत दे दी। लेकिन, उन्होंने विलय पर अब तक अपनी अंतिम मोहर नहीं लगाई है।

मामले से जुड़ी सात बड़ी बातें
  • अभिषेक की मांग: अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों की अर्जी को खारिज कर उन्हें जल्द से जल्द सांसद पद से अयोग्य ठहराने की मांग रखी।
  • वफादारों का नया ठिकाना: टीएमसी के बचे हुए 8 वफादार सांसदों के बैठने की जगह को बदलने की अर्जी दी गई।
  • स्पीकर का संशय: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बागी सांसदों की अयोग्यता और नई पार्टी में उनके विलय पर अभी कोई आखिरी फैसला नहीं सुनाया है।
  • सदन में अलग-थलग: 20 बागी सांसद अब संसद की कार्यवाही में टीएमसी के मूल दल से दूर अलग सीटों पर बैठेंगे।
  • विपक्ष की नाराज़गी: सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को आधिकारिक न्योता मिलने से विपक्षी दल पूरी तरह बिफर गए।
  • 2026 चुनाव का असर: बंगाल चुनाव में हुई हार के कारण ही टीएमसी के अंदर यह ऐतिहासिक टूट देखने को मिली है।
  • कानूनी पेंच बरकरार: क्या 20 सांसदों का यह गुट अपनी कुर्सी बचा पाएगा, इसका फैसला अब पूरी तरह लोकसभा अध्यक्ष के हाथों में टिक गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed