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Hindi News ›   India News ›   Aarushi murder: case and evidence was destroyed on crime spot

उस रोज आरुषि की हत्या ही नहीं हुई, वहां हुआ सबूतों का भी कत्ल

Fri, 13 Oct 2017 12:08 PM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम Updated Fri, 13 Oct 2017 12:08 PM IST
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Aarushi murder: case and evidence was destroyed on crime spot

आरुषि हत्याकांड के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई के फैसले को पलटते हुए तलवार दंपति को सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। मामले में आरुषि दंपति के पक्ष में आए फैसले से एक बड़ा सवाल सामने आया कि अगर आरुषि और हेमराज की हत्या तलवार दंपति ने नहीं की तो आखिर उन दोनों का हत्यारा कौन था?

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क्यों पुलिस और सीबीआई इस मामले की सही जांच और पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रही? इन सब सवालों के जवाब टाइम्स ऑफ इंडिया के पूर्व पत्रकार की रिपोर्ट में मिलते हैं। ये रिपोर्ट बताती है कि आखिर कैसे उस रोज आरुषि और हेमराज की ही हत्या नहीं हुई बल्कि दूसरे दिन सबूतों का भी कत्ल कर दिया गया, वो भी पुलिस के सामने।
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रिपोर्ट के मुताबिक 17 मई 2008 की सुबह आरुषि हत्याकांड के मामले को समझने के लिए नीलाभ बनर्जी ने तलवार दंपति के घर की ओर रुख किया। वो लिखते हैं कि उन्हें एक स्टोरी करनी थी जिससे की वो क्राइम सीन को ग्राफिक्स के जरिए रीक्रिएट कर सकें।

ग्रिल पर ताला लगा हुआ था

Aarushi murder: case and evidence was destroyed on crime spot

वो कहते हैं कि मुझे तलवार दंपति के घर को ढूंढने में कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि ओवी वैन्स की लंबी कतारों ने मुझे उस घर तक पहुंचा दिया जहां दिल दहलाने वाला हत्याकांड हुआ था। वहां आसपड़ोस के लोगों की भीड़ जमा थी।

फ्लैट की सीढ़ियों और आंगन में उन पड़ोसियों और मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ मौजूद थी जो घटना की असलियत जानने के इच्छुक थे। मुझे वहां पहुंचकर सबसे पहले हैरानी इस बात से हुई कि ग्रिल पर ताला लगा हुआ था जो ये बता रहा था कि वहां कुछ गड़बड़ का संदेह पैदा कर रही थी।

भीड़ में किसी ने सलाह दी कि छत पर जाइए वहां बहुत खून पड़ा है। छत पर जाने पर हैरानी का आलम और बढ़ गया। वहां भीड़ को रोकने के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं थे।

किसी को सबूत जुटाने की जल्दी नहीं थी

Aarushi murder: case and evidence was destroyed on crime spot

​क्राइम सीन के चारो ओर सबूत जुटाने के लिए बेरिकेटिंग तक नहीं की गई थी। वहां ढेर सारा खून था जो कि पिछली रात से वहां पड़ा हुआ था। लोग उस पर पैर रखकर निकल रहे थे। इस ओर किसी का ध्यान नहीं था, यहां तक की पुलिस का भी नहीं।

खून से सने पैरों के निशान थे, दीवार पर भी खून के निशान थे?  लेकिन किसके, ये बड़ा सवाल था। वहां एक जंग खाया कूलर पड़ा था जिसमें अभी भी पानी थी। ऐसा लग रहा था कि खून से सने हाथ उस पानी में धोए गए थे जिसकी वजह से उसका रंग लाल हो गया था।

बगल वाली छत पर एक खून से सना गद्दा और चादर पड़ी थी। ये बेहद अहम सबूत हो सकते थे, जिन्हें इकट्ठा करने की किसी को कोई जल्दी नहीं थी।

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