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बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप मामला: आजम खान बिना शर्त माफी मांगने को तैयार

Fri, 18 Nov 2016 05:39 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 18 Nov 2016 05:39 AM IST
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Aajam Khan ready to apologize unconditionally
बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार मामले में समाजवादी पार्टी नेता आजम खान ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर उनके बयान से पीड़िता को चोट पहुंची है तो वह बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। शीर्ष अदालत ने आजम को दो हफ्ते के भीतर इस संबंध में हलफनामा दायर करने के लिए कहा।
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साथ ही शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से पीड़िता को 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए नजदीकी केंद्रीय विद्यालय में दाखिला दिलवाने को कहा है। उसकी पढ़ाई का खर्च भी राज्य सरकार को वहन करना होगा।
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने आजम खान को दो हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए एक बार फिर यह दोहराया कि किसी भी पब्लिक सर्वेंट को किसी अपराध या मामले की जांच को लेकर कोई बयान नहीं देना चाहिए जब तक कि उस अपराध से उसका कोई लेनादेना न हो। वहीं पिछले निर्देश के तहत आजम खान ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश किया।
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आजम खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मीडिया ने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। उन्होंने कहा कि आजम खान ने यह कभी नहीं कहा कि वह घटना राजनीतिक साजिश थी और कुछ नहीं।

उन्होंने पीड़िता का अपमान नहीं किया और न ही उनकी उसके सम्मान को ठोस पहुंचाने की कोई मंशा थी। पत्रकार द्वारा पूछे एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि सरकार इस बात को भी देख रही है कि क्या विरोधी दल सरकार की छवि खराब करने की तो कोशिश नहीं कर रही है। राजनीतिक पतन हो चुका है लिहाजा कुछ भी संभव है।

चुनाव नजदीक है इसलिए समाजवादी पार्टी को बदनाम करने के सिवाय उनके पास और कोई रास्ता नहीं है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि एक बार मुंह से शब्द निकल जाने पर वे वापस नहीं होते।

अदालत ने कहा कि ऐसे बयानों को लेकर कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और न ही ऐसे बयान के मामले में किसी को जेल भेजा जा सकता है। वहीं अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन ने पीठ को सुझाव दिया कि पब्लिक अथॉरिटी या मंत्री अगर बलात्कार या छेड़छाड़ से संबंधित मामले की पीड़िता को लेकर आपत्तिजनक बयान देते हैं और यह साबित हो जाए कि ऐसा बयान दिया गया है तो उसके बाद क्या होगा, इसे रोकने के लिए कानून की जरूरत है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पर बहस की जरूरत है और अटॉर्नी जनरल से इस मामले में सहयोग करने को कहा गया है। अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी। उसी दिन अदालत हलफनामे पर विचार करेगी।


गौरतलब है कि कि गत 29 जुलाई को एक परिवार कार से नोएडा से शाहजहांपुर जा रहा था। रात करीब डेढ़ बजे बुलंदशहर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर लुटेरों ने छल से कार को रुकवाया और बंदूक की नोंक पर न केवल उनके नगदी और जेवर लूट लिए बल्कि 32 वर्षीय महिला और उसकी नाबालिग बेटी को साथ बलात्कार भी किया। 
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