1 जुलाई से करोड़ों लोगों की टेंशन होगी खत्म, आधार पर मिलेगी यह बड़ी सुविधा
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यूआईडीएआई ने जनवरी में कहा था कि जिन लोगों को बढ़ती उम्र या अधिक श्रम के कारण बायोमेट्रिक सिस्टम से आधार के सत्यापन में परेशानी हो रही है, उनके लिए चेहरे से सत्यापन की सुविधा शुरू करेगा।
पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में एक प्रजेंटेशन में यूआईडीएआई ने आधार के कूट भाषा में लिखने पर जोर देते हुए कहा था कि इसका डाटा अभेद्य है और उसे भेदने के लिए धरती पर उपलब्ध सबसे तेज कंप्यूटर को ब्रह्मांड की आयु से भी ज्यादा वक्त लगेगा।
देना होगा केवल वर्चुअल नंबर
बात दें कि आधार धारकों की निजता और सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए यूआईडीएआई आधार धारकों के लिए वर्चुअल आईडी लाने जा रहा है। यूआईडीएआई आधार कार्ड धारकों को वर्चुअल आईडी जारी करेगा।
यूआईडीएआई के मुताबिक इससे आधार कार्ड धारकों को किसी भी सत्यापन के लिए अपने आधार नंबर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सत्यापन के लिए उन्हें सिर्फ अपने वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल करना पड़ेगा।
यूआईडीएआई की इस पहल का असर ये होगा कि इससे वो एजेंसी बाहर हो जाएंगी जो आधार नंबर स्टोरेज करती हैं। सभी एजेंसी को नई व्यवस्था को 1 जून 2018 तक लागू करना होगा। कुछ दिनों पहले ही एक अंग्रेजी अखबार ने अपनी खबर में आधार डाटा को बेचे जाने का दावा किया है।
अखबार ने व्हॉट्सऐप पर एक गुमनाम विक्रेता से एक सेवा खरीदने का दावा किया है। यह विक्रेता मजह 500 रुपये अदा करने पर देश में अब तक बने 1 अरब आधार कार्ड की जानकारी को निर्बाध रूप से मुहैया कराता है। इस जानकारी में आधार कार्ड बनवाने वाले का नाम, पता, पिन नंबर, फोटो, फोन नंबर और ईमेल आईडी शामिल हैं।