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29 फीसदी प्रवासी मजदूर लौटे शहर, 45 फीसदी आने की तैयारी में : सर्वे

Tue, 04 Aug 2020 09:15 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Tue, 04 Aug 2020 09:15 AM IST
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A Survey report revealed that 29 percent migrants return to cities and 45 percent are planning
फाइल फोटो - फोटो : PTI

कोरोना महामारी और लॉकडाउन की मार से शहर छोड़ अपने गांव लौटे प्रवासी मजदूर वापस आने की बाट जोह रहे हैं। सोमवार को जारी एक सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि 29 फीसदी प्रवासी मजदूर अब तक शहर वापस आ चुके हैं जबकि 45 फीसदी आने की तैयारी में हैं।

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ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल रोजगार की कमी होने के कारण मजदूर दोबारा पलायन को मजबूर हो रहे हैं। कई सामाजिक संस्थाओं के 11 राज्यों में 4,835 ग्रामीण परिवारों के बीच कराए सर्वेक्षण में शामिल 1,196 प्रवासी मजदूरों के परिवारों ने शहर छोड़ने का दुख जताया।
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इनमें से 74 फीसदी परिवारों ने कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई परिस्थितियों की वजह से गांवों का रुख किया था। अभी तक 29 फीसदी मजदूर शहरों को वापस लौट चुके हैं और गांवों में रह रहे शेष 45 फीसदी परिवार का कहना है कि वे भी जल्द वापस शहर जाना चाहते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में उनके लायक रोजगार नहीं होने से महामारी के बीच ही दोबारा शहर लौटना पड़ रहा है। गांव पहुंचे कई मजदूरों को निर्माण आदि से जुड़ा काम मिल गया है लेकिन 80 फीसदी को उनके लायक काम नहीं मिल पा रहा है।

झारखंड, मध्य प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान और त्रिपुरा के 48 जिलों में सर्वे के दौरान पता चला कि प्रवासियों के लौटने से महिलाओं का काम बढ़ गया है। अब उन्हें पानी और लकड़ी के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं क्योंकि प्रवासियों के लौटने से परिवार बढ़ गया है।

24 फीसदी ने कहा है कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई छुड़वाने पर विचार कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में वित्तीय असुरक्षा के साथ अब कोविड-19 का जोखिम भी लगाया जा रहा है।

योजनाओं का मिला लाभ लेकिन खाने की कमी
गांवों में 85 फीसदी को पीडीएस और 71 फीसदी को मुफ्त एलपीजी सुविधा मिली है। 38 फीसदी लोगों को पीएम किसान योजना का फायदा मिला है। बावजूद इसके 43 फीसदी परिवारों ने कहा कि उन्हें खाने की कमी का सामना करना पड़ रहा है जबकि 55 फीसदी ने खाने का आइटम घटा दिए।


वित्तीय संकट के समय छह फीसदी लोगों ने मकान गिरवी रखा है तो 15 फीसदी मजदूरों को मवेशी बेचने पड़ें हैं। दो फीसदी ने जमीनें बेच दी और 17 फीसदी को कर्ज लेना पड़ा है। इसके अलावा 35 फीसदी लोगों ने समारोह टाल दिए हैं।

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