फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   A Study says that coronavirus peak in India may arrive mid November, paucity of ICU beds and ventilators likely

लॉकडाउन ने 83 फीसदी कम किया खतरा, नवंबर में चरम पर पहुंचेगा कोरोना संक्रमण

Sun, 14 Jun 2020 04:57 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 14 Jun 2020 04:57 PM IST
सार

भारत में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन ने कई मायनों में सकारात्मक परिणाम दिए हैं। हाल ही में हुए एक अध्ययन के मुताबिक लॉकडाउन ने देश को वायरस संक्रमण को चरम स्थिति को काफी हद तक टाला है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि देश में नवंबर में कोरोना संक्रमण अपनी चरम स्थिति पर पहुंचेगा और इस दौरान देश को आईसीयू बेड और वेंटिलेटर की कमी से जूझना पड़ेगा। 

विज्ञापन
A Study says that coronavirus peak in India may arrive mid November, paucity of ICU beds and ventilators likely
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की सबसे चरम स्थिति नवंबर मध्य में आ सकती है, यानी नवंबर मध्य में कोरोना वायरस संक्रमण का सबसे खतरनाक स्वरूप देखने को मिल सकता है। एक अध्ययन में दावा किया गया है कि देश में लगाए गए आठ सप्ताह के लॉकडाउन और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के चलते इसमें देरी हुई है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि इस दौरान देश में आईसीयू बेड और वेंटिलेटर आदि की कमी हो सकती है। 

विज्ञापन


आईसीएमआर (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) द्वारा गठित ऑपरेशंस रिसर्च ग्रुप के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि लॉकडाउन ने कोरोना संक्रमण की चरम स्थिति को करीब 34 से 76 दिन के लिए टाला और संक्रमण की संख्या को 69 से 97 फीसदी कर कम किया है। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को बेहतर करने और संसाधन व बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का समय मिला।
विज्ञापन


अध्ययन के अनुसार लॉकडाउन के बाद 60 फीसदी प्रभावशीलता के साथ तीव्र सार्वजनिक सेवा मानकों के संबंध में, नवंबर के पहले सप्ताह तक मांग पूरी की जा सकेगी। इसके बाद आइसोलेशन बेड की संख्या करीब 5.9 महीने के लिए अपर्याप्त हो सकती है। इसके साथ ही आईसीयू बेड 4.6 महीने और वेंटिलेटर की 3.9 महीनों कर कमी हो सकती है। हालांकि, यह कमी लॉकडाउन और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के बिना जितनी हो सकती थी, उससे 83 फीसदी कम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

  
विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और महामारी को रोकने  के लिए सरकार के उपायों के साथ वायरस के गैरजरूरी प्रभाव कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि अगर सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के दायरे को 80 फीसदी तक बढ़ाया जा सके तो देश में कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed