ठंड नहीं, गर्मी में सबसे ज्यादा मरते हैं गरीब, पिछले साल 3,623 बेघरों की हुई मौत!
- जनवरी के दस दिनों में ही दिल्ली में हुई 90 बेघरों की मौत
- पिछले दस सालों में 36 हजार से ज्यादा बेघरों की मौसम की प्रतिकूलता के कारण हुई मौत
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सामान्य तौर पर यह समझा जाता है कि ठंड की सबसे ज्यादा मार बेघर गरीबों पर पड़ती है और ठंड के चलते ही गरीबों की सबसे ज्यादा मौत भी होती है। लेकिन एक रिपोर्ट में यह हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है कि गरीबों की मौत ठंड से ज्यादा गर्मी के मौसम में होती है।
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दस सालों में जून के महीनों में सबसे ज्यादा 4069 बेघर गरीब लोगों की मौत हुई है। इसके पहले यानी मई के महीने में 3069 लोगों की, तो जुलाई के महीने में 3342 लोगों की मौत हुई है। इनकी तुलना में ठंड के महीनों में हुई मौतों का आंकड़ा काफी कम है।
ठंड के लिहाज से दिसंबर, जनवरी और फरवरी महीनों को सबसे ज्यादा संवेदनशील समझा जाता है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ठंड के महीनों में अपेक्षाकृत कम मौतें हुई हैं। सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दस सालों में दिसंबर महीने में कुल 2866 बेघर गरीब लोगों की मौत हुई है।
इसके अलावा जनवरी महीने में 2881 और फरवरी के महीने में 2355 लोगों की ही मौत हुई है। इस वर्ष जनवरी महीने के शुरु के 10 दिनों में भी 90 बेघरों की मौत हुई है। इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि गरीबों के आवास की सुविधा ठंड में ही नहीं, बल्कि गर्मी में भी होनी चाहिए।
पर्याप्त नहीं शेल्टर होम्स
दिल्ली सरकार ने राजधानी में बेघरों को रहने के लिए कई शेल्टर होम्स बनाए हैं, लेकिन इसके बाद भी इनकी जरूरत बनी हुई है। अगर साल के हिसाब से बात करें, तो वर्ष 2015 में 3222 बेघरों की मौत हुई थी। इसी प्रकार वर्ष 2016 में 3398, वर्ष 2017 में 2979, वर्ष 2018 में 3289 और वर्ष 2019 में 3623 बेघरों की मौत हो गई।
वर्ष 2019 में पिछले दस सालों में सबसे ज्यादा बेघरों की मौत हुई है। साल 2009 से 2019 के बीच 36,037 बेघरों को मौसम की प्रतिकूलता से अपनी जान गंवानी पड़ी है।
राजनीति भी तेज
दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इन मौतों के आंकड़े पर कहा कि दिल्ली सरकार बेघरों को आवास देने में असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा दुर्भाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पूरे देश में करोड़ों आवास बनाए गए हैं, लेकिन दिल्ली सरकार ने राजनीतिक सोच की वजह से इस योजना को लागू नहीं किया है, जिसकी वजह से लोगों को आवास उपलब्ध नहीं हो पाया है।