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अब पहनिए शाकाहारी जूते, यहां लगी है सेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Updated Wed, 21 Feb 2018 07:50 PM IST
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शाकाहारी जूते
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पिछले कुछ दशकों में हरे रंग का चलन एक प्रवृत्ति बन गया है। इसलिए यह शाकाहारी और ज्यादा शाकाहारी बन गया है। शाकाहारी का मतलब हम सिर्फ भोजन से लगाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी शाकाहारी जूते के बारे में सोचा है?
बता दें कि फैशन प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी ने शाकाहारी जूते को बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक में एक्सपो स्टॉल का आयोजन किया है। कंपनी पशुओं की सुरक्षा के लिए इन जूतों को बढ़ावा दे रही है। कंपनी का उद्देश्य है कि ऐसा करके उन जानवरों को बचाया जाए जिससे जूते चप्पलों को बानाने के लिए जानवरों की खाल का उपयोग किया जाता है। उनका कहना है कि शाकाहारी जूते को बढ़ावा देने के लिए यह सही मंच है। इसके जरिए उन्होंने अहिंसा का भी संदेश दिया है।
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बता दें कि फैशन प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी ने शाकाहारी जूते को बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक में एक्सपो स्टॉल का आयोजन किया है। कंपनी पशुओं की सुरक्षा के लिए इन जूतों को बढ़ावा दे रही है। कंपनी का उद्देश्य है कि ऐसा करके उन जानवरों को बचाया जाए जिससे जूते चप्पलों को बानाने के लिए जानवरों की खाल का उपयोग किया जाता है। उनका कहना है कि शाकाहारी जूते को बढ़ावा देने के लिए यह सही मंच है। इसके जरिए उन्होंने अहिंसा का भी संदेश दिया है।
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चमड़ा देश के सबसे प्रदूषणकारी उद्योगों में से एक है
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निदेशक मनीष पारिख ने कहा कि वह 2016 से अपनी कंपनी में शाकाहारी जूते बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि चमड़ा देश के सबसे प्रदूषणकारी उद्योगों में से एक है। इससे सबसे ज्यादा प्रदूषण और बीमारियां फैलती हैं। उन्होंने कहा कि हमारा जूता भी चमड़े के जूते की तरह मजबूत है। शाकाहारी जूते को पॉलिस्टर फाइबर से बनाया जाता है। यह वजन में भी काफी हल्का होता है।
उन्होंने कहा कि पॉलिस्टर और फाइबर से बनने के बाद जूता बिलकुल लेदर की ही तरह दिखता है। हमने शाकाहारी जूता बनाकर ग्राहकों को साफ संदेश दिया है खासतौर पर जैन समुदाय को लोगों को।
उन्होंने कहा कि पॉलिस्टर और फाइबर से बनने के बाद जूता बिलकुल लेदर की ही तरह दिखता है। हमने शाकाहारी जूता बनाकर ग्राहकों को साफ संदेश दिया है खासतौर पर जैन समुदाय को लोगों को।