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मिसाल: कालाबाजारी के दौर में डॉक्टर जोड़े का अनूठा अभियान, ठीक हो चुके मरीजों से इकट्ठी कर रहे दवाइयां, ऐसे करेंगे इस्तेमाल

Wed, 12 May 2021 11:11 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Tanuja Yadav Updated Wed, 12 May 2021 11:11 AM IST
सार

मुंबई में रहने वाले एक डॉक्टर जोड़े ने कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में एक मिसाल पेश की है। ये लोग कोरोना से ठीक हुए मरीजों से बची हुई दवा इकट्ठा करते हैं और वंचित-गरीब लोगों को देते हैं। 

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a doctor couple in Mumbai collecting medicines from covid recovered patient till now recovered 20kg medicines
कोरोना की दवा - फोटो : iStock

विस्तार

कोरोनाकाल के दौरान रेमडेसिविर या दूसरी दवाओं की कालाबाजारी की कई खबरें सुनने में आईं लेकिन मुंबई में एक डॉक्टर जोड़े ने एक ऐसा काम कर दिखाया है, जिससे कोरोना के दूसरे मरीजों को बहुत मदद मिल सकती है। दरअसल, कफ परेड में रहने वाले इस जोड़े ने कोरोना से ठीक हुए मरीजों के पास से वो दवाएं एकत्रित कर ली हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हुआ है।

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वंचित-गरीब मरीजों को मुफ्त में मिले दवा
पिछले 10 दिन में इस जोड़े ने कोरोना वायरस की 20 किलो दवा एकत्रित की है। ये दवाएं देश के ग्रामीण इलाकों में मौजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को दी जाएंगी ताकि कोरोना वायरस की चपेट में आए वंचित और गरीब लोगों को इलाज के लिए मुफ्त में दवाएं मिल सके। 
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10 दिन में 20 किलो दवा इकट्ठी की
एक मई को डॉक्टर मार्कस रैने और उनकी पत्नी डॉ. रैना ने एक कार्यक्रम की शुरुआत की। जिसके तहत उन्होंने कोरोना से ठीक हो गए मरीजों से वो दवाएं वापस ले ली, जिनका इस्तेमाल नहीं हुआ। इस अभियान के तहत अबतक 100 बिल्डिंग के निवासी अपनी अप्रयुक्त दवाएं दे चुके हैं। 
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डॉ. रैने का कहना है कि पूरे देश में लोग कोरोना की दवा के लिए परेशान हो रहे हैं, हर जगह मारामारी है, ऐसे में एक भी डोज या दवा को खराब क्यों करना है। इन दवाओं को ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को दिया जा सकता है। इस अभियान का नाम मेड्स फॉर मोर रखा गया है। 

पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मोमीटर भी इकट्ठा किया जा रहा है

इस अभियान के तहत कोरोना से पीड़ित मरीज को दिए जाने वाली दवा को इकट्ठा किया जा रहा है, जिसमें फेबिफ्लू, दर्द की दवा, एंटीबायोटिक, इनहेलर, विटामिन की दवा शामिल हैं। इसके अलावा पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मोमीटर को भी एकत्र किया जा रहा है। डॉ. रैने ने कहा कि सभी एकत्रित की गई दवाओं को अलग किया जाता है और एक्सपायरी डेट देखी जाती है। उन्होंने कहा कि अबतक हमने 20 किलो दवा इकट्ठी कर ली है। 

इस अभियान के बारे में लोगों को जितना पता चल रहा है, वो इसके तहत जुड़कर अपनी दवाएं दान में दे रहे हैं। जरूरतमंद मरीजों तक दवा पहुंचाने के लिए दोनों डॉक्टरों ने कई एनजीओ के साथ गठजोड़ किया है। उन्होंने अपना कंसाइनमेंट भी तैयार कर लिया है, जो गुजरात के आदिवासी इलाके में रहने वाले लोगों के लिए भेजा जा रहा है। 

संपर्क के लिए वेबसाइट और इंस्टाग्राम पेज पर जा सकते हैं
डॉ. रैने का कहना है कि अभी हमारी प्राथमिकता महाराष्ट्र और गुजरात में रहने वाले वंचित लोगों के लिए है और जल्द ही हम इसे बढ़ाएंगे। इस अभियान से जुड़ी एक सदस्य रूचि कोठारी का कहना है कि ये अभियान सिर्फ मुंबई तक ही सीमित नहीं है। इस शहर के किसी भी हिस्से से हमें अप्रयुक्त दवाएं भेजी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग भी इस अभियान के तहत दवाएं दान में देना चाहते हैं वो medsformoreindia@gmail.com या इंस्टाग्राम पर @medsformore.पेज पर संपर्क साध सकते हैं। 
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