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वुहान में लॉकडाउन का सामना करने वाले भारतीय ने बताया कैसे किया कोरोना से मुकाबला
Thu, 09 Apr 2020 05:58 PM IST
श्रीधर मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Thu, 09 Apr 2020 05:58 PM IST
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कोरोना से लड़ाई
दुनियाभर में जब लॉकडाउन का सिलसिला शुरू हो चुका था, तब कुछ भारतीय नागरिक चीन में ही रह गए थे। चीन के वुहान शहर से ही कोरोना वायरस निकला और फिर दुनियाभर में महामारी बन कर फैल गया। अब इन्हीं भारतीय नागरिकों ने भारत में रह रहे लोगों के लिए एक संदेश भेजा है। उनका कहना है कि इस खतरनाक वायरस से बचने के लिए दो चीजें सबसे जरूरी हैं। इनमें पहला सख्त लॉकडाउन का पालन करना और दूसरा खुद को सेल्फ आइसोलेट करना।
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बता दें कि चीनी प्रशासन की तरफ से बुधवार को 1.10 करोड़ आबादी वाले मध्य चीनी शहर में लॉकडाउन को हटा दिया गया। वुहान में रह रहे भारतीयों का कहना है कि 76 दिन के लॉकडाउन के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन अब इस प्रतिबंध के हटने के बाद वे काफी खुश हैं।
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वुहान में काम करने वाले भारतीय मूल के हाइड्रोबॉयोलॉजिस्ट अरुणजीत टी सथराजिथ ने बताया, मैं 73 दिनों तक अपने कमरे में बंद रहा। इस दौरान मैं अपने एक कमरे में रहता था और अनुमति के बाद अपने बाहर आया हूं। आज मुझे ठीक से बोलने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि इतने दिनों तक मेरे साथ कोई बात करने वाला नहीं था। हर कोई सख्त लॉकडाउन के कारण अपने घरों के अंदर कैद था।
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भारत ने दो एयर इंडिया की विशेष विमानों को भेजकर यहां से 700 भारतीयों और विदेशियों को निकाला था, लेकिन इस दौरान केरल के रहने वाले अरुणजीत ने वुहान में ही रहने का फैसला किया था। यह फैसला इसलिए बहादुरी भरा था क्योंकि उन्होंने महसूस किया कि मुश्किल भरी जगह से बच कर भाग जाना भारतीयों के लिए आदर्श की बात नहीं थी।
अरुणजीत उन चुनिंदा भारतीयों में से एक हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस के सेंटर कहे जाने वाले वुहान शहर में 1.10 करोड़ लोगों के साथ लॉकडाउन का सामना किया। उनके भारत वापस न आने का एक बड़ा कारण यह भी था कि उन्होंने सोचा कि अगर वो केरल लौटते हैं तो उनकी पत्नी और बच्चे के अलावा, 50 साल से अधिक उम्र वाले उनके माता-पिता और ससुराल वाले खतरे में पड़ सकते हैं।