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पुणे: 92 साल की बुजुर्ग महिला ने कोरोना को हराया, साढ़े तीन साल की परपोती ने भी जीती जंग
Wed, 22 Apr 2020 10:08 PM IST
श्रीधर मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Wed, 22 Apr 2020 10:08 PM IST
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coronavirus (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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देश इस समय कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहा है। कोविड-19 के बढ़ते मामलों और इससे हो रही मौतों की संख्या पर लगाम लगाना इस समय सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में पुणे की एक खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है, जहां 92 वर्षीय महिला ने कोरोना वायरस को मात दे दी है।
कोंढवा क्षेत्र की रहने वाली बुजुर्ग महिला की कोरोना से संघर्ष की कहानी कई मामलों में सबसे खास और अलग है। दरअसल बुजुर्ग महिला को सात महीने पहले लकवा का दौरा पड़ा था और अप्रैल के पहले सप्ताह में उन्हें कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला के साथ उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों में भी कोविड-19 के संक्रमण पाए गए। सभी को सिम्बायोसिस अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल के कार्यकारी अधिकारी डॉ विजय नटराजन ने कहा, "92 वर्षीय महिला और उनकी साढ़े तीन साल की परपोती समेत सभी चार सदस्यों को मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।"
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उन्होंने कहा कि समाज को, खासकर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को यह संदेश देना चाहिए कि अगर 92 साल की महिला जिसे स्ट्रोक हुआ था, वह वायरस को हरा सकती है, ऐसे में उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
नटराजन ने कहा कि आम धारणा है कि अगर 60 साल से ऊपर का कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो वह बच नहीं सकता है।
बुजुर्ग महिला के 55 साल के बेटे, जिनमें कोरोना वायरस सकारात्मक पाया गया था, ने कहा कि शुरू में परिवार यह जानकर सदमे में था कि उनकी मां सहित उनमें से चार लोगों में वायरस था। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो घबराने नहीं। उनके बेटे, जो कोरोना वायरस पॉजिटिव भी हैं, मौजूदा समय में सरकार की तरफ से संचालित केईएम अस्पताल में हैं, लेकिन वे भी ठीक होने की राह पर हैं।
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कोंढवा क्षेत्र की रहने वाली बुजुर्ग महिला की कोरोना से संघर्ष की कहानी कई मामलों में सबसे खास और अलग है। दरअसल बुजुर्ग महिला को सात महीने पहले लकवा का दौरा पड़ा था और अप्रैल के पहले सप्ताह में उन्हें कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला के साथ उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों में भी कोविड-19 के संक्रमण पाए गए। सभी को सिम्बायोसिस अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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अस्पताल के कार्यकारी अधिकारी डॉ विजय नटराजन ने कहा, "92 वर्षीय महिला और उनकी साढ़े तीन साल की परपोती समेत सभी चार सदस्यों को मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।"
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उन्होंने कहा कि समाज को, खासकर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को यह संदेश देना चाहिए कि अगर 92 साल की महिला जिसे स्ट्रोक हुआ था, वह वायरस को हरा सकती है, ऐसे में उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
नटराजन ने कहा कि आम धारणा है कि अगर 60 साल से ऊपर का कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो वह बच नहीं सकता है।
बुजुर्ग महिला के 55 साल के बेटे, जिनमें कोरोना वायरस सकारात्मक पाया गया था, ने कहा कि शुरू में परिवार यह जानकर सदमे में था कि उनकी मां सहित उनमें से चार लोगों में वायरस था। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो घबराने नहीं। उनके बेटे, जो कोरोना वायरस पॉजिटिव भी हैं, मौजूदा समय में सरकार की तरफ से संचालित केईएम अस्पताल में हैं, लेकिन वे भी ठीक होने की राह पर हैं।