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कोरोना की मार का एक कड़वा सच यह भी, निजता अब पूरी तरह से खत्म होने के कगार पर

Sat, 16 May 2020 04:50 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Rohit Ojha Updated Sat, 16 May 2020 04:50 PM IST
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9/11 saw much of our privacy swept aside Coronavirus could end it altogether
मोबाइल फोन - फोटो : पेक्सेल्स

कोरोना वायरस की महामारी पर सवार यह दुनिया एक अलग बदलाव की ओर बढ़ रही है। अब हमारे जीने के तरीकों में बदलाव हो रहे हैं। हम एक दूसरे से दूर हैं, लेकिन हमारी गोपनीय जानकारियां दूसरों तक पहुंच रही हैं। आजकल जब आप एयरपोर्ट पर लैंड करते हैं, तो एक कप में थूकते हैं और इसमें आपका डीएनए संग्रहीत होता है। किसी भी राज्य की सीमा पार करने के लिए अब लोगों को अपनी निजी जानकारी साझा करनी पड़ रही है।

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कोरोना ने दशकों के परिवर्तन पर केवल कुछ महीनों में ही गहरा चोट किया है। बहुत कुछ बदल रहा है, लेकिन अब हमारा निजी डेटा एक जगह तेजी से जमा हो रहा है। कब, कौन, कहां और किसके पास गया यहां तक की डेटाबेस में हमारा व्यक्तिगत डीएनए भी इकट्ठा हो रहा है। क्या अब ये सब नई वास्तविकता बनने की कगार पर खड़ा है।
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क्या यह गंभीर नहीं है कि यह नई दुनिया हमारी गोपनीयता को समाप्त कर देगी, जो हमारे पास पहले से ही बहुत कम बचा है या था? 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद बड़े पैमाने पर निगरानी का दौर शुरू हुआ और हम एक ऐसे दशक में दाखिल हुए, जहां हमारे दिमाग से आतंक के भय को निकालने के लिए देश की सरकारों ने व्यक्तिगत निजता पर वार किया। 
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इसके अगले 15 वर्षों में, मैसेजिंग एप्स, समाचार, और बच्चे के नाचने की तस्वीरें, या एक कुत्ते की ड्राइविंग की तस्वीरें मुफ्त में शेयर करने के लिए अरबों लोगों ने एक मौन सौदे के लिए सहमति फेसबुक और गूगल को दे दी। बवाल तब मचा जब कैंब्रिज एनालिटिका पर लोगों के निजी डेटा चुराने का आरोप लगा। करीब 10 लाख लोगों के डेटा का इस्तेमाल निजी कंपनियों ने चुनावों के लिए किया।

कोरोना के इस दौर में हम अपने निजी डेटा को बहा ना दें !

सरकारें हमारे मोबाइल फोन में एप डाउनलोड करवा रही हैं, ताकी पता चल सके की कौन संक्रमित है और क्या सावधानियां बरतनी हैं। दक्षिण कोरिया में 10 हजार सेलफोंस की निगरानी की जा रही और उन्हें बताया जा रहा है कि आपको तुरंत कोविड-19 की जांच करानी है।

ब्रिटेन में भी स्वास्थ्य को लेकर एक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। रूस में लोगों के लिए क्यूआर कोड जारी किए गए हैं और चीन हर घर के बाहर कैमरे लगवा रहा है। हम संक्रमित हैं या नहीं यह जानने के लिए सरकारें हमारे फोन में एप के द्वारा घुस रही हैं।

लेकिन सवाल यह है कि अगर कोविड-19 की महामारी जब खत्म हो जाएगी, तो क्या यह जांच खत्म हो जाएगी? या फिर हम 2020 के खत्म होने के बाद जब पीछे मुड़कर देखेंगे तो पता चलेगा कि हमारा निजी डेटा हमारा अब रहा ही नहीं वह तो सर्वव्यापी हो गया है।

क्योंकि 9/11 के हमले के बाद निगरानी के लिए जो कदम सिर्फ कुछ समय के लिए उठाए गए थे, वो धीरे-धीरे लोगों के जीवन का हिस्सा बन गए। उस समय सुरक्षा की आड़ में कई अवैध चीजों को वैध बनाया गया, जो बाद में हमेशा के लिए वैध ही रहीं। ठीक इस समय भी पूरे विश्व में लोगों की सुरक्षा के लिए डेटा को इकट्ठा किया जा रहा है।



क्या ये भी आगे चलकर हमारे सामान्य जीवन का स्थाई रूप से हिस्सा बन जाएंगे और हम हर वक्त किसी की निगरानी में होंगे। 9/11 के बाद से हमने अपनी निजी जानकारियों को खोना शुरू किया था, कहीं कोरोना वायरस के इस दौर में हम अपने निजी डेटा को बहा न दें।

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