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8th Pay Commission: 10 नहीं, बल्कि 5 साल में रिवाइज हों वेतनमान, कॉन्फेडरेशन ने लगाई पीएम मोदी से गुहार
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आठवां वेतन आयोग
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अमर उजाला
विस्तार
केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर आवाज बुलंद करनी शुरु कर दी है। वजह, संसद के शीतकालीन सत्र में सांसदों द्वारा आठवें वेतन आयोग गठित करने बाबत पूछे गए सवालों के जवाब में केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वेतन आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने इस विषय में पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पीएम से आग्रह किया गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में बिना किसी विलंब के आठवें वेतन आयोग का गठन किया जाए। यादव ने बताया, 10 वर्ष नहीं, बल्कि 5 साल में वेतनमान रिवाइज होने चाहिएं। मुद्रास्फीति का स्तर बढ़ रहा है, ऐसे में दस साल का वर्तमान संशोधन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अनुकूल नहीं है।कॉन्फेडरेशन ने पत्र में लिखा है, हमारा संगठन केंद्र सरकार के कर्मचारियों और श्रमिकों का एक बड़ा परिसंघ है। इसके साथ विभिन्न केंद्रीय सरकारी विभाग जैसे डाक, आयकर, एजी, लेखा परीक्षा विभाग, सर्वेक्षण विभाग, जनगणना, जीएसआई, सीपीडब्ल्यूडी व सीजीएचएस आदि में काम करने वाले लगभग 7 लाख कर्मचारी जुड़े हैं। इसके अलावा कर्मचारियों और श्रमिकों के 130 संगठन, परिसंघ के सहयोगी हैं। मौजूदा समय में डीए पात्रता का प्रतिशत 53% से अधिक हो गया। पिछले नौ वर्षों के दौरान मजदूरी के वास्तविक मूल्य में बहुत अधिक गिरावट आई है। खासतौर से कोविड-19 के बाद सरकारी कर्मियों को विपरित स्थितियों में काम करना पड़ा है। हमारे देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों की वेतन संरचना इतनी मजबूत होनी चाहिए कि इसे हर पांच साल में संशोधित किया जाना चाहिए।
इसके चलते सर्वोत्तम प्रतिभाशाली कर्मचारी अच्छा नेतृत्व और सुशासन प्रदान करने में सहायक होंगे। भारत सरकार एक आदर्श नियोक्ता है, उसे अपने कर्मचारियों को आरामदायक जीवन प्रदान करने का ध्यान रखना चाहिए। इसका लाभ यह होगा कि वे केंद्र सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों के कार्यान्वयन के लिए अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। केंद्र सरकार के कर्मचारियों का वेतनमान संशोधन 01.01.2026 से देय है, क्योंकि यह हर दस साल के बाद व्यवहार में आता है। पहले के केंद्रीय वेतन आयोगों को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने में लगभग 2 साल लगते रहे हैं। सरकार को रिपोर्ट पर विचार करने और इसे लागू करने में छह महीने या उससे अधिक समय लगता रहा है।
पीएम मोदी को लिखे पत्र के साथ अवलोकन एवं आवश्यक सकारात्मक कार्यवाही के लिए एक विस्तृत नोट संलग्न किया गया है। परिसंघ ने पीएम से अनुरोध किया है, अब समय आ गया है कि 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का बिना किसी देरी के गठन किया जाए। उच्च मुद्रास्फीति के स्तर और धन मूल्य में गिरावट के कारण यह आवश्यक हो गया है। समय पर वेतनमान संशोधन से केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी एक सभ्य जीवन जी सकेंगे। केंद्र सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना, आम आदमी तक उनका लाभ पहुंच सके, इन सबके लिए कर्मियों को बेहतर ढंग से काम करने की प्रेरणा मिलेगी।
केंद्र सरकार में अंतिम बार 1/1/2016 को वेतनमान संशोधित किया गया था। महामारी की स्थिति (कोविड) के बाद विनिर्माण उद्योग, निर्माण, स्वास्थ्य, सेवा क्षेत्र आदि सहित आवश्यक वस्तुओं और गैर-आवश्यक वस्तुओं की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं। उच्च ब्याज दरें भी कर्मचारियों/पेंशनभोगियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। मुद्रास्फीति चरम पर है। उच्च मुद्रास्फीति दर के कारण पिछले 9 वर्षों में वास्तविक धन मूल्य काफी कम हो गया है। यादव ने बताया, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के पास एक सभ्य जीवन स्तर होना चाहिए। इसके लिए एक सभ्य जीवनयापन वेतन प्रदान किया जाना चाहिए।
1.7.2024 तक, डीए पात्रता का प्रतिशत 53% से अधिक हो गया है। पिछले 9 वर्षों के दौरान मजदूरी के मूल्य में भारी गिरावट आई है। किसी भी वेतन संरचना की निवास अवधि 5 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए, विशेष रूप से इस पृष्ठभूमि में कि अधिकांश सार्वजनिक उपक्रमों में वेतन संशोधन 5 वर्ष के अंतराल पर होता है। इसी तरह, बैंक कर्मचारियों का वेतन संशोधन हर 5 साल में होता है। प्रति व्यक्ति मासिक घरेलू उपभोग व्यय 2011-12 से 2022-23 के दौरान दोगुना से अधिक हो गया है। यह डेटा एनएसएसओ द्वारा प्रकाशित किया गया था। इससे पता चलता है कि महंगाई के कारण हमारा खर्च भी दोगुना हो गया है, लेकिन पिछले दशक से हमारी मजदूरी उस हिसाब से नहीं बढ़ी है। भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है।
आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था 2027 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। जीडीपी 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर सकती है। केंद्र सरकार की भुगतान क्षमता अच्छी है। केंद्र सरकार के विभागों के लाभ और हानि को ध्यान में नहीं रखा जाना चाहिए, क्योंकि केंद्र सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी रक्षा, डाक, सड़क, रेलवे, पानी, भोजन, स्वास्थ्य, सर्वेक्षण विभाग आदि जैसी सामाजिक सेवाएं प्रदान करना है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों में कहा गया है कि कर्मचारियों की वेतन संरचना को व्यवहार्य बनाए रखने के लिए उनके वेतन ढांचे में सुधार करना आवश्यक है।
वेतन संरचना में मुद्रास्फीति के परिणामस्वरूप परिलब्धियों के वास्तविक मूल्य में किसी भी महत्वपूर्ण गिरावट को संबोधित करने की आवश्यकता होनी चाहिए। व्यक्ति को उसकी योग्यता का उचित एवं पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए। वेतन संरचना में वृद्धि बाजार की ताकतों के साथ तालमेल नहीं बिठा सकती, साथ ही यह इतनी अनाकर्षक भी नहीं होनी चाहिए कि प्रतिभा सरकारी सेवा की ओर आकर्षित न हो। सरकारी सेवा कोई अनुबंध नहीं है। यह एक स्थिति है। कर्मचारियों को केंद्र सरकार से उचित व्यवहार की उम्मीद है। राज्यों को सेवाओं के लिए एक रोल मॉडल की भूमिका निभानी चाहिए। इससे कर्मचारी उत्साह के साथ कार्य करते हैं।
इस संबंध में, भूपेन्द्र नाथ हजारिका और अन्य बनाम असम राज्य और अन्य (2013 (2) धारा 516 में रिपोर्ट) के मामले में टिप्पणियों को उद्धृत करना उपयोगी होगा, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है: यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि कर्मचारियों की वैध आकांक्षाओं को दोषी नहीं ठहराया जाए और ऐसी स्थिति न बनाई जाए, जहां उम्मीदें निराशा में समाप्त हो जाएं।
हर किसी के लिए आशा बेहद कीमती है और एक आदर्श नियोक्ता को अपनी वरिष्ठता के साथ शतरंज का खेल खेलकर इसे धोखेबाज और विश्वासघाती में नहीं बदलना चाहिए। हर कदम पर शांत संवेदनशीलता और चिंतित ईमानदारी की भावना झलकनी चाहिए। विश्वास का माहौल कायम करना होगा। जब कर्मचारी पूरी तरह से आश्वस्त होंगे कि उनके विश्वास के साथ विश्वासघात नहीं किया जाएगा और उनके साथ सम्मानजनक निष्पक्षता का व्यवहार किया जाएगा, तभी सुशासन की अवधारणा को मूर्त रूप दिया जा सकता है।