रोजाना 12 घंटे काम कर रही हैं 80 साल की शीला, कांग्रेस की वापसी के लिए कर रहीं कड़ी मेहनत
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दिल्ली में विकास का पर्याय कही जाने वाली शीला दीक्षित इस समय 80 साल की हो चुकी हैं। लेकिन इस उम्र में भी वे रोजाना बारह घंटे से ज्यादा कड़ी मेहनत कर रही हैं। क्योंकि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके ऊपर दिल्ली में कांग्रेस की वापसी करने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अनुभवी शीला दीक्षित जानती हैं कि इस बार उनकी चुनौती खासी कड़ी है, लेकिन बिना विचलित हुए वे अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं। जब से उन्होंने दोबारा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रुप में काम-काज संभाला है, सूने से रहने वाले पार्टी कार्यालय में अचानक बहार आ गई सी लगती है। दिन भर लोग उनसे मिलने आते रहते हैं और वे अपने अनुभव से उन्हें पार्टी को मजबूत बनाने की टिप्स देती रहती हैं।
तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित रोज सुबह लगभग सात बजे सोकर उठ जाती हैं। उनकी सुबह की शुरुआत एक टोस्ट और एक अंडे के साथ होती है। वे स्प्राउट के साथ थोड़ा पपीता या अन्य मौसमी फल लेती हैं और नींबू-पानी पीती हैं। चाय पीना शीला दीक्षित को पसंद नहीं है। कभी-कभी कॉफी पीना उन्हें अच्छा लगता है। इस बीच उनकी नजर कुछ अखबारों पर भी पड़ती रहती है। लगभग नौ बजे तक लोगों की भीड़ उनसे मिलने उनके घर जुट जाती है। वे समय निकालकर एक-एक कर सबसे मिलती रहती हैं और जरूरी संदेश देती रहती हैं। घर पर लगभग साढ़े ग्यारह बजे तक वे लोगों से मिलती हैं और उसके बाद पार्टी कार्यालय राजीव भवन की तरफ निकल देती हैं।
केरल की गवर्नर रह चुकीं शीला दीक्षित दिन भर पार्टी के अलग-अलग सेल की बैठकें ले रही हैं। अब तक वे महिला शाखा, युवा शाखा, पूर्व विधायकों, पार्षदों और पार्टी पदाधिकारियों की बैठकें ले चुकी हैं। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से मिलकर वे समझने की कोशिश कर रही हैं कि उनके इलाकों में पार्टी को मजबूत करने के लिए क्या किया जा सकता है। लगभग ढाई बजे तक उनकी बैठकें चलती रहती हैं। इसके बाद वे दोपहर में हल्का भोजन लेती हैं। भोजन में एक रोटी, दाल, मौसमी सब्जी और थोड़ा सा फल लेना पसंद करती हैं। चावल खाना उन्हें कम पसंद है।
शीला दीक्षित के एक खास सहयोगी ने बताया कि अगर समय की बाध्यता न हो तो वे इसी समय बाहर किसी कार्यक्रम पर जाना पसंद करती हैं। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से उन्हें तमाम कार्यक्रमों में बुलाया जा रहा है। लेकिन पार्टी संगठन के कामकाज को देखते हुए इस समय उनका कहीं जाना कम हो पा रहा है। शीला दीक्षित अपने पुत्र संदीप दीक्षित की बेटी यामिनी को बहुत प्यार करती हैं। सुबह के समय या शाम को वे अपने परिवार को भी साथ-साथ समय देती रहती हैं।
शाम के समय शीला दीक्षित खाना खाना पसंद नहीं करती हैं। वे अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत सतर्क रहती हैं और कुछ भी ऐसी चीज नहीं खातीं जिससे उनके स्वास्थ्य पर जरा सा भी बुरा प्रभाव पड़े। शाम को सोने के समय सूप के साथ टोस्ट लेना पसंद करती हैं। मिरांडा हाउस की शानदार छात्रा रह चुकीं शीला दीक्षित समय मिलने पर इसी समय किताबें पढ़ना पसंद करती हैं।