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20 दिनों में 72 डॉक्टर कोरोना से गवां चुके हैं जान, छुट्टी लेने या नौकरी छोड़ने पर हो रहे हैं मजबूर

Sat, 01 May 2021 04:07 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 01 May 2021 04:07 PM IST
सार

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ. जयेश लेले ने कहा, देश में जब से कोरोना की दूसरी लहर आई है इसके बाद हालत ज्यादा खराब होते नजर आ रहे हैं। बीते 20 दिनों में देशभर में करीब 72 डॉक्टरों की मौत कोरोना से हो चुकी है...

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72 doctors have died in the last 20 days in the country, frightened doctors are now looking for an option to take leave from hospital or quit their jobs
डॉक्टरों के साथ हिंसा - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

देश में कोरोना संक्रमण विकराल रूप ले चुका है। आए दिन राज्यों में नए केसों में भारी बढोतरी देखने को मिल रही है। इस बीच मरीजों को जान बचाने के लिए देश के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी पूरे जी जान के साथ जुटे हुए हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण कि इस दूसरी लहर से वे भी नहीं बच पा रहे हैं। बीते 20 दिनों में देश में अब तक 72 डॉक्टरों की मौत हो चुकी हैं। बढ़ते संक्रमण के बीच अब डॉक्टर अस्पतालों से छुट्टी लेने या नौकरी छोड़ने का विकल्प तलाशने करने लगे हैं।

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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ. जयेश लेले ने अमर उजाला से कहा, देश में जब से कोरोना की दूसरी लहर आई है इसके बाद हालत ज्यादा खराब होते नजर आ रहे हैं। बीते 20 दिनों में देशभर में करीब 72 डॉक्टरों की मौत कोरोना से हो चुकी है। हमने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा कर अनुरोध किया है कि सभी राज्यों में डॉक्टरों की मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। डॉक्टरों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए अस्पतालों में बेड आरक्षित किए जाएं ताकि उनके इलाज में किसी प्रकार कोई दिक्कत नहीं हो।
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वहीं डॉ. लेले आगे यह भी कहा कि आए दिन देश में कई जगह से डॉक्टरों पर हमले होने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। ऐसे में हमने सरकार से मांग है कि जो लोग भी डॉक्टरों पर हमले कर रहे हैं। उन पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में लोग डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ इस तरह के बर्ताव करने से बाज आए।

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हमले और संक्रमण से सहमे हैं डॉक्टर

मध्यप्रदेश के इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज से निकले और 50 वर्षों से दिल्ली में कार्यरत वरिष्ठ डॉ. हरीश भल्ला ने अमर उजाला से चर्चा करते हुए कहा, कोरोना काल में सरकार की तरफ से डॉक्टरों को किसी भी प्रकार सुविधा नहीं दी जा रही है। आज डॉक्टरों में असुरक्षा की भावना देखने को मिल रही है क्योंकि कोरोना मरीज के इलाज के दौरान अगर वे संक्रमित हो जाते हैं तो उन्हें इलाज के लिए अपने ही अस्पतालों में जगह तक नहीं मिल रही है।

डॉ. भल्ला ने सरकार से सवाल करते हुए कहा, आज सरकार तमाम प्रकार के लोगों को आरक्षण व अन्य सुविधाएं दे रही है लेकिन इस कठिन दौर में जो डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी जो अपनी जान को दांव पर लगाकर लोगों की सेवा कर रहे हैं क्या उन्हें अस्पतालों में इलाज के लिए आरक्षण और अन्य सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए। आज जो डॉक्टर कोविड अस्पतालों में काम कर रहे हैं सरकार को उनका बीमा करवाना चाहिए ताकि उनमें हिम्मत बंधी रहे। अगर सरकार नहीं करती तो निजी अस्पतालों को अपने डॉक्टरों के लिए ये सुविधाएं चाहिए।

डॉ. भल्ला ने डॉक्टरों पर हमला करने वालों से सवाल किया, डॉक्टरों पर ही हमला क्यों कर रहे हो। अपने नेताओं पर क्यों नहीं करते जिन्हें आपने वोट देकर सत्ता तक पहुंचाया। उनसे पूछिए कि आपके शहर के अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन, इंजेक्शन या दवाओं की कमी क्यों है। इसका प्रबंध करना किसी डॉक्टर का तो काम नहीं है, उसका काम सिर्फ इलाज करना है। आज डॉक्टरों पर बढ़ते हमले और प्राइवेट अस्पतालों के दबाव के कारण ही नई पीढ़ी के बच्चे डॉक्टर बनने से बच रहे हैं।

डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों पर सफदरजंग अस्पताल के सफदरजंग अस्पताल के प्रोफेसर, निदेशक कम्यूनिटी मेडिसिन डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला से कहा कि, आज लोग सिस्टम से बहुत हताश हो गए हैं। इसलिए लोग गुस्सा होकर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला कर रहे हैं। देश में कही भी डॉक्टरों पर हमले की कोई घटना होती है तो पूरे स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों को धक्का लगता है।  

बढ़ते कोरोना संक्रमण का असर डॉक्टरों पर देखने को मिल रहा है। डॉक्टर और स्वास्थकर्मी भी कोरोना की चपेट में आ जाते है। आज अस्पतालों में स्टॉफ की कमी है। एक ही डॉक्टर कई शिफ्ट में अपनी जान पर खेलकर ड्यूटी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उन हमले की घटना सामने आती है तो ऐसे में डॉक्टर अपनी लाइफ के बारें में सोचते हुए नौकरी छोड़ने का फैसला लेते हैं या फिर छुट्टियों पर चले जाते हैं।

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