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लोकसभा डायरी: अनुच्छेद 370 हटने के बाद संघर्ष विराम उल्लंघन में 70 लोगों की मौत

Wed, 17 Mar 2021 03:15 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 17 Mar 2021 03:15 AM IST
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70 people dead after removal of Article 370 in ceasefire violation
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी - फोटो : लोकसभा

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद सीमा पार से हुए संघर्ष विराम उल्लंघन में कुल 70 लोगों की मौत हुई। इसमें 31 आम नागरिक और 39 सुरक्षा कर्मी शामिल हैं।

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उन्होंने एक लिखित जवाब में बताया कि केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 14460 बंकर बनाने को मंजूरी दी है। संघर्ष विराम उल्लंघन के दौरान स्थानीय लोगों की जान बचाने के लिए इन बंकरों में रखा जाएगा।
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जम्मू-कश्मीर 32.31 लाख लोगों को दिए गए आवास प्रमाणपत्र: केंद्र
जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि जम्मू-कश्मीर में आवास प्रमाण पत्र के लिए 31 दिसंबर 2020 तक कुल 35,44,938 आवेदन मिले थे जिनमें से 32,31,353 लाख लोगों को आवास प्रमाण पत्र दिए गए। वहीं 2,15,438 लाख लोगों के आवेदन रद्द कर दिए गए।
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कोरोना व सुरक्षा के चलते सिखों के जत्थे को पाकिस्तान जाने से रोका गया
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि फरवरी में कोरोना महामारी और सुरक्षा को खतरे के चलते सिखों के जत्थे को पाकिस्तान के ननकाना साहिब जाने से रोका गया। 1974 के द्विवपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत भारत पाकिस्तान के बीच चार मौकों पर सिखों को पाकिस्तान जाने की सहमति है।

ये मौके हैं, बैसाखी, गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस, महाराजा रंजीत सिंह की पुण्यतिथि और गुरुनानक देव जी का प्रकाशोत्सव। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस बार फरवरी में इस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और सिखों के किसी जत्थे को पाकिस्तान नहीं जाने दिया गया। ऐसा सुरक्षा के खतरे और कोरोना संक्रमण के चलते किया गया।

राजद्रोह कानून के दुरुपयोग पर लोकसभा में विपक्ष व सरकार के बीच नोकझोंक
सरकार द्वारा राजद्रोह कानून के इस्तेमाल को लेकर लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष व केंद्र सरकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

कांग्रेस ने जहां सरकार पर विरोध की आवाज दबाने के लिए राजद्रोह कानून का गलत इस्तेमाल करने और लोकतंत्र को शर्मसार करने का आरोप लगाया वहीं केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, हमें लोकतंत्र पर किसी से भी व्याख्यान लेने की जरूरत नहीं।

प्रश्नकाल के दौरान तेलंगाना से कांग्रेस सांसद अनुमूला रेवंत रेड्डी ने पूछा कि बीते दस वर्षों में देशभर में राजद्रोह के कितने मामले दर्ज किए गए। उन्होंने साथ ही इन मामलों में कितने दोषी ठहराये गए और सरकार द्वारा इनकी त्वरित सुनवाई के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।

कांग्रेस सांसद का आरोप था कि सरकार विरोध को दबाने के लिए इस कानून का गलत इस्तेमाल करती है। जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने एक लिखित जवाब में सदन को बताया कि देशद्रोह लगाने में केंद्र का कोई हाथ नहीं होता।

उन्होंने बताया कि 2014 में 47, 2015 में 30, 2016 में 35, 2017 में 51, 2018 में 70 और 2019 में 93 देशद्रोह के मामले दर्ज किए गए। 2014-2019 के बीच सबसे अधिक 54 मामले असम में दर्ज हुए। वहीं झारखंड में 36, हरियाणा में 31, कर्नाटक में 30, जम्मू-कश्मीर में 25 और यूपी में 17 मामले दर्ज हुए।

हालांकि कांग्रेस सांसद केंद्रीय मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जब दस साल का ब्योरा मांगा गया तो सिर्फ छह साल की जानकारी ही क्यों दी। आधी जानकारी देकर सरकार सदन को गुमराह कर रही है। 2014 के बाद जिसने भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई उस पर मौजूदा सरकार ने देशद्रोह लगाया।


उन्होंने कहा, 2019 में देशद्रोह मामले में दोषी ठहराये जाने का औसत 3.3 फीसदी ही था। इससे साफ है कि ये मामले राजनीतिक कारणों से दर्ज किए गए।

कांग्रेस सांसद ने कहा, अगर एक युवा नेता को देशद्रोह के मामले में घसीटा जाता है और कोर्ट 4-5 साल बाद उसे बरी कर देती है तो इस अवधि में उसका पूरा करियर चौपट हो जाता है। न तो उसके पास नौकरी रहती है और ही उसे पासपोर्ट या वीजा मिलता है। उन्होंने कहा, जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि का ही उदाहरण ले लीजिए।



 

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