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सीजीपीएससी पेपर लीक केस: लीक पर्चा देते ही ओएसडी के खाते में हुए 170 ट्रांजैक्शन, जमा हुए 66 लाख रुपये
Mon, 14 Sep 2026 06:38 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 14 Sep 2026 06:38 PM IST
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ED
- फोटो : ED
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने तीन दिन पहले चेतन बोरघरिया को गिरफ़्तार किया था। वे छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी (विशेष ड्यूटी पर अधिकारी) थे। अभी वे बलरामपुर-रामानुजगंज, छत्तीसगढ़ में एडिशनल कलेक्टर के पद पर तैनात हैं। यह गिरफ़्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। यह मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और हेरफेर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित है।
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ईडी की जांच आर्थिक अपराध शाखा/एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। यह एफआईआर सीजीपीएससी राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, हेरफेर और गड़बड़ियों के संबंध में दर्ज की गई थी। बाद में मुख्य अपराध (प्रेडिकेट ऑफिस) की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली। सीबीआई ने सीजीपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। बाद में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई।
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ईडी की जांच से पता चला है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने सीजीपीएससी स्टेट सर्विस परीक्षा, 2021 के कई उम्मीदवारों से तीन करोड़ रुपये से ज़्यादा की अवैध रकम वसूली थी। उन्होंने उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया था कि वे तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी कथित पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल करके उन्हें पहले से ही प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराएंगे। उन्हें चयन पक्का होने का भरोसा दिया। जांच में यह भी पता चला कि ऐसा भरोसा दिलाने के लिए चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया था, जो उस समय मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी के पद पर तैनात थे।
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परीक्षा से पहले कुछ उम्मीदवारों को कथित तौर पर लीक हुए प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराए गए थे। प्रारंभिक परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में इकट्ठा किया गया था, जहां उन्हें कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्न-पत्र बांटा गया था। इसके बाद, उम्मीदवारों को बरनवापारा सैंक्चुअरी रिज़ॉर्ट में ठहराया गया, जहां उन्हें मुख्य परीक्षा से संबंधित लीक हुए प्रश्न-पत्रों के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग दी गई। वित्तीय जांच से पता चला कि उस दौरान चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 ट्रांजैक्शन के ज़रिए कुल 66.64 लाख रुपये नकद जमा किए गए थे। जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई वित्तीय लेन-देन का भी पता चला है।
इससे पहले, ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 01.09.2026 को चेतन बोरघरिया के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी के दौरान, मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल डिवाइस बरामद और ज़ब्त किए गए। डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच से चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच बातचीत का पता चला, जिसमें मुख्य रूप से वित्तीय लेन-देन और पैसे की वापसी/भुगतान की मांग शामिल थी। जांच में फिगरकेव ई-कॉम (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन का भी पता चला है। जांच एजेंसी को शक है कि इस कंपनी का इस्तेमाल फंड की लेयरिंग और आवाजाही के लिए किया गया था।
जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों, जिनमें डिजिटल सबूत, बैंकिंग लेन-देन और पीएमएलए, 2002 के तहत दर्ज बयान शामिल हैं, से पता चला कि चेतन बोरघरिया, अपराध से हुई कमाई की विभिन्न प्रक्रियाओं और गतिविधियों से जुड़े थे। इनमें कमाई को हासिल करना, अपने पास रखना, छिपाना और इस्तेमाल करना शामिल है। इसके आधार पर, चेतन बोरघरिया को 11.09.2026 को गिरफ्तार किया गया। चेतन बोरघरिया को रायपुर की विशेष अदालत के सामने पेश किया गया, जिसने आगे की जांच के लिए छह दिन की ईडी कस्टडी मंज़ूर की गई है।