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7 साल पहले ही राजीव गांधी को हो चुका था अपनी मौत का अंदेशा?

amarujala.com- Presented by: आनंद Updated Mon, 22 May 2017 04:47 PM IST
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7 years ago Rajiv Gandhi had lost his fear of death?

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21 मई, 1991 को शाम के आठ बजे थे। कांग्रेस की बुजुर्ग नेता मारगाथम चंद्रशेखर मद्रास के मीनाबक्कम हवाई अड्डे पर राजीव गांधी के आने का इंतजार कर रही थीं। थोड़ी देर पहले जब राजीव गांधी विशाखापट्टनम से मद्रास के लिए तैयार हो रहे थे तो पायलट कैप्टन चंदोक ने पाया कि विमान की संचार व्यवस्था काम नहीं कर रही है। राजीव मद्रास जाने का विचार त्याग गेस्ट हाउस के लिए रवाना हो गए।
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लेकिन तभी किंग्स एयरवेज के फलाइट इंजीनियर ने संचार व्यवस्था में आया नुख्स ठीक कर दिया। विमान के क्रू ने तुरंत पुलिस वायरलेस से राजीव से संपर्क किया और राजीव मद्रास जाने के लिए वापस हवाई अड्डे पहुंच गए। दूसरे वाहन में चल रहे उनके पर्सनल सुरक्षा अधिकारी ओपी सागर अपने हथियार के साथ वहीं रह गए।


मद्रास के लिए विमान ने साढ़े छह बजे उड़ान भरी। राजीव खुद विमान चला रहे थे। जहाज ने ठीक आठ बज कर बीस मिनट पर मद्रास में लैंड किया। वो एक बुलेट प्रूफ कार में बैठ कर मार्गाथम, राममूर्ति और मूपानार के साथ श्रीपेरंबदूर के लिए रवाना हो गए।
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