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Lancet Report: दक्षिण एशिया में 63 फीसदी बच्चे समय पूर्व जन्मे, मेडिकल जर्नल लैंसेट ने जारी की रिपोर्ट
Sat, 13 May 2023 05:24 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 13 May 2023 05:24 AM IST
सार
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 36 से 37वें सप्ताह के दौरान शिशुओं के जन्म लेने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में जहां इन बच्चों की संख्या पूरी दुनिया में ज्यादा है, वहीं बांग्लादेश में सबसे ज्यादा अपरिपक्व शिशु दर है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ की संयुक्त रिपोर्ट सामने आने के बाद अब मेडिकल जर्नल लैंसेट ने भी समय पूर्व बच्चों के जन्म को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार, दुनिया के 63 फीसदी गर्भावस्था की कम अवधि वाले मामले दक्षिण एशिया में है। भारत और उसके आसपास के देशों में ऐसे मामले सबसे अधिक हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 36 से 37वें सप्ताह के दौरान शिशुओं के जन्म लेने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में जहां इन बच्चों की संख्या पूरी दुनिया में ज्यादा है, वहीं बांग्लादेश में सबसे ज्यादा अपरिपक्व शिशु दर है। दुनिया के करीब दो तिहाई छोटे गर्भकालीन आयु (एसजीए) के मामले दक्षिण एशिया में है। इस क्षेत्र में वैश्विक औसत और एसजीए की बहुत उच्च दरों की तुलना में अपरिपक्व जन्म की दर ज्यादा है।
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केपटाउन में बीते मंगलवार से जारी ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृ नवजात स्वास्थ्य सम्मेलन’ (आईएमएनएचसी 2023) में लॉन्च इस रिपोर्ट में बताया कि साल 2020 में 10 जीवित जन्मे शिशुओं में से एक अपरिपक्व थे और पांच में से एक छोटी गर्भकालीन आयु से जुड़े थे। दक्षिण एशिया में आधे से अधिक नवजात शिशु छोटे गर्भकालीन आयु से प्रभावित हैं। ब
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निम्न और मध्यम वर्गीय देशों में गंभीर संकट
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन कॉलेज के प्रो. एरिक ओ हुमा ने कहा, अगर बीते वर्ष या दशक की आपस में तुलना करें तो दुनिया में छोटे गर्भकालीन आयु के मामलों में सुधार देखने को मिल रहा है लेकिन भौगोलिक स्थिति पर देखें तो दक्षिण एशिया के देशों में यह गंभीर स्थिति बनी हुई है। निम्न और मध्यम वर्गीय देशों में यह एक गंभीर संकट है। यहां गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सेहत पर और अधिक काम करने की आवश्यकता है।