62 छावनियों के पास है देश की सबसे ज्यादा जमीन
क्या होती है छावनी
छावनियां भारतीय सेना की उस जगह को कहते हैं जहां सेना की एक टुकड़ी लंबे समय तक रहती है। इन्हें स्थायी मिलिट्री स्टेशन भी कहा जा सकता है। छावनियों की चार श्रेणियां हैं जो किसी छावनी के अंदर रहने वाली आबादी के आकार पर निर्भर करती हैं। छावनियों में वित्तीय तथा भूमि संबंधी प्रतिबंध, विशेषकर आवासीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए उनके अनुज्ञेय प्रयोग के बावजूद भी आज इनमें हरा-भरा क्षेत्र है जो वातावरण के संतुलन को बनाए रखने में मददगार हैं। छावनी बोर्ड का गठन छावनी अधिनियम 2006 के तहत किया गया है।
यह हैं 62 छावनियां
केंद्रीय कमांड
1. आगरा
2. इलाहाबाद
3. अल्मोड़ा
4. बरेली
5. चकराता
6. क्लीमेंट टाउन
7. दानापुर
8. देहरादून
9. फैजाबाद
10. फतेहगढ़
11. जबलपुर
12. कानपुर
13. लंदौर
14. लैंसडाउन
15. लखनऊ
16. मथुरा
17. मेरठ
18. महू
19. नैनीताल
20. पंचमढ़ी
21. रामगढ़
22. रानीखेत
23. रुड़की
24. शाहजहांपुर
25. वाराणसी
पूर्वी कमांड
1. बरकपुर
2. शिलॉन्ग
3. जलापहाड़
4. लेबॉन्ग
उत्तरी कमांड
बदामीबाग
दक्षिणी कमांड
1. अहमदाबाद
2. अहमदनगर
3. अजमेर
4. औरंगाबाद
5. बबीना
6. बेलगाम
7. कन्नानोर
8. देहूरोड
9. दियोलाई
10. झांसी
11. काम्पटी
12. किरकी
13. मोरार
14. नसीराबाद
15. पुणे
16. सौगेर
17. सिकंदराबाद
18. सेंट थॉमस माउंट कम पल्लावरम
19. वेलिंगटन
पश्चिमी कमांड
1. अंबाला
2. अमृतसर
3. बकलोह
4. दगशई
5. डलहौजी
6. दिल्ली
7. फिरोजपुर
8. जालंधर
9. जम्मू
10. जुटोघ
11. कसौली
12. खासयोल
13. सुभाथू
देश के टॉप 10 छावनी शहर
रानीखेत- उत्तराखंड
उत्तराखंड के रानीखेत में मौजूद भारतीय सेना की छावनी को भारत की सबसे खूबसूरत छावनी माना जाता है। अल्मोड़ा के जिले में स्थित रानीखेत पर्वतों से घिरा हुआ है। यह कुमाउं रेजीमेंट और नागा रेजीमेंट का घर है। इसके महत्वपूर्ण शहर की देख-रेख भारतीय सेना करती है।
कसौली- हिमाचल प्रदेश
खूबसूरत छावनियों में कसौली का स्थान दूसरे नंबर पर है। यह एक छोटा सा हिल स्टेशन सोलन जिले में स्थित है। इस छावनी को साल 1842 में अंग्रेजों ने बसाया था। यहां सबसे पहले लाइट इनफैंटरी की टुकड़ी को रखा गया था। यहां अभी भी ब्रिगेड हेडक्वार्टर मौजूद हैं।
चकराता- उत्तराखंड
यमुना और टोंस नदीं पर स्थित चकराता देहरादून से 92 किलोमीटर की दूरी पर स्थित छावनी है। स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के स्थायी निवास के अलावा इस छावनी का इस्तेमाल भारतीय सुरक्षा एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) अधिकारियों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता है। चकराता अपने घने जंगलों, हरियाली और खुशनुमा मौसम के लिए जाना जाता है।
डलहौजी- हिमाचल प्रदेश
डलहौजी की स्थापनी अंग्रेजी राज में साल 1854 में हुई थी। इसे सैनिकों और ब्यूरोक्रेट्स को गर्मी से राहत देने के लिए बसाया गया था। अंग्रेजी वायसराय लॉर्ड डलहौजी के नाम पर इसका नाम डलहौजी रखा गया है। 1860 में यह अंग्रेजी सेना की पसंदीदा जगह थी। डलहौजी छावनी की स्थापना 1867 में हुई थी।
पंचमढ़ी- मध्य प्रदेश
अंग्रेजी सेना के कैप्टन जेम्स फोरसिथ और सूबेदार मेजर नाथू रामजी पंवार ने 1857 में पंचमढ़ी में स्थित पठार को उस समय देखा था जब वह अपनी सैन्य टुकड़ी को झांसी लेकर जा रहे थे। यह तेजी से भारत के केंद्रीय प्रांतों में बसे ब्रिटिश सैनिकों के लिए पहाड़ी स्टेशन और सैनिटेरियम में विकसित हुआ। इस छावनी की स्थापना 1872 में हुई थी।
शिलॉन्ग- मेघालय
शिलॉन्ग छावनी की स्थापनी 1885 में हुई थी। कहा जाता है कि इसकी पहाड़ियां यूरोपीय देश स्कॉटलैंड की याद दिलाता है इसी वजह से इसे पूरब का स्कॉटलैंड कहा जाता है। शिलॉन्ग शहर की स्थापना अंग्रेजी सरकार द्वारा 1864 में हुई थी। एक भूकंप ने इस शहर को तबाह कर दिया था जिसके बाद 1897 में इसे दोबारा बसाया गया।
हारसिल- उत्तराखंड
भागीरथी नदी पर स्थित हारसिल एक छावनी क्षेत्र है। इसे हिमालय की गोद में बसे छुपे गहने के तौर पर देखा जाता है। छावनी क्षेत्र होने के साथ ही यह चीन सीमा के नजदीक है। इसी वजह से यहां लोगों को प्रवेश देने से पहले सेना काफी सचेत रहती है। यहां विदेशी नागरिकों का प्रवेश वर्जित है।
लैंसडाउन- उत्तराखंड
लैंसडाउन के संस्थापक और इसका नाम अंग्रेजी वायसरॉय लॉर्ड लैंसडाउन के नाम पर लैंसडाउन रखा गया है। इसकी स्थापनी 1887 में हुई थी। इसे गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों को ट्रेनिंग देने के लिए बनाया गया था। आज भी यहां गढ़वाल राइफल्स का कमांड ऑफिस मौजूद है। यह अंग्रेजी राज के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों की गतिविधियों का स्थल भी रहा है।
लंदौर- उत्तराखंड
देहरादून से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अंग्रेजी राज के दौरान काफी लोकप्रिय था। अंग्रेजी सेना ने इसकी स्थापना 1827 में की थी। यहां उन्होंने एक सैनिटोरियम बनाया था। यह सैनिटोरियम अब डीआरडीओ की संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट के पास है।
बकलोह- हिमाचल प्रदेश
चंबा के राजा से अंग्रेजों ने 1866 में 5000 रुपए में इसे खरीदा था। यहां 1866 में छावनी की स्थापना की गई थी। इसे गोरखा छावनी की चौथी रेजीमेंट के लिए बनाया गया था।