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तिनसुकिया: हिंसा में मारे गए 60 साल के भाई को ठेले पर अस्पताल ले गए थे सुनील, सुनाई पूरी कहानी

Sun, 04 Nov 2018 12:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिनसुकिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिनसुकिया Updated Sun, 04 Nov 2018 12:15 PM IST
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60 year old Subal Das was taken to hospital on hand card by brother in Tinsukia
तिनसुकिया हिंसा - फोटो : PTI

असम के तिनसुकिया जिले में संदिग्ध उल्फा उग्रवादियों ने पांच बंगालियों की हत्या कर दी थी। उन्हीं पांच में से एक थे सुनील दास के 60 वर्षीय छोटे भाई सुबल। घटना गुरुवार रात की है। सुनील उस दिन की कहानी बताते हुए कहते हैं, 'मेरा बेटा रोन्तू और मैं खेतों में काम कर रहे थे तभी हमें पता चला कि पांच लोगों को गोली मारी गई है। मेरे भाई सुबल गोली लगने के बाद जीवित थे। इतने में 15 मिनट बीत चुके थे। हम घटनास्थल पर गए और देखा कि 4 लोगों की मौत हो चुकी है और केवल सुबल ही जीवित थे। वह बेहोशी की हालत में थे। उनके पैर और पेट में चार गोलियां लगी थीं।'


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वह कह रहे थे, 'दादा मेडिकल निए चलो... (भाई, मुझे अस्पताल लेकर चलो)। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। वह बार बार पानी मांग रहे थे।' हालांकि सुनील ने अपने भाई को अस्पताल ले जाने के लिए आसान तरीका सोचा था। उनके बेटे ने अपने दोस्त को फोन कर ऑल्टो गाड़ी मंगवाई। लेकिन इसमें भी 10-15 मिनट का समय लग जाता। इसके बाद उन्होंने ठेले पर सुबल को लिटाया और अस्पताल की ओर भागे। उन्हें उम्मीद थी कि रास्ते में कोई गाड़ी मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाद में सुबल दास की भी मौत हो गई।

सुनील दास का परिवार उस जगह से काफी दूर रहता है जहां लोगों को गोली मारी गई। 5 लोगों को गोली मारी गई थी। सुनील कहते हैं गांव की पंचायत में भी 6 ग्रामीण  हैं। जिनमें आदिवासी, नेपाली, असमिया और बंगाली हैं। कभी किसी समुदाय के बीच संघर्ष नहीं हुआ।

घटना के बाद विभिन्न संगठनों की अपील पर शनिवार को 24 घंटे के असम बंद की वजह से राज्य में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। गुवाहाटी में तो बंद का खास असर नहीं नजर आया। लेकिन बराक घाटी के बांग्लाभाषी बहुल इलाकों में इसका काफी असर रहा। 

रविवार को डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल ने हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात की। साथ ही प्रत्येक परिवार को 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया।

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