भारतीय लोक सेवा प्रसारण 'दूरदर्शन' को आज पूरे 59 साल हो गए हैं। साल 1959 को 15 सितंबर के ही दिन इसे लॉन्च किया गया था। जो कि आधुनिक भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। अगर दूरदर्शन के लोगो को देखें तो यह एक आंख की तरह लगता है। जिससे हम दुनिया जहान के सारे दृश्य देख पाएं। चलिए आज हम आपको बताते हैं दूरदर्शन, उसके लोगो और लोगो को बनाने वाले देबाशीष भट्टाचार्या के बारे में कुछ खास बातें-
5 मिनट के न्यूज बुलेटिन से हुआ था शुरू
दूरदर्शन को भारत सरकार द्वारा नामित प्रसार भारती के अंतर्गत चलाया जाता है। 5 मिनट के न्यूज टेलिकास्ट से शुरू हुआ दूरदर्शन कुछ ही समय में लोगों के मनोरंजन का साधन बन गया। जिसमें लोगों को महत्वपूर्ण जानकारी दी जाती है। दूरदर्शन पर आने वाले कार्यक्रम कृषि दर्शन के बारे में भला कौन नहीं जानता। भारतीय टेलीवीजन पर चलने वाले यह सबसे लंबा प्रोग्राम है।
70, 80 और 90 के दशक के हर व्यक्ति को याद आता है वो वक्त
70, 80 और 90 के दशक में पले बढ़े लोगों के लिए टीवी सेट आने की खुशी का अंदाजा आज के जमाने के बच्चे नहीं लगा सकते। घर में पहले टीवी सेट आना और बाद में केबल का भी आ जाना किसी सपने से कम नहीं था। रविवार को धार्मिक कार्यक्रम देखने के लिए घर के सभी लोगों का टीवी सेट के आगे बैठ जाना, उस दशक को जीने वाले सभी लोग याद करते होंगे।
फिल्मी गानों से तो मानो पूरा दिन ही महक उठता था। आज की तरह नहीं कि हर चीज फोन पर हाजिर हो। परिवार के लोगों को भी अब साथ बैठने का वक्त कहां मिल पाता है। उस दौरान सबसे ज्यादा खुशी होती थी उस दोस्त के घर जाने की जिसके घर पर टीवी सेट होता था। भारत पाकिस्तान के मैच के बीच जब केबल चला जाए तो रोमांच कई गुना तक बढ़ जाता था।
8 दोस्तों ने किया तैयार
दूरदर्शन की आंख (लोगो) को एनआईडी के पूर्व छात्र देबाशीष भट्टाचार्य ने अपने दोस्तों के साथ तैयार किया था। जब दूरदर्शन ने ऑल इंडिया रेडियो से अलग होने का फैसला किया, तो उस वक्त उनको अपना अलग लोगो भी चाहिए था। इसकी जिम्मेदारी एनआईडी के छात्रों को दी गई थी।
इंसान की आंख के आकार का लोगो
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देबाशीष ने इंसान की आंख के आकार का लोगो बनाया। इसके दोनों तरफ उन्होंने दो घुमावदार कर्व यिन और यांग के आकार बनाए और अपने अध्यापक विकास सतवालेकर को सौंप दिया।