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महंगाई पर काबू पाने की योजना: पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल मिलाने से 55000 करोड़ की होगी बचत

Fri, 12 Nov 2021 03:04 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 12 Nov 2021 03:04 AM IST
सार

फिलहाल देश में 10 फीसदी एथनॉल मिला पेट्रोल ही मिल रहा है। वह भी कुल पेट्रोल का 80 फीसदी। बाकी में कोई मिलावट नहीं हो रही है। देश में 700 किलोलीटर एथनॉल उपलब्ध है, जिसमें केवल 300 किलोलीटर ही पेट्रोल में मिलाई जा रही है।

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55000 crores will be saved by mixing 20 Percent ethanol in petrol
पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार एक अप्रैल, 2023 से पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल मिलाने की योजना लागू करने की तैयारी में है। इसके अगले दो साल बाद यानी अप्रैल, 2025 से पूरे देश में सिर्फ वही पेट्रोल उपलब्ध होगा, जिसमें 20 फीसदी एथनॉल मिला होगा। इससे हर साल 55,000 करोड़ रुपये की बचत होगी।

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पेट्रोलियम सचिव तरुण कपूर ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस योजना के जरिये दो तरह से बचत होगी। पहला, पेट्रोलियम पदार्थों का आयात 20 फीसदी कम हो जाएगा। दूसरा, देश में उपलब्ध अतिरिक्त चीनी निर्यात करने के बजाय एथनॉल बनाने में काम आएगी और इससे चीनी निर्यात पर दी जाने वाली सब्सिडी भी बचेगी। इस तरह, दोनों वजहों से सालाना 55,000 करोड़ बचेंगे।
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फिलहाल देश में 10 फीसदी एथनॉल मिला पेट्रोल ही मिल रहा है। वह भी कुल पेट्रोल का 80 फीसदी। बाकी में कोई मिलावट नहीं हो रही है। देश में 700 किलोलीटर एथनॉल उपलब्ध है, जिसमें केवल 300 किलोलीटर ही पेट्रोल में मिलाई जा रही है। सरकार की योजना 2025 तक 1,500 किलोलीटर एथनॉल उपलब्ध कराने की है, जिसमें 1,000 किलोलीटर का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने के लिए किया जाएगा। सरकार ने 2021-22 के लिए एथनॉल की कीमतें 1.47 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दी है।
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उधर, निजी भागीदारी की संभावना वाले क्षेत्रों की पहचान करे ओएनजीसी : पेट्रोलियम सचिव ने कहा कि तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) को अधिक तेल-गैस भंडार खोजने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए निजी भागीदारी की संभावना वाले क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए। सरकार का मानना है कि कंपनी को और अधिक काम करना है। यह टिप्पणी पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से ओएनजीसी को भारत के प्रमुख तेल-गैस उत्पादन क्षेत्र मुंबई हाई एवं बेसिन में विदेशी कंपनियों को 60 फीसदी हिस्सेदारी देने के निर्देश के कुछ दिनों बाद आई है। 

पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने से राज्यों को 44,000 करोड़ की चपत
रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है कि पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में कटौती से राज्यों को चालू वित्त वर्ष में करीब 44,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसमें 35,000 करोड़ रुपये की चपत मूल्य-वर्धित कर (वैट) घटाने से लगेगी। हालांकि, 60,000 करोड़ रुपये के उच्च केंद्रीय कर हस्तांतरण से घाटे की भरपाई हो जाएगी।


लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने कई महीनों बाद चार नवंबर को पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में पांच रुपये की कटौती की, जबकि डीजल पर 10 रुपये घटा दिया। इसके बाद 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने भी पेट्रोल-डीजल पर वैट में कटौती की।

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