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मुंबई में 50 फीसदी नर्स और 33 फीसदी स्वास्थ्य कर्मियों के भरोसे चल रही कोरोना से जंग
Tue, 02 Jun 2020 07:57 AM IST
श्रीधर मिश्रा
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Tue, 02 Jun 2020 07:57 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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देश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई के अस्पतालों में मरीजों की हालत बेहद खराब है। बेड और ऑक्सीजन की कमी के साथ साथ इनकी देखभाल के लिए नर्सें और स्वास्थ्यकर्मियों की भी कमी है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अस्पतालों में महज 50 फीसदी नर्स और 33 फीसदी वार्डब्वाय के सहारे ही कोरोना से जंग लड़ी जा रही है।
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बीएमसी के बड़े अस्पताल किंग एडवर्ड मेडिकल कालेज (केईएम), नायर अस्पताल और लोकमान्य तिलक अस्पताल (सायन) में कोविड-19 के इलाज के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। लेकिन, केईएम अस्पातल से 250 नर्सें नदारद हैं। लेकिन केईएम प्रशासन ने इनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि नर्सों की गैरहाजिरी से अन्य कर्मचारियों पर भारी दबाव है। इनकी ड्यूटी छह घंटे से बढ़ाकर सात घंटे की गई और उसमें भी दो पालियों में काम करना पड़ रहा है। वहीं रात की पाली को 10 घंटे कर दिया गया है। इससे दिक्कतें और अधिक बढ़ गई हैं।
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मेयर किशोरी पेडणेकर ने कहा, दूसरे राज्यों से आकर डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी सेवा दे रहे हैं। लेकिन बीएमसी अस्पताल का परमानेंट स्टॉफ मनमानी कर रहा है। उन्होंने कर्मचारी यूनियन को चेतावनी दी है कि अस्पताल के कर्मचारियों की कामचोरी बर्दास्त नहीं की जाएगी।
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आईसीयू भी नहीं सुरक्षित
केईएम अस्पताल में आईसीयू भी मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं है। एक हृदयविदारक नई जानकारी सामने आई है कि केईएम अस्पताल के आईसीयू में कोविड-19 की महिला मरीज पानी मांगने के लिए बोतल हिला रही है, लेकिन उसे कोई पानी देने सामने नहीं आया। उसके परिजनों में से एक ने कोरोना वायरस के भय के बावजूद उसे पानी लाकर दिया। एक मरीज के परिजन बताते हैं कि आईसीयू से नर्स और वार्डब्वाय घंटों लापता रहते हैं। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा राम भरोसे है।
मुर्दाघर बंद होने की नौबत
केईएम अस्पताल का मुर्दाघर के सभी कर्मचारी पॉजिटिव आने के बाद इसे अब बंद करने की नौबत आ गई है। जबकि मुर्दाघर लाशों से भरा पड़ा है। 30 से 40 लाशें पास में बिखरी पड़ी रहती है। हालांकि केईएम अस्पताल के डीन हेमंत देशमुख ने कहा कि मुर्दाघर बंद नहीं होगा। कुछ स्वास्थ्य कर्मी जरूर कोरोना पॉजिटिव हैं। लेकिन अन्य कर्मचारी 24 घंटे मुर्दाघर में कार्यरत हैं।