अलीगढ़ के कस्तूरबा विद्यालयों में हर साल खर्च हो रहे 5.98 करोड़, छात्राओं को मिल रही केवल प्रताड़ना
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में छात्राओं के उत्पीड़न के मामले के खुलासे से वहां की हकीकत सामने आई है। ऐसा तब है जब कि जिले के 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में हर साल पांच करोड़ 98 लाख रुपये खर्च होते हैं। हर स्कूल को एक साल के लिए 46 लाख रुपये मिलते हैं।
इतने भारीभरकम बजट के बाद भी यहां पढ़ने वाली बच्चियां नौकरों की तरह काम करने और प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं। ये वाकई में बेहद गंभीर और अफसोसजनक स्थिति है, क्योंकि ये लड़कियां जिन घरों से आती हैं उनके मां-बाप इतने सक्षम नहीं है कि उनको पढ़ा लिखा सकें। ऐसे में गरीब परिवार की इन बच्चियों का प्रताड़ित करना अंदर तक झकझोर देता है।
यह है स्थिति
खैर, वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2018-19 में इन विद्यालयों में लगभग 1242 छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें तैनात कुल कर्मियों की संख्या 182 है। हर साल इन स्कूलों में 2 करोड़ 91 लाख 17 हजार 400 रुपये की केवल तनख्वाह बंटती है। यानी कुल बजट का लगभग आधा। एक कस्तूरबा गांधी विद्यालय में एक महीने में ही एक लाख 86 हजार 650 रुपये वेतन में बांटे जाते हैं।
इन स्कूलों में तनख्वाह के मामले में वार्डन सबसे ऊपर है। इसको हर महीने 27 हजार 500 रुपये मिलते हैं। इसके बाद पूर्ण कालिक शिक्षिका को 22 हजार रुपये, पार्ट टाइम शिक्षिका को 9800 रुपये देय हैं। लेखाकार को 11 हजार, मुख्य रसोइये को 6900, सहायक रसोइयों को 5175, चौकीदार को 5750 और चपरासी को 5750 रुपये महीने मिलते हैं।
शहरी क्षेत्र में संचालित कस्तूरबा गांधी में उर्दू की एक शिक्षिका अलग से कार्यरत है जिसको 13200 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। हरेक स्कूल में एक वार्डन, चार पूर्ण कालिक शिक्षिका, तीन पार्ट टाइम शिक्षिका, मुख्य को मिला कर तीन रसोइये, एक लेखाकार, एक चपरासी और एक चौकीदार सहित कुल 14 लोगों का पर्याप्त स्टाफ तैनात है।
शासन ने हर काम के लिए एक व्यक्ति तैनात किया है और उसको तनख्वाह भी दी जा रही है। बेहद शर्म की बात है कि इसके बावजूद बच्चियों से अमानवीय व्यवहार कर उनको प्रताड़ित किया जा रहा है।
छात्राओं पर इतना होता है खर्च
अब इन स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों पर होने वाले खर्च से भी रूबरू होते हैं। हर साल एक स्कूल में लगभग 23 लाख 84 हजार 200 रुपये लड़कियों पर खर्च होते हैं। जिसमें खाना, साफ सफाई का सामान, साबुन, तेल, मंजन, बिजली बिल, रसोई गैस सिलेंडर, किताबें, कॉपी, यूनिफार्म, बस्ता, जूते मोजे सहित अन्य खर्च शामिल है।
स्कूलों में खाने का मेन्यू, दूध और फल की व्यवस्था भी तय है। यानी एक लड़की पर एक साल में औसतन 23 हजार रुपये खर्च होते हैं जो महीने में लगभग 1986 रुपये बनते हैं। शासन से सब कुछ मिलने के बाद भी लड़कियों की देखरेख उस तरह से नहीं हो रही है जिस तरह से होनी चाहिए। बहरहाल, अब जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह की सख्त कार्रवाई के बाद एक बार फिर से उम्मीद जगी है कि इन स्कूलों में बच्चियों से दुर्व्यवहार नहीं होगा।
कुल 13 विद्यालय संचालित
जिले में 12 ब्लाक में 12 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय हैं। तेरहवां विद्यालय शहरी क्षेत्र में हैं, जो घुड़ियाबाग में हैं। नये बने 13वें ब्लाक गभाना में अभी ये विद्यालय नहीं है। 12 ब्लाक में अतरौली, बिजौली, गंगीरी, जवां, चंडौस, धनीपुर, लोधा, जट्टारी, खैर, टप्पल, इगलास, गोंडा शामिल हैं।