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DA/DR: इस फायदे से चूके 49 लाख केंद्रीय कर्मी व 67 लाख पेंशनर, डीए-डीआर मर्ज नहीं होने से होगा ये नफा-नुकसान

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 19 Mar 2025 02:17 PM IST
सार

महंगाई भत्ता/महंगाई राहत, केंद्र सरकार के कर्मचारियों/पेंशनभोगियों को जीवन-यापन की लागत को समायोजित करने और मुद्रास्फीति के कारण उनके मूल वेतन/पेंशन को वास्तविक मूल्य में होने वाले क्षरण से बचाने के लिए दिया जाता है।

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49 lakh central employees 67 lakh pensioners missed this benefit There will be loss if DA-DR is not merged
महंगाई भत्ता। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 केंद्र सरकार के 49 लाख से अधिक कर्मचारियों और 67 लाख से ज्यादा पेंशनरों के मूल वेतन/पेंशन में 50 फीसदी डीए/डीआर विलय नहीं होगा। राज्यसभा सदस्य जावेद अली खान ने मंगलवार को यह सवाल पूछा था कि क्या सरकार, आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट तैयार होने से पहले महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का मूल वेतन/पेंशन में विलय करेगी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस सवाल के जवाब में कहा था, डीए/डीआर का मूल वेतन/पेंशन में विलय नहीं होगा।
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महंगाई भत्ता/महंगाई राहत, केंद्र सरकार के कर्मचारियों/पेंशनभोगियों को जीवन-यापन की लागत को समायोजित करने और मुद्रास्फीति के कारण उनके मूल वेतन/पेंशन को वास्तविक मूल्य में होने वाले क्षरण से बचाने के लिए दिया जाता है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत श्रम ब्यूरो द्वारा जारी औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (एआईसीपीआई-आईडब्ल्य) के आधार पर डीए/डीआर की दर हर 6 महीने में समय-समय पर संशोधित की जाती है। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशों में कहा था कि जब डीए वृद्धि का ग्राफ 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाता है तो उसे कर्मियों की बेसिक सेलरी में मर्ज किया जाना चाहिए। 
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बता दें कि मौजूदा समय में केंद्र सरकार के कर्मियों और पेंशनरों को 53 फीसदी की दर से डीए/डीआर मिल रहा है। पहली जनवरी 2025 से डीए/डीआर में दो से तीन फीसदी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय कैबिनेट जल्द ही इस संबंध में घोषणा कर सकती है। 
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ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल बताते हैं, सातवें वेतन आयोग ने डीए/डीआर के पचास फीसदी होने पर उसे मूल वेतन/पेंशन में विलय करने की सिफारिश की थी। अब वित्त राज्य मंत्री ने संसद में बताया है कि ऐसे विलय का कोई प्रस्ताव नहीं है। डीए/डीआर के मूल वेतन/पेंशन में मर्ज नहीं होने की स्थिति में सरकारी कर्मियों को उनके कुल वेतनमान में एक से डेढ़ प्रतिशत का नुकसान हो सकता है। यदि यह डीए, बेसिक सेलरी में मर्ज हो जाता तो 18000 रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी को लगभग 270 रुपये का फायदा होता। 


अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईडीईएफ' के महासचिव एवं जेसीएम के सदस्य श्रीकुमार ने कहा था, जब कभी डीए वृद्धि का ग्राफ 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाता है तो उसे कर्मियों की बेसिक सेलरी में मर्ज किया जाता है। हालांकि इसमें भी सरकार, वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कार्य करती है। इससे वेतनमान में बढ़ोतरी के अलावा कई दूसरे भत्तों में भी इजाफा होता है। मौजूदा व्यवस्था में जब डीए 50 फीसदी से ज्यादा हो गया है तो उसे बेसिक सेलरी में मर्ज करने का नियम है। सातवां वेतन आयोग, डीए के पचास फीसदी होने पर उसे मूल वेतन में विलय करने की बात कहता है। 
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