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खुलासा : इस साल जम्मू-कश्मीर के 42 लोग थाम चुके हैं आतंकी संगठनों का हाथ

Tue, 08 May 2018 08:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 08 May 2018 08:59 AM IST
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42 men from the Kashmir Valley are said to have joined various terror groups this year

जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ स्थल पर आसपास के इलाकों से पत्थरबाजों के जुटने पर सुरक्षा एजेंसियां गंभीर हो गई हैं। एक बार फिर से पत्थरबाजों के व्हाट्सएप ग्रुप रडार पर आ गए हैं। इनपुट हैं कि घाटी में हिंसा भड़काने के लिए इन्हें फिर से सक्रिय किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच में जुट गई हैं। अप्रैल से लेकर अब तक मुठभेड़ स्थल पर हिंसक झड़पों में 16 पत्थरबाज मारे जा चुके हैं, जबकि 250 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है।

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वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार घाटी से अब तक 42 लोग विभिन्न आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। 45 दिनों के अंदर आधे लोग आतंकवादी रैंक में शामिल हुए। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि पिछले साल जहां नए-नए शामिल हुए आतंकियों को मारा जाता था वहीं इस साल उन लोगों को मारा गया है जो आतंकी संगठनों में लोगों की भर्तियां करते थे।
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एक अधिकारी ने बताया कि पिछले दो हफ्तों में साल 2011 से सक्रिय आतंकियों को ऑपरेशन में मार गिराया गया है। जम्मू और कश्मीर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि संख्या ज्यादा बड़ी नहीं है क्योंकि पिछले साल 147 युवा आतंकी बने थे। जितने लोगों की भर्ती की गई है उतने ही अनुपात में सुरक्षाबलों द्वारा ऑपरेशन में उन्हें मारा गया है।
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अप्रैल में भर्ती में तब कमी आई जब दक्षिण कश्मीर में हुए शोपियां और अनंतनाग ऑपरेशन में 13 आतंकियों को मार गिराया गया था। इन ऑपरेशन के दौरान तीन जवानों की मौत हो गई थी। अधिकारियों का कहना है कि 15 लोगों ने अप्रैल में जबकि तीन ने मई के पहले हफ्ते के दौरान आंतकी संगठन का हाथ थामा था। अधिकारियों का दावा है कि 6 मई तक 64 आंतकियों को विभिन्न ऑपरेशन के दौरान मारा गया है, जो एक दशक के दौरान काफी बड़ी संख्या है। 

8 जुलाई, 2016 को हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी की एनकाउंटर में मौत हो गई थी। इसके बाद स्थानीय कश्मीरी युवाओं द्वारा आंतकी संगठन में शामिल होने की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। रविवार को हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर सद्दाम पडार को चार लोगों के साथ शोपियां में मार गिराया गया था। वह बुरहान वानी द्वारा आतंकियों की ग्रुप तस्वीर में 11वें नंबर का आंतकी था।

पुलिस का कहना है कि शोपियां का रहने वाला पडार सितंबर 2014 से सक्रिय था। शोपियां का बिलाल अहमद मोहांद अक्टूबर 2016 से सक्रिय था। वहीं शोपियां का ही आदिल अहमद मलिक अगस्त 2014 से जबकि  रामपुरा का तौसीफ अहमद शेख 2013 से घाटी में सक्रिय था। इनके अलावा कश्मीर यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर मोहम्मद रफी भट्ट केवल दो दिन पहले ही आतंकी संगठन से जुड़ा था।


वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने दावा किया कि युवाओं द्वारा आतंकी संगठन का हिस्सा बनने का ट्रेंड गलत है। इससे वह विभिन्न ऑपरेशन में मारे गए आतंकियों की जगह भरने का काम करते हैं। बुरहान वानी की मौत के दो-तीन महीनों के अंदर 25 लोग आतंकी बने थे जोकि अब तक की किसी महीने में शामिल हुए आतंकियों की संख्या में सबसे ज्यादा है।

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