निजीकरण का विरोध: सेना को 'टैंक, गोला-बारूद व पैराशूट' की सप्लाई हो सकती है बाधित, आयुध कारखानों में हड़ताल
देश के 41 आयुध कारखानों में 19 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल हो रही है। एआईडीईएफ, आईएनडीडब्लूएफ और बीपीएमएस संगठनों ने हड़ताल का एलान किया है...
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भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद, टैंक, हल्के हथियार व पैराशूट की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा सैन्य अस्पतालों के काम आने वाले उपकरण और हैवी गन का विनिर्माण बंद होने की संभावना है। वजह, देश के 41 आयुध कारखानों में 19 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल हो रही है। एआईडीईएफ, आईएनडीडब्लूएफ और बीपीएमएस संगठनों ने हड़ताल का एलान किया है। बीपीएमएस के महासचिव मुकेश सिंह ने बताया, सभी कर्मचारी संगठन 220 साल पुराने 41 आयुध कारखानों को सात कंपनियों में विभाजित करने के खिलाफ हैं। केंद्र सरकार ने ऐसा कर इन कारखानों का निजीकरण करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अभी इन कारखानों को निगमों में तब्दील किया गया है। कुछ समय बाद यह कह कर इन्हें प्राइवेट हाथों में सौंप दिया जाएगा कि ये आयुध कारखाने तो घाटे में चल रहे हैं।
बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट की 16 जून को हुई बैठक में सभी 41 आयुध कारखानों को सात कंपनियों में विभाजित कर दिया गया था। ये वही कारखाने हैं, जिन्होंने भारतीय सेना को पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध, बांग्लादेश लिब्रेशन वॉर, करगिल जंग, और लद्दाख जैसी झड़पों में साजो-सामान सप्लाई किया था। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी. श्रीकुमार और बीपीएमएस के महासचिव मुकेश सिंह का कहना है, कोरोना की पहली लहर के दौरान मई 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अब डिफेंस सेक्टर में बड़े परिवर्तन होंगे। उनके इस बयान के बाद कर्मचारी संगठन समझ गए थे कि सरकार देर-सवेर इन कारखानों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। सरकार द्वारा सभी 41 आयुध कारखानों को एक या उससे ज्यादा निगमों में तब्दील कर दिया जाएगा।
बतौर मुकेश सिंह, ये सामान्य कारखाने नहीं हैं। सेना के साजो-सामान की जरूरत कभी ज्यादा हो सकती है तो कभी कम। कभी किसी खास उपकरण की क्षमता बढ़ानी पड़ सकती है। जैसे किसी टैंक का वजन जो दशकों पहले ठीक माना जाता था, आज उसे घटाना पड़ रहा है। सामने दुश्मन के पास कैसे टैंक हैं, मैदानी इलाका है या पहाड़ी, मौसम कैसा है आदि बातें क्षमता तय करती हैं। ये त्वरित बदलाव सरकारी संस्थान में ही संभव हैं। सुरक्षा की दृष्टि से इन बदलावों को प्राइवेट कंपनी या निगम के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। आज सरकार ने आयुध कारखानों को निगम बना दिया है, लेकिन कल इन्हें बंद भी कर सकती है। सरकार के लिए यह कहना बहुत आसान है कि ये निगम तो घाटे में चल रहे हैं, इसलिए इन्हें बेचना पड़ रहा है।
बीपीएमएस के महासचिव के अनुसार, किसी सेक्टर में एक ही कॉरपोरेशन हो सकता है, लेकिन डिफेंस में नौ निगम तो पहले से ही हैं। अब सात नए निगम बना दिए गए हैं। इस तरह से डिफेंस में 16 निगम हो गए हैं। सरकारी पॉलिसी के तहत इनकी संख्या चार होनी चाहिए। यानी बाकी निगमों पर तलवार लटकती रहेगी। सरकार इस मामले में झूठ बोल रही है। गुमराह करने वाली बातें कर रही है। सरकार यह भरोसा दे रही है कि इन निगमों को कंपनी एक्ट में सौ फीसदी लिस्ट कराएंगे। ये सरकार का सफेद झूठ है। पिछले साल ही कर्मियों ने सरकार के समक्ष अपना विरोध दर्ज करा दिया था। इन कारखानों को निगम न बनाने की एवज में डिफेंस सेक्रेटरी को कई तरह के प्रपोजल दिए गए थे, लेकिन सरकार को कोई रास नहीं आया। वजह, केंद्र सरकार इन कारखानों को निजी हाथों में देने का मन बना चुकी है।
सरकार ने इस मामले में केपीएमजी को सलाहकार नियुक्त कर लिया। वहां से जैसी सलाह मिली, उसे सब जानते हैं। इन कारखानों के पास दो लाख करोड़ रुपये की जमीन है। सरकार के सलाहकार ने 62 हजार एकड़ जमीन का दाम 72 हजार करोड़ रुपये लगाया था। केंद्र की मंशा है कि इन कारखानों की जमीन को उद्योगपतियों के हवाले कर दिया जाए। 19 जुलाई से होने वाली हड़ताल में 75 हजार कर्मचारी शामिल हैं। कारखानों के अलावा ट्रेनिंग सेंटर, अस्पताल और स्कूल भी इस हड़ताल में शामिल होंगे। पैराशूट इकाई, जिसकी सबसे ज्यादा मांग है, वह भी बंद हो जाएगी। चेन्नई के अवाडी में स्थित हेवी व्हीकल फैक्ट्री (एचवीएफ) और आयुध निर्माणी मेदक में टैंक निर्माण यूनिट भी बंद होगी। इसका असर रक्षा क्षेत्र पर पड़ सकता है।