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अमरनाथ यात्रा मार्ग की 40000 जवान करेंगे सुरक्षा, श्रद्धालुओं को दी जाएगी बारकोड पर्ची
Thu, 30 May 2019 04:14 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 30 May 2019 04:14 AM IST
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अमरनाथ यात्रा (फाइल फोटो)
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जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए इस बार सुरक्षा व्यवस्था बहुत ही पुख्ता की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कार्ड बारकोड (क्विक रिएक्शन कोड) के साथ दिया जा रहा है। साथ ही केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से 15 अगस्त तक 46 दिन तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान बाबा बर्फानी की गुफा तक जाने वाले पहलगाम और बालटाल मार्ग की सुरक्षा के लिए 40000 केंद्रीय पैरामिलिटरी और राज्य पुलिस के जवानों को तैनात करने का फैसला किया है।
सीआरपीएफ के महानिदेशक आरआर भटनागर ने बुधवार को बताया कि हम इस बार एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं। इसके तहत अमरनाथ श्रद्धालुओं को बारकोड यात्रा पर्ची उपलब्ध कराई जाएगी। यह पर्ची हमें अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ रहे श्रद्धालुओं की वास्तविक संख्या जानने में मदद करेगी। साथ ही किसी यात्रा के लापता या दुर्घटना का शिकार होने या मौसम खराब होने पर कहीं फंस जाने पर उसके बारे में पूरी जानकारी देने में भी मदद करेगी।
साथ ही यात्रा के संचालन में शामिल सुरक्षा एजेंसियां इस कार्ड को स्कैन कर श्रद्धालु का विवरण अपने पास रख सकेंगी जिससे सुरक्षा मुहैया कराने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि पर्चियों में श्रद्धालुओं की जानकारी, फोटो और फोन नंबर भी होंगे।
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उन्होंने बताया कि आतंकी हमलों के खतरे को देखते हुए सीआरपीएफ अपग्रेड इलेक्ट्रोमैगनेटिक चिप्स या रेडियो फ्रेक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन टैग लगे वाहनों की संख्या बढ़ाएगी। ये वाहन श्रद्धालुओं को लाने ले जाने और अन्य कामों में इस्तेमाल किए जाएंगे। अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था 27 जून को रवाना होगा और 1 जुलाई को अमरनाथ गुफा पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन करेंगे। अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल मार्ग से जाते हैं। 15 अगस्त रक्षा बंधन के दिन यात्रा संपन्न होगी।
भटनागर ने बताया कि लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी केंद्रीय सुरक्षा बलों की 300 कंपनियों को अभी भी कश्मीर घाटी में रोके रखा गया है। जरूरत पड़ने पर इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है। वर्ष 2017 में आतंकवादियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की एक बस पर हमला किया था। इसमें आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हो गए थे। पिछले साल यात्रा शांतिपूर्वक संपन्न हुई थी।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार को अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत की। राज्यपाल श्रीअमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अध्यक्ष हैं। एसएएसबी अमरनाथ की वार्षिक तीर्थयात्रा का प्रबंधन करता है। श्राइन बोर्ड ने एक बयान में कहा कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा रोजना 500 तीर्थयात्रियों के लिए होगी। यह दोनों मार्गों पहलगाम से 250 और बालटाल से 250 यात्रियों के लिए होगी।
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सीआरपीएफ के महानिदेशक आरआर भटनागर ने बुधवार को बताया कि हम इस बार एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं। इसके तहत अमरनाथ श्रद्धालुओं को बारकोड यात्रा पर्ची उपलब्ध कराई जाएगी। यह पर्ची हमें अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ रहे श्रद्धालुओं की वास्तविक संख्या जानने में मदद करेगी। साथ ही किसी यात्रा के लापता या दुर्घटना का शिकार होने या मौसम खराब होने पर कहीं फंस जाने पर उसके बारे में पूरी जानकारी देने में भी मदद करेगी।
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साथ ही यात्रा के संचालन में शामिल सुरक्षा एजेंसियां इस कार्ड को स्कैन कर श्रद्धालु का विवरण अपने पास रख सकेंगी जिससे सुरक्षा मुहैया कराने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि पर्चियों में श्रद्धालुओं की जानकारी, फोटो और फोन नंबर भी होंगे।
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उन्होंने बताया कि आतंकी हमलों के खतरे को देखते हुए सीआरपीएफ अपग्रेड इलेक्ट्रोमैगनेटिक चिप्स या रेडियो फ्रेक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन टैग लगे वाहनों की संख्या बढ़ाएगी। ये वाहन श्रद्धालुओं को लाने ले जाने और अन्य कामों में इस्तेमाल किए जाएंगे। अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था 27 जून को रवाना होगा और 1 जुलाई को अमरनाथ गुफा पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन करेंगे। अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल मार्ग से जाते हैं। 15 अगस्त रक्षा बंधन के दिन यात्रा संपन्न होगी।
भटनागर ने बताया कि लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी केंद्रीय सुरक्षा बलों की 300 कंपनियों को अभी भी कश्मीर घाटी में रोके रखा गया है। जरूरत पड़ने पर इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है। वर्ष 2017 में आतंकवादियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की एक बस पर हमला किया था। इसमें आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हो गए थे। पिछले साल यात्रा शांतिपूर्वक संपन्न हुई थी।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार को अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत की। राज्यपाल श्रीअमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अध्यक्ष हैं। एसएएसबी अमरनाथ की वार्षिक तीर्थयात्रा का प्रबंधन करता है। श्राइन बोर्ड ने एक बयान में कहा कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा रोजना 500 तीर्थयात्रियों के लिए होगी। यह दोनों मार्गों पहलगाम से 250 और बालटाल से 250 यात्रियों के लिए होगी।