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40 साल पहले नेहरू जी से मिला था पुरस्कार और मोदी सरकार में मंत्री हूं: रतन लाल कटारिया

Fri, 05 Feb 2021 11:09 PM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली।
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 05 Feb 2021 11:09 PM IST
सार

  • बोले- पिता जी ने अटल जी के लिए दो जूतियां डिजाइन की थीं
  • शू-मेकर थे पिता जी, आरएसएस दफ्तर के नीचे बेचते थे जूते
  • कटारिया ने कहा- दलित होने का मैं भी लाभार्थी हूं

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40 years ago I got the award from Nehru ji and I am a minister in Modi government, Says Ratan Lal Kataria
रतन लाल कटारिया - फोटो : Twitter -: @katariabjp

विस्तार

रतन लाल कटारिया हरियाणा से आते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में वह जल शक्ति मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मामलों के राज्यमंत्री हैं। लेकिन अमर उजाला से बातचीत में रतन लाल कटारिया कहते हैं कि वह तो 40 साल पहले देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से पुरस्कार पा चुके हैं। उन्हें 1963 में अपने कमरे में गाने पर पंडित नेहरू ने पुरस्कार दिया था। 1967 में अटल बिहारी वाजपेयी को भी बालगीत सुनाए थे। रतन लाल कटारिया ने बताया कि उनके पिता ने अटल जी के लिए दो बार जूतियां डिजाइन कीं और उन्हें पहनाया था। कटारिया ने कहा कि वह दलित हैं और उन्हें गरीब दलित होने का लाभ भी मिला, वह प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट में दो मंत्रालयों में राज्यमंत्री हैं। क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी दलितों, गरीबों के प्रति खास संवेदना रखते हैं।

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पेट भरने वाला चावल, गेहूं अब बना मुसीबत, बदले पैटर्न तो ठीक
सामाजिक अधिकारिता एवं जल शक्ति राज्यमंत्री कहते हैं कभी देश में खाने के अनाज की कमी थी। तब ब्रिटेन जैसे देश में लोग भारत को भूखा देश जैसी नजरों से देखते थे। बाद में हरित क्रांति आई। हरियाणा, पंजाब समेत अन्य क्षेत्र के किसानों ने चावल, गेहूं उगाकर देश के लोगों का पेट भरा। आज उसी चावल, गेहूं की कीमतों (एमएसपी के मामले) ने मुसीबत खड़ी कर दी है। वह कहते हैं कि समय के साथ किसानों को भी इसे समझना चाहिए। खेती का पैटर्न बदलना चाहिए।
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तब दलित कहां जुड़ते थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में
कटारिया का कहना है कि उनके पिता जी जहां चौराहे पर जूती बनाकर बेचने जाते थे, उसके ऊपर संघ का दफ्तर था। बात आजादी के पहले की है। तब कोई दलित कहां हिन्दूवादी पार्टी में शामिल होता था। लेकिन उनके अनपढ़ पिता ने 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ज्वाइन कर लिया था। बस्ती के 50 प्रतिशत लड़कों को भी संघ से जोड़ने में सफल रहे। कटारिया बताते हैं कि जब वह पढ़-लिखकर बड़े हुए तो उन्हें भी लगा कि आरएसएस क्यों जावाइन करें? बताते हैं इसके बाद उन्होंने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के बारे में पढ़ा तो उनका विचार बदल गया। वह भी आरएसएस में शामिल हो गए। इस तरह से उनके दादा के जमाने से बच्चों के दौर तक की पांच पीढ़ियां आरएसएस से जुड़ी हैं।
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मुझे भी दलित होने का लाभ मिला, प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल में जगह दी
कटारिया कहते हैं कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा ने काफी कुछ दिया। वह हरियाणा में भाजपा के अध्यक्ष भी रहे और प्रधानमंत्री मोदी ने उन्होंने अपने कैबिनेट में स्थान दिया है। रतनलाल के मुताबिक उनकी बातों का प्रधानमंत्री बुरा नहीं मानते। वहीं इकलौते मंत्री और सांसद हैं जो प्रधानमंत्री को मीटिंग से लेकर संसद तक हंसा देते हैं। कटारिया के मुताबिक प्रधानमंत्री के भीतर गरीबों को लेकर एक तड़प रहती है। इसी का लाभ रतनलाल कटारिया को भी मिला है।

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