खिलवाड़: रेमडेसिविर की शीशी में पैरासिटामोल बेच रहे चार गिरफ्तार, आरटी-पीसीआर रिपोर्ट में भी फर्जीवाड़ा
महाराष्ट्र के पुणे और बारामती में फर्जी रेमडेसिविर और फर्जी आरटी-पीसीआर की रिपोर्ट कराने का मामला सामने आया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच में जुट गई है।
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देश में कोरोना के हालात बद से बदतर हो रहे हैं। रोजाना लाखों मामले सामने आने के बीच कई ऐसी खबरें सामने आ रही हैं, जो स्वास्थ्य महकमे की चिंताएं और बढ़ा रही हैं। कई राज्यों से कोरोना की दवा रेमडेसिविर के खत्म होने और कालाबाजारी की खबरें सामने आईं, जिसके बाद सरकार ने सख्ती दिखाकर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का एलान किया।
हाल ही में महाराष्ट्र के बारामती से पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन चारों लोगों पर फर्जी रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने का आरोप है। ये लोग रेमडेसिविर की खाली शीशी में पैरासिटामोल की दवाई भरकर कोरोना मरीजों को बेच रहे थे।
ऐसा बताया जा रहा है कि ये गिरोह नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन को 35,000 रुपये में बेच रहा था। पुणे ग्रामीण के डिप्टी एसपी नारायण शिवगावकर ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से तीन इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। इन इंजेक्शन पर रेमडेसिविर लिखा था लेकिन इनके अंदर लिक्विड फॉर्म में पैरासिटामोल ही थी।
Maharashtra | 4 people arrested for selling fake Remdesivir injections in Baramati.
— ANI (@ANI) April 18, 2021
3 injections were recovered from their possession. The injections, labelled as Remdesivir, were filled with paracetamol in liquid form: Narayan Shirgaonkar, Deputy SP, Pune rural (17.04) pic.twitter.com/IZN47KjolW
दरअसल, इस गिरोह का पर्दाफाश ऐसे हुआ, बारामती में एक मरीज के रिश्तेदार को रेमडेसिविर इंजेक्शन की तत्काल जरूरत थी, उसे पता चला कि एक निजी अस्पताल में ये दवा मिल रही है। शख्स ने गैंग के एक सदस्य से संपर्क किया, आरोपी ने बताया कि वह एक कोविड केंद्र में काम करता है। जब मरीज के रिश्तेदार ने इंजेक्शन की कीमत पूछी तो उसने एक इंजेक्शन की कीमत 35 हजार रुपये बताई।
इसके अलावा पुणे से कोरोना रिपोर्ट के घपलेबाजी की भी खबरें सामने आई हैं। महाराष्ट्र के पुणे में दो लोगों को फर्जी आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट जारी करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। राज्य में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और रिपोर्ट में देरी आने की वजह से आरोपी ने कई लोगों की फर्जी रिपोर्ट जारी की हैं। पुलिस ने जानकारी दी कि इस मामले में आगे की जांच की जा रही है।