लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास, समर्थन में 366, विरोध में 66 वोट पड़े
- महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, सज्जाद लोन और इमरान अंसारी गिरफ्तार।
- जम्मू में सेना की छह टुकड़िया तैनात, एक लाख जवानों के हवाले सुरक्षा।
- जम्मू-कश्मीर में अघोषित कर्फ्यू, लैंडलाइन-ब्रॉडबैंड भी ठप।
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विस्तार
गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन कर जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने और अनुच्छेद 370 की अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के प्रस्ताव संबंधी संकल्प चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। इसपर तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने नियमों का उल्लंघन करते हुए रातोंरात एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। सत्तापक्ष और विपक्ष के तमाम सांसदों ने इस संकल्प पर अपने विचार रखे। लोकसभा में लंबी बहस के बाद आखिर लोकसभा में भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास कर दिया गया। गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद इस पर वोटिंग हुई। इसके समर्थन में 366 वोट और विरोध में 66 वोट पड़े।
Resolution revoking Article 370 from Jammu & Kashmir passed in Lok Sabha pic.twitter.com/BhDpDJV0Bs
— ANI (@ANI) August 6, 2019विज्ञापन
LIVE UPDATE
अमित शाह: जम्मू कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र में कौन ले गया। पंडित जवाहरलाल नेहरू ले गए थे। इतिहास तय करेगा कि अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला सही है या नहीं। लेकिन जब भी इसका जिक्र होगा तो पीएम नरेंद्र मोदी को याद किया जाएगा।Amit Shah in Lok Sabha: Who took Kashmir to the United Nations, it was Pandit Jawaharlal Nehru. History will decide if this decision (to revoke 370) is right or not, but whenever it will be discussed, PM Narendra Modi will be remembered by the people pic.twitter.com/MZGbkK9NqB
— ANI (@ANI) August 6, 2019
अमित शाह ने क्या-क्या कहा
- पंडित नेहरू ने सेना को पूरी छूट दी होती तो पीओके भारत का हिस्सा होता।
- पूर्वोत्तर, महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत कुछ राज्यों के सदस्यों को मैं आश्वस्त करता हूं कि नरेंद्र मोदी सरकार की अनुच्छेद 371 को हटाने की कोई आकांक्षा नहीं।
- हम हुर्रियत के साथ चर्चा नहीं करना चाहते, अगर घाटी के लोगों में आशंका है तो जरूर उनसे चर्चा करेंगे, उन्हें गले लगाएंगे।
- परिस्थिति सामान्य होते ही जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में इस सरकार को कोई समस्या नहीं।
- अनुच्छेद 370 से अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय।
- हम कोई ब्लंडर नहीं करेंगे। रायशुमारी की बात 1965 में ही खत्म हो गई।
- उचित समय आने में 70 साल लग गए। 70 साल में एक ही लाइन पर चले, क्या हासिल हुआ
- पाकिस्तान ने अलगाववाद को हवा दी।
- हम ऐतिहासिक भूल नहीं करने जा रहे हैं, सुधारने जा रहे हैं।
लद्दाख के भाजपा सांसद का तंज भरा बयान
लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल: मैं करगिल से चुनकर आता हूं। मैं गर्व के साथ कहता हूं कि यहां की जनता ने केंद्रशासित प्रदेश के लिए वोट दिया था। क्या ये लोग (विपक्ष) करगिल को जानते हैं। हजारों लोगों की आवाज दबाना, ये आपका लोकतंत्र था क्या। मैं कल से चर्चा सुन रहा था। 370 गया तो जम्मू-कश्मीर में समानता नहीं रहेगी। आप लद्दाख का फंड भी लेकर जाते हो। वहां का पूरा फंड गायब कर देते हो। क्या ये आपकी इक्वालिटी है। जम्मू-कश्मीर वाले लड़ झगड़कर अपना हिस्सा ले लेते हैं, लेकिन लद्दाख वालों को कुछ नहीं मिलता। लद्दाख में एक भी उच्च शिक्षण संस्थान नहीं दिया। हाल ही में एक यूनिवर्सिटी नरेंद्र मोदी जी ने दिया। मोदी है तो मुमकिन है। 2008 में आपने जम्मू और कश्मीर में 4-4 जिले दिए, लद्दाख को एक भी नहीं दिया, क्या ये आपकी इक्वालिटी है। जम्मू कश्मीर में आपने बुद्धिस्ट परिवारों को खत्म करने का प्रयास किया, क्या ये आपका सेक्युलरिज्म है।
Jamyang Tsering, BJP MP from Ladakh in Lok Sabha on #Article370Revoked: What will be lost with this decision? Sirf do pariwar rozi-roti khoyenge aur Kashmir ka bhavishya ujjwal hone wala hai. pic.twitter.com/Jb4AMLQnOa
— ANI (@ANI) August 6, 2019
क्या कश्मीर की जनता फैसले से खुश है?
लोकसभा में सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि सुप्रिया जी के पड़ोसी भी उनके बगल में नहीं और मेरे पड़ोसी भी नहीं हैं। अखिलेश ने कहा कि मंत्री कह रहे थे कि संविधान सभा से पारित कर यह प्रस्ताव लाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश के लिए यह फैसला लिया गया है वहां की जनता का क्या मत है यह तो जान लेना चाहिए, वहां के लोग इस फैसले से खुश हैं या नहीं। फैसले को संविधान सभा से पारित करने के अखिलेश के बयान पर शाह ने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा है आपने गलत समझा। अमित शाह ने कहा कि संविधान सभा मतलब जम्मू कश्मीर की विधानसभा की ओर से राष्ट्रपति यह प्रस्ताव लेकर आए हैं।
नेहरू के कारण मिला 370 का कलंक
विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद किशोर शर्मा ने कहा कि नेहरू के कारण इस धारा का कलंक हमारे ऊपर लगा है। सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तब भी इसका विरोध किया था। इस धारा ने कश्मीर को भारत से दूर करने का कार्य किया है। इसके कारण वहां भ्रष्टाचार बढ़ता चला गया क्योंकि केंद्र की एजेंसियां वहां जांच नहीं कर सकती है। मोदी सरकार से दिया गया गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण भी वहां लागू नहीं होता है। आतंकवाद भी अनुच्छेद 370 की ही देन है। इसके कारण हमारे जवानों और लोगों को जान गंवानी पड़ती है।
हमें इसकी भनक तक नहीं थी
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने लोकसभा में अनुच्छेद 370 पर चर्चा के दौरान कहा, 'इस सदन के सदस्य मिस्टर फारूक अब्दुल्ला अनुपस्थित हैं। उन्हें गिरफ्तार किया गया है। हमें इसकी भनक नहीं थी। आपको एक अध्यक्ष के रूप में सदस्यों की सुरक्षा करनी चाहिए। आपको तटस्थ होना चाहिए।'
देश में किस तरह की मिसाल कायम कर रहे हैं
तिवारी ने कहा, 'पंडित नेहरू ने कदम उठाकर उसे भारत का अभिन्न अंग बनाया। उस विलय में कुछ वादे किए गए थे। 1952 में भारत के संविधान में धारा 370 को शामिल किया गया। भारतीय संविधान में केवल अनुच्छेद 370 ही नहीं है। इसमें अनुच्छेद 371 ए से आई भी है। यह नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम आदि को विशेष अधिकार प्रदान करते हैं। आज जब आप अनुच्छेद 370 को समाप्त कर रहे हैं, तो आप इन राज्यों को क्या संदेश भेज रहे हैं? आप कल अनुच्छेद 371 को निरस्त कर सकते हैं? उत्तर पूर्वी राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करके और संसद में उनकी विधानसभाओं के अधिकारों का उपयोग करके, आप अनुच्छेद 371 को भी रद्द कर सकते हैं? आप देश में किस तरह की संवैधानिक मिसाल कायम कर रहे हैं? यदि आज जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा हैं तो उसकी वजह पंडित नेहरू हैं।'
कांग्रेस ने बताया इतिहास
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि आजादी के बाद दो मुल्क बने और एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। इसके बाद 562 रियासतें बनीं जिन्हें कहीं भी जाने की आजादी थी। तीन रियासतों को लेकर संवेदनशील स्थिति बनी जिसमें जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ शामिल था। महात्मा गांधी ने जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह से कश्मीर का भारत में विलय करने की अपील की थी लेकिन राजा असमंजस में थे। पाकिस्तान ने जब कश्मीर पर हमला कर दिया और वह श्रीनगर की तरफ बढ़ने लगे तो राजा के पास पाकिस्तान में विलय करने या भारत के साथ जाने का विकल्प था। राजा ने पाकिस्तानी घुसपैठियों का सामना किया और भारत से मदद मांगी। इसके बाद राजा ने नेहरू की अगुवाई में भारत से संधि पर हस्ताक्षर किए और फौज को कश्मीर बचाने के लिए भेजा गया।
दुनिया देख रही है, शांति से करें चर्चा
गृहमंत्री ने पुनर्गठन बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि हम जम्मू-कश्मीर के लिए दो केंद्र शासित प्रदेश लेकर आ रहे हैं जिसमें लद्दाख और जम्मू कश्मीर होंगे। जम्मू-कश्मीर मे विधानसभा होगी और वहां चुना हुआ मुख्यमंत्री काम करेगा। मैं हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं आप इसपर चर्चा कीजिए। हम शांत माहौल में चर्चा चाहते हैं क्योंकि घाटी सहित देश और दुनिया हमें देश रही है।
विपक्ष जो पूछेगा उसका जवाब देंगे
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष जो पूछेगा उसका हम जवाब देंगे लेकिन मुझे अपनी बात रखने दीजिए। धारा 373 (3) का प्रयोग करके राष्ट्रपति इसे सीज कर सकते हैं लेकिन राष्ट्रपति तभी ये अधिसूचना निकाल सकते हैं जब जम्मू-कश्मीर संविधान सभा की अनुशंसा हो। कांग्रेस इस प्रावधान का उपयोग 1952 और 1955 में कर चुकी है। महाराजा के लिए पहले सदर-ए-रियासत और फिर 1965 में इसे गवर्नर किया गया। जम्मू कश्मीर में विधानसभा नहीं चल रही है और ऐसे में इसी संसद में जम्मू-कश्मीर के सारे अधिकार निहित हैं।
स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा आज का दिन
गृह मंत्री ने कहा कि आज सदन जिसपर विचार कर रहा है वह प्रस्ताव और विधेयक भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। राष्ट्रपति ने कल एख संवैधानिक आदेश जारी किया है जिसके तहत भारत के संविधान के सारे अनुबंध जम्मू-कश्मीर में लागू होंगे। साथ ही कश्मीर को मिलने वाले विशेष अधिकार भी नहीं रहेंगे और मैं पुनर्गठन बिल लेकर आया हूं। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसपर कोई कानूनी या संवैधानिक विवाद नहीं है। जम्मू कश्मीर के अनुच्छेद 370 (सी) में इस बात का जिक्र है। संसद कश्मीर पर कानून बनाने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। हम राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संकल्प लेकर आए हैं।
जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा
कांग्रेस को जवाब देते हुए शाह ने कहा, 'जम्मू और कश्मीर भारतीय संघ का अभिन्न हिस्सा है। कश्मीर की सीमा में पीओके भी आता है। जान दे देंगे इसके लिए। मैंने सदन में जब जब जम्मू और कश्मीर राज्य बोला है तब-तब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अकसाई चीन दोनों इसका हिस्सा हैं। ये बात है। संसद को जम्मू-कश्मीर पर कानून बनाने का अधिकार है। कोई हमें कानून बनाने से नहीं रोक सकता। दोनों हिल काउंसिल अस्तित्व में रहेगें। हिल काउंसिल के सदस्यों को मंत्री का दर्जा मिलेगा।'
चौधरी ने पूछा कश्मीर आतंरिक या द्वीपक्षीय मामला
चौधरी ने कहा, 'आपने कहा यह आंतरिक मामला है। लेकिन इसकी निगरानी यूएन द्वारा 1948 से की जा रही है। क्या यह आंतरिक मामला है?हमने शिमला समझौते और लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए। यह आंतरिक मामला या द्विपक्षीय क्या है? एस जयशंकर ने कुछ दिनों पहले माइक पॉम्पियो से कहा था कि कश्मीर द्वीपक्षीय मामला है। इसलिए इसमें हस्तक्षेप न करें। क्या जम्मू-कश्मीर अब भी आंतरिक मसला है? हम जानना चाहते हैं। पूरी कांग्रेस पार्टी आपके द्वारा प्रबुद्ध होना चाहती है।'
अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया बिल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द करने का लोकसभा में संकल्प पेश किया। जिसपर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि आप पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) के बारे में सोच रहे हैं, आपने सभी नियमों का उल्लंघन किया और एक राज्य को रातोंरात केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया।'
संसद भवन में पीएम कोर ग्रुप की बैठक
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद भवन में प्रधानमंत्री कोर ग्रुप की बैठक हो रही है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, नितिन गडकरी समेत कई मंत्री मौजूद रहे। माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर के ताजा हालात पर चर्चा हुई। यह बैठक अब खत्म हो चुकी है।
कश्मीर पहुंचे डोभाल
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य के हालातों का जायजा लेने के लिए सोमवार रात को ही कश्मीर पहुंच चुके हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद यहां किसी तरह का कोई प्रदर्शन न हो और दिक्कतें न आए इसके लिए सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। नए कानून के तहत अब दिल्ली की तरह जम्मू-कश्मीर की पुलिस केंद्र सरकार के अंतर्गत काम करेगी। घाटी में काफी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं जिन्हें अगले आदेश तक वहीं रहने का आदेश दिया गया है।
कश्मीर के हालात
धारा 370 के हटने के बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और नेशनल कॉफ्रेंस विधेयक का विरोध कर रही है। यही वजह है कि उन्हें फिलहाल हिरासत में रखा गया है। उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती को सोमवार देर रात को हिरासत में लेकर गेस्ट हाउस में रखा गया है। घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा चाक-चौबंद कर दी गई है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।