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10 साल पुराने 2G घोटाले में कब क्या हुआ, जानिए बड़ी बातें
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Thu, 21 Dec 2017 11:58 AM IST
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2G स्कैम
यूपीए-2 कार्यकाल में हुए 2जी घोटाले पर गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में फैसला सुनाया गया और सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से भारत सरकार के खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट का गठन किया था।
घोटाले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी का नाम भी शामिल था। इनके अलावा कई कंपनियां और कई कारोबारी भी इसमे आरोपी बनाए गए थे। सीबीआई ने अप्रैल 2011 में इस पूरे मामले में अदालत में करीब 80000 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी इस चार्जशीट में 125 गवाहों और 654 दस्तावेजों का जिक्र किया गया था।
पढ़ें: LIVE: 2जी घोटाले में ए राजा-कनिमोझी को बड़ी राहत, कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी किया
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2010 में सबसे पहले टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले की बात सामने आयी थी। यह मामले का खुलासा सरकार की एजेंसी सीएजी रिपोर्ट में हुआ था। सीएजी रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस दौरान राजा दूरसंचार मंत्री थे, उस दौरान जो टूजी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया गया था, उससे देश को 1 लाख 76 हजार करोड़ का नुकसान हुआ। टूजी घोटाले से जुड़े तीन मामलों में अदालत को अपना फैसला सुनाना है, इसमें दो सीबीआई और एक केस प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज किया था।
टूजी स्पेक्ट्रम मामले में क्या और कब हुआ देखिए 1 नजर में-
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घोटाले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी का नाम भी शामिल था। इनके अलावा कई कंपनियां और कई कारोबारी भी इसमे आरोपी बनाए गए थे। सीबीआई ने अप्रैल 2011 में इस पूरे मामले में अदालत में करीब 80000 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी इस चार्जशीट में 125 गवाहों और 654 दस्तावेजों का जिक्र किया गया था।
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पढ़ें: LIVE: 2जी घोटाले में ए राजा-कनिमोझी को बड़ी राहत, कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी किया
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2010 में सबसे पहले टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले की बात सामने आयी थी। यह मामले का खुलासा सरकार की एजेंसी सीएजी रिपोर्ट में हुआ था। सीएजी रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस दौरान राजा दूरसंचार मंत्री थे, उस दौरान जो टूजी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया गया था, उससे देश को 1 लाख 76 हजार करोड़ का नुकसान हुआ। टूजी घोटाले से जुड़े तीन मामलों में अदालत को अपना फैसला सुनाना है, इसमें दो सीबीआई और एक केस प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज किया था।
टूजी स्पेक्ट्रम मामले में क्या और कब हुआ देखिए 1 नजर में-
- ए राजा यूपीए-2 सरकार में दूसरी बार दूरसंचार मंत्री नियुक्त किया गया था ये 16 मई 2007 की बात थी।
- केंद्र सरकार ने 25 अक्तूबर 2007 में मोबाइल सेवाओं के लिए टू जी स्पेक्ट्रम की निलामी की संभावनाओं को खारिज किया
- दूरसंचार कंपनियों को सितंबर-अक्टूबर 2008 में स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए।
- केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कई घोटाले पाए और 15 नवंबर 2008 को दूरसंचार मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही
- सीबीआई ने टू जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए 21 अक्तूबर 2009 मामला दर्ज किया
- मामले के सिलसिले में सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर 22 अक्तूबर 2009 छापेमारी की, जिसमें कई मामले सामने आए।
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 17 अक्तूबर 2010 को दूसरी पीढ़ी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया
- दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ नवंबर 2010 में विपक्ष ने संसद की कार्यवाही ठप्प की और उन्हें हटाने की मांग की
- ए राजा ने 14 नवम्बर 2010 को इस्तीफा दिया
- मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को 15 नवम्बर 2010 को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया
- टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर संसद में नवम्बर 2010 तक विरोध जारी रहा।
- दूरसंचार विभाग ने 13 दिसम्बर 2010 को उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल की समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने का कार्यभार दिया गया और दूरसंचार मंत्री को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया
- ए राजा पूरी तरह से सीबीआई के गिरफ्त में थी और 24 और 25 दिसम्बर 2010 को उनसे पूछताछ की जाती रही वहीं राजा से तीसरी बार 31 जनवरी 2011 को फिर से पूछ -ताछ की गई और समीति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
- टू जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने 2 फरवरी 2011 गिरफ्तार कर लिया
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2जी स्कैम में कब क्या हुआ
a raja and kanimozhi
- स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा को 8 फरवरी 2011 को गिरफ्तार किया गया
- सीबीआई ने 2 अप्रैल 2011 को पहली चार्जशीट दाखिल की
- वहीं सीबीआई ने 25 अप्रैल 2011 को दूसरी चार्जशीट दाखिल की
- कनिमोझी और शरद कुमार की गिरफ्तारी के आदेश 20 मई 2011 को दिए गए
- ए राजा ने 25 जुलाई 2011 को पीएम मनमोहन सिंह और चिदंबरम को गवाह बनाने की बात कही
- सीबीआई ने कोर्ट में 22 सितंबर 2011 को पी चिदंबरम का बचाव किया
- वहीं 21 अक्टूबर 2011 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी वित्तमंत्री पी चिदंबरम का बचाव किया
- चिदंबरम को सह आरोपी बनाए जाने की बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई 24 अक्टूबर 2011 को टाल दी गई।
- कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने17 नवंबर 2011 को सुब्रह्मण्यम स्वामी को चिदंबरम की भूमिका से जुड़े दस्तावेज दिए
- 2जी स्कैम को नया मोड़ दिया स्वामी ने 3 दिसंबर 2011 को कोर्ट को बताया कि चिदंबरम को क्यों सहआरोपी बनाया जाना चाहिए
- पीएमओ कार्यालय पर 30 जनवरी 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने आड़े हाथों लिया और अदालत ने कहा कि PMO के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को सही जानकारी नहीं दी
- सुप्रीम कोर्ट ने ए राजा के समय आवंटित सभी 122 लाइसेंस 02 फरवरी 2012 को रद्द कर दिया