फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   29 year old teacher in Maharashtra has been travelling to a village for just one student

टीचर के जज्बे को सलाम, सिर्फ एक बच्चे को पढ़ाने के लिए रोजाना पार करता है पहाड़

Sun, 25 Mar 2018 11:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Updated Sun, 25 Mar 2018 11:04 AM IST
विज्ञापन
29 year old teacher in Maharashtra has been travelling to a village for just one student
स्कूल टीचर

आपने स्कूलों में शिक्षकों को पढ़ाते हुए देखा होगा लेकिन क्या सिर्फ एक बच्चे को पढ़ाने के लिए किसी शिक्षक को रोजाना स्कूल आते हुए देखा है? शायद आपका जवाब होगा नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है। मगर महाराष्ट्र में पिछले दो सालों से 29 साल के एक सरकारी टीचर रोजाना इस काम को करते हैं। नागपुर के रहने वाले इस टीचर का नाम रजनीकांत मेंढे है। वह पुणे से 100 किलेमीटर से ज्यादा दूर स्थित भोर के गांव चंदर में 8 साल के बच्चे युवराज सिंह को पढ़ाने के लिए जाते हैं। गांव तक पहुंचने के लिए उन्हें रोजाना पर्वत को पार करते हुए 12 किलोमीटर मिट्टी से भरे हुए रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।

विज्ञापन


रजनीकांत सरकार द्वारा नियुक्त किए गए जिला परिषद टीचर हैं। वह जिस चंदर गांव में पढ़ाने के लिए जाते हैं वहां 15 झोपड़ियां हैं जिसमें 60 लोग रहते हैं। जहां लोगों से ज्यादा संख्या में सांप रहते हैं। दो सालों से केवल युवराज ही उनका छात्र है। स्कूल पहुंचने के बाद मेंढे की पहली नौकरी बच्चे को ढूंढना होता है। उन्होंने कहा- मैं अमूमन उसे पेड़ों के पीछे छुपे हुए पाता हूं। कई बार मैं उसे उसकी झोपड़ी से लेकर आता हूं। मैं उसकी इस अनिच्छा को समझ सकता हूं। उसे बिना दोस्तों के स्कूल जाना पड़ता है। मेंढे पिछले आठ सालों से यहां पढ़ाने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पास के हाईवे से गांव पहुंचने के लिए एक घंटे तक मिट्टी वाले रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
विज्ञापन

 
यह गांव सांसद सुप्रिया सुले के चुनाव क्षेत्र के अंतर्गत आता है लेकिन गांव वालों का कहना है कि वह यहां कभी नहीं आईं। गांव के एक नागरिक ने कहा- सरकार? आखिरी बार उसके बारे में हमने तब सुना था जब पोलियो टीकाकरण की बात हुई थी। मेंढे का कहना है कि आठ साल पहले जब मैंने यहां पढ़ाना शुरू किया था तब 11 बच्चे हुआ करते थे। मेरे पास स्मार्ट बच्चे थे। बहुतों ने इसलिए स्कूल छोड़ दिया क्योंकि उच्च शिक्षा के लिए 12 किलोमीटर मांगाव जाना पड़ेगा। बहुत सी लड़कियों को गुजरात के खेतों और फैक्ट्रियों में दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए भेज दिया गया। मैंने बहुत से पैरेंट्स से बच्चों को स्कूल में रहने देने की विनती की लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


चंदर गांव में साल 1985 में यह स्कूल बना था। कुछ सालों बाद यहां बिना छत वाली चार दिवारी थी। हाल ही में एसबस्टस शीट के जरिए छत बनाई गई है लेकिन वहां से भी बारिश का पानी रिसकर अंदर आ जाता है। रजनीकांत ने कहा- एक रात को स्कूल की छत से मेरे ऊपर सांप गिर गया। अब तक तीन बार मेरा सामना सांप के साथ हो चुका है। युवराज की उम्र के सभी बच्चे खेलते रहते हैं लेकिन उसके पास केवल मैं हूं। उसके लिए स्कूल का मतलब खाली बेंच और चार दिवारी है। इस गांव में बिजली तक नहीं है। जीवन निर्वाह करने के नाम पर गांव वालों के पास कुछ गाय और पत्थर तोड़ने का काम है। अस्पताल की सुविधा भी 63 किलोमीटर दूर है जिसकी वजह से रास्ते में ही कई मरीज दम तोड़ देते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed