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26/11 मुंबई हमले से मिली सीख- अब आतंकी हमले से निपटने के लिए बस उठाने होंगे ये 8 कदम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 24 Nov 2018 02:57 PM IST
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Mumbai Attack
- फोटो : Amar Ujala
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मुंबई पर 26 नवंबर 2008 को हुआ हमला भारत पर एक काला स्याह की तरह है। इसे खुफिया एजेंसी की सबसे बड़ी असफलता के रूप में देखा जाता है। 26 नवंबर 2008 को शुरू हुआ ये हमला 29 नवंबर तक चलता रहा था। इस हमले में करीब 164 लोग मारे गए थे जबकि 308 लोग बुरी तरह घायल हुए थे। मुंबई हमला अभी तक देश में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला रहा है।
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मुंबई हमले की दसवीं वर्षगांठ पर हर साल हमने क्या सीखा पर विचार किया जाता है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था और ऐसी किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए मुंबई पुलिस ने एक व्यवस्था तैयार की है। किसी भी आपदा या फिर आतंकी हमले की साजिश को देखते हुए मुंबई पुलिस ने आठ सूत्री कार्यक्रम तैयार किया है।
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हर बड़े पुलिस अधिकारी के काम पूरी तरह से निर्धारित कर दिए गए हैं। यही नहीं मुंबई हमले के बाद से नए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड हब तक यहां तैनात कर दिया गया है। इन हमलों के बाद मुंबईकर और मुबंई पुलिस ने कई सबक लिया था। इसी सबक के बीच मुंबई पुलिस ने शहर के चप्पे-चप्पे पर उच्चतकनीक से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं।
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वैसे तो मुंबई को सुरक्षित बनाने का दावा करते हुए सरकार ने नवंबर 2016 में मुंबई की सड़कों से लेकर गलियों तक करीब 5200 उच्च तकनीक कैमरे की जर्द में ला दिया । ये कैमरे इसलिए लगाए गए एक कमरे में बैठकर पुलिस शहर में होने वाली दुर्घटनाओं पर नजर रखी जा सके।
कैमरे इसलिए भी लगाए गए कि शहर में बढ़ती हिंसा, चोरी और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और पुलिस के पास उस पूरे इंसीडेंट को सोल्व करने में मदद मिल सके। और पुलिस के पास अपराधियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हो। मुंबई में 5000 कैमरे 1510 स्पॉट लगाए गए।
26/11, mumbai attack
- फोटो : Amar Ujala
यही नहीं किसी भी आतंकी हमले और अप्रिय घटना के समय मुंबई पुलिस ने अपने अधिकारियों के लिए साफ दिशा निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
आइए जानते हैं क्या हैं वो दिशा निर्देश:
1. आतंकी हमले की स्थिति में ज्वाइंट कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर, कंट्रोल रूम का चार्ज संभालेंगे
2. स्थानीय पुलिस जहां आतंकियों ने वारदात को अंजाम दिया है वह तुरंत प्रादेशिक कंट्रोल रूम और डिप्टी कमिशनर ऑफ पुलिस को आपातकाल की स्थिति की सूचना देंगे, इसके साथ ही मुख्य कंट्रोल रूम को भी रिपोर्ट करेंगे।
3. अगर उस दौरान रीजनल एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस स्पॉट पर पहुंचेगा वह तुरंत सारी स्थिति को न केवल समझेगा बल्कि प्रभार संभालेगा। डीसीपी युद्ध की स्थिति की तर्ज पर आदेश देंगे और मैदान में मोर्चा संभालेंगे।
4. जब तक क्विक रिस्पांस टीम हमले के स्थान पर पहुंच कर मोर्चा नहीं संभाल लेती है तबतक स्थानीय पुलिस को मोर्चा संभालना होगा। स्थानीय पुलिस में अब युद्ध जैसी स्थिति से निपटने वाले कमांडो तैनात किए गए है जो क्वीक रिस्पांस टीम के आने तक मोर्चा संभालने का काम करेंगे।
5. अगर हमले में किसी आम जनता को बंधक बना लिया जाता है को ऐसी स्थिति से निपटने के लिए भी क्राइसिस मैनेजमेंट टीम तैयार की गई है जो बंधकों को छुड़ाने से लेकर नेगोशिएसन तक का काम करेगी।
6. इस आपात स्थिति से निपटने के लिए एंटी टेरेरिज्म स्क्वायड का चीफ की निगरानी में ही पूरा चक्रव्यूह तैयार किया जाएगा। वही मामले की संजीदगी को देखते हुए डीसीपी से लेकर फोर्स तक को दिशा निर्देश देगा।
7. आतंकी हमले की स्थिति में दो कॉर्डोन बनाई जाएंगी जो आतंकियों को व्यस्त रखने का काम करेंगी।
8. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक एपेक्स क्राइसिस मैनेजमेंट टीम का भी गठन किया गया है जिसमें मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं जो मारोल स्थित एनएसजी के कमांडर को स्थिति से निपटने के लिए कहेंगे या आदेश पारित करेंगे।
आइए जानते हैं क्या हैं वो दिशा निर्देश:
1. आतंकी हमले की स्थिति में ज्वाइंट कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर, कंट्रोल रूम का चार्ज संभालेंगे
2. स्थानीय पुलिस जहां आतंकियों ने वारदात को अंजाम दिया है वह तुरंत प्रादेशिक कंट्रोल रूम और डिप्टी कमिशनर ऑफ पुलिस को आपातकाल की स्थिति की सूचना देंगे, इसके साथ ही मुख्य कंट्रोल रूम को भी रिपोर्ट करेंगे।
3. अगर उस दौरान रीजनल एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस स्पॉट पर पहुंचेगा वह तुरंत सारी स्थिति को न केवल समझेगा बल्कि प्रभार संभालेगा। डीसीपी युद्ध की स्थिति की तर्ज पर आदेश देंगे और मैदान में मोर्चा संभालेंगे।
4. जब तक क्विक रिस्पांस टीम हमले के स्थान पर पहुंच कर मोर्चा नहीं संभाल लेती है तबतक स्थानीय पुलिस को मोर्चा संभालना होगा। स्थानीय पुलिस में अब युद्ध जैसी स्थिति से निपटने वाले कमांडो तैनात किए गए है जो क्वीक रिस्पांस टीम के आने तक मोर्चा संभालने का काम करेंगे।
5. अगर हमले में किसी आम जनता को बंधक बना लिया जाता है को ऐसी स्थिति से निपटने के लिए भी क्राइसिस मैनेजमेंट टीम तैयार की गई है जो बंधकों को छुड़ाने से लेकर नेगोशिएसन तक का काम करेगी।
6. इस आपात स्थिति से निपटने के लिए एंटी टेरेरिज्म स्क्वायड का चीफ की निगरानी में ही पूरा चक्रव्यूह तैयार किया जाएगा। वही मामले की संजीदगी को देखते हुए डीसीपी से लेकर फोर्स तक को दिशा निर्देश देगा।
7. आतंकी हमले की स्थिति में दो कॉर्डोन बनाई जाएंगी जो आतंकियों को व्यस्त रखने का काम करेंगी।
8. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक एपेक्स क्राइसिस मैनेजमेंट टीम का भी गठन किया गया है जिसमें मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं जो मारोल स्थित एनएसजी के कमांडर को स्थिति से निपटने के लिए कहेंगे या आदेश पारित करेंगे।