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8000 मीटर से ऊंची चोटियों को फतह करने वाले दुनिया के सबसे युवा पर्वतारोही बने अर्जुन वाजपेयी

Fri, 25 May 2018 02:21 PM IST
एन. अर्जुन, चईराम (तापलेगुंज, नेपाल)
एन. अर्जुन, चईराम (तापलेगुंज, नेपाल) Updated Fri, 25 May 2018 02:21 PM IST
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24 year old Arjun Vajpai climbs world's third highest peak Kanchenjunga
अर्जुन वाजपेयी

जोखिम उठाने वाले ही, अपनी मंजिल पाते हैं, यह बात नोएडा के युवा पर्वतारोही अर्जुन पर सटीक बैठती हैं। 20 मई, 2018 की सुबह यानी भारतीय समयानुसार सुबह  8.05 मिनट पर जैसे ही उन्होंने कंचनजंघा (8586 मीटर) की चोटी पर कदम रखा, एक और विश्व कीर्तिमान उनके नाम हो गया। वह दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंघा फतह करने वाले दुनिया के सबसे युवा पर्वतारोही बन गए। यह कामयाबी इसलिए भी बहुत मायने रखती है क्योंकि इसके साथ ही वे दुनिया की आठ हजार से अधिक ऊंचाई वाली चोटियों को फतह करने वाले दुनिया के सबसे युवा पर्वतारोही भी बन गए हैं। 

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चोटी तक की कहानी अर्जुन की जुबानी

मैं एक अप्रैल, 2018 को कंचनजंघा की चढ़ाई के लिए घर से नेपाल के लिए निकला। फिर बेस कैंप में जाकर शुरू हुई चढ़ाई की तैयारी। इस दौरान बहुत सी बातों का ख्याल रखना होता है। क्योंकि बारिश शुरू होने वाली थी इसलिए मौसम को भी ध्यान में रखकर तैयारी करनी थी। लगातार चढ़ाई की तैयारी की। मैं नोएडा का रहने वाला हूं। यहां का मौसम, यहां का वातावरण और नेपाल और उसके बाद कंचनजंघा की चढ़ाई के लिए खुद को बहुत तैयार करना पड़ा। हर बार की तरह, लगातार मेहनत की।
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और अंततः वह घड़ी आई जब मुझे कंचनजंघा की चढ़ाई के लिए हरी झंडी मिल गई। मैंने कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर 24 अप्रैल, 2018 को चढ़ाई शुरू की। किसी भी पहाड़ की चढ़ाई के लिए बेस कैंप के अलावा करीब 4 कैंप और बनाए जाते हैं। इसमें भी बेस कैंप के अलावा चार अन्य कैंप बनाए गए थे। मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। बेस कैंप से चार नंबर कैंप तक पहुंचने में 23 दिन लग गए। अब चोटी की दूरी मुझसे करीब 1200 मीटर। शनिवार की शाम को करीब 4 बजे हमने समिट के लिए यात्रा शुरू की।
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...और ऑक्सीजन खत्म

दिन की यात्रा पूरी रात जारी रही। मेरे पास तीन ऑक्सीजन सिलेंडर थे। रात को एक खत्म हो गया और जब दूसरा लगाने लगा तो उसका रेगुलेटर काम नहीं कर रहा था। इसका मतलब है कि आपके पास अब केवल एक ही सिलेंडर  है। एक बार तो सोच में पड़ गया। अब क्या लेकिन दूसरे ही पल मन में आया अभी तीसरा तो है। तीसरा ऑक्सीजन लगाया और चलने लगा। धीरे-धीरे सूरज की रोशनी से बरफ की चादर चमक उठी। रोशनी धीरे-धीरे फैलने लगी। लेकिन ऑक्सीजन धीरे-धीरे खत्म हो रहा था।

हम समिट से बहुत करीब लगभग50 मीटर की दूरी पर होंगे कि सीटी बजने लगी, यानी ऑक्सीजन लगभग खत्म होने को है। तभी मेरे एक साथी ने कहा, क्या हुआ तो बोला- कुछ नहीं। एक पल के लिए रूक गया, दिमाग ने लगभग काम करना बंद कर दिया था। प्यास भी लग रही थी। गला सूख रहा था। सामने लक्ष्य और ऑक्सीजन लगभग खत्म होने को था। मैं भगवान शिव और हनुमान जी को बहुत मानता हूं। हमेशा छोटा हनुमान चालीसा पास रखता हूं। मैंने परमात्मा को याद किया और एक साथ पूरी ताकत से आगे बढ़ा...  और चंद मिनटों में चोटी पर फतह पा लिया। उस समय सुबह के 8.05 बज रहे थे। 

ऊंचा-ऊंचा और ऊंचा का नाम कंचनजंघा

क्या कंचनजंघा की चढ़ाई अन्य से दुश्वार या मुश्किल है, इस सवाल के जवाब में अर्जुन बोले- मैंने कई पहाड़ियों की चढ़ाई की लेकिन कंचनजंघा को कंचनजंघा क्यों कहते हैं, पता इस पर चढ़ने पर ही चलता है। मैं किसी दूसरी चढ़ाइयों से इसकी तुलना नहीं कर रहा और ना ही करनी चाहिए। लेकिन जैसा आपने पूछा उसके लिए कह रहा हूं। दूसरे पहाड़ों में कहीं-कहीं समतल या कुछ उतार-चढ़ाव होता है। लेकिन कंचनजंघा की चढ़ाई सीधी, ऊपर- ऊपर और ऊपर ही चढ़ते जाना है। कहीं-कहीं छोड़कर बाकी सब जगह बिल्कुल सीधी चढ़ाई करनी पड़ती है। यह जितना सुनने में आसान लगता है, चढ़ने में उतना ही मुश्किल है।

अर्जुन की कहानी असाधारणः ऋतिक रोशन

24 year old Arjun Vajpai climbs world's third highest peak Kanchenjunga

अर्जुन की सफलता पर फिल्म स्टार ऋतिक रोशन ने कहा, अर्जुन की यह कहानी असाधारण है। उनका साधारण चीजों से आगे निकलने के बेजोड़ उत्साह और इच्छा ने उन्हें इस असाधारण सफलता हासिल करने में मदद की। मुझे पूरा भरोसा है कि वह आने वाली पीड़ियों को प्रेरित करेंगे और मैं एक अभियान के लिए स्क्रीन पर उनकी भूमिका निभाकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। 

सबसे युवा पर्वतारोहन का नया रिकॉर्ड

अर्जुन वाजपेयी ने जैसे  ही कंचनजंघा की चोटी को फहत किया, उसके साथ ही वे 8 हजार मीटर से ऊंची 6 चोटियों को नापने वाले सबसे युवा पर्वतारोही बन गए। पूछने पर कहते हैं, मैं यह नहीं देखता कि रिकॉर्ड बन रहे हैं या नहीं। बस मैं तो अपना काम करता जाता हूं। कोशिश करूंगा कि दुनिया में जितने भी 8 हजार की ऊंचाई से अधिक वाली चोटियां हैं, उन्हें फतह करूं। अगर देशवासियों का आशीर्वाद रहा तो इस मुकाम को भी हासिल कर लूंगा। 
 

वर्ष चोटी ऊंचाई स्थिति
2010 माउंट एवरेस्ट 8,848 मीटर  
2011 माउंट ल्होत्से 8,516 मीटर  
2011 माउंट मनास्लू 8,163 मीटर आठवीं सबसे ऊंची चोटी
2012 माउंट चोय 8,201 मीटर दुनिया की छठी ऊंची चोटी
2016 माउंट मकालू 8,485 मीटर दुनिया की पांचवी सबसे ऊंची चोटी
2018 कंचनजंघा 8,586 मीटर दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी

अर्जुन का अगला निशाना शीम पंग्म

कंचनजंघा तो फतह कर लिया, अब अगला लक्ष्य पूछने पर अर्जुन कहते हैं, फिलहाल तो मैं थोड़ा आराम करना चाहता हूं। जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहता हूं। मां से मिलने की बड़ी इच्छा है। उनके हाथों का खाना खाने की चाहत है। कढ़ी-चावल बहुत पसंद है। फिर सोचेंगे कि आगे क्या करना है। लेकिन बातचीत के दौरान उनके मन की बात आखिरकार निकल ही आई। उनका अगला निशाला शीम पंग्म है। यह दुनिया की चौदहवीं सबसे ऊंची चोटी (8,027 मीटर) है। आपको बता दें अर्जुन मिशन के लिए 10 से 12 घंटा प्रतिदिन मेहनत करते हैं। कुछ दिनों बाद ही वे अगले मिशन के लिए जुट जाएंगे और इसी साल के सितंबर माह में इस पर फतह करने की कोशिश करेंगे। 

इस अवसर पर नसीब पुरी, निदेशक, माउंटेन ड्यू, पेप्सिको इंडिया ने कह, माउंटेन ड्यू मानता है कि हमारे भीतर साधारण से आगे निकलने की क्षमता है। हम युवाओं को पर्वतों को पार करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश करते हैं जो हम सभी के भीतर है। अर्जुन से पहली मुलाक़ात करने के बाद से ही हम उनके सफ़र से प्रेरित हो गए - यह हमारे रिस्क उठा, नाम बना के उद्देश्य से मेल खाता है। हम उनकी अविश्वसनीय यात्रा का हिस्सा बनकर बेहद गौरन्वावित महसूस कर रहे हैं।

दुनिया की 10 चोटियां 
 
माउंट एवरेस्ट 8,848 मीटर
के-2 (कंचनजंघा 2) 8,611 मीटर
कंचनजंघा 8,586 मीटर
ल्होत्से 8,516 मीटर
मकालू 8,485 मीटर
चोयु 8,201 मीटर
धौलागिरी 8,167 मीटर (दुश्वार मानी जाती है चढ़ाई)
मनास्लु 8,163 मीटर
नंगा पर्वत 8,126 मीटर (पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के गिलगिट बालटिस्तान में यह खड़ा है। नंगा पर्वत की चढ़ाई सबसे मुश्किल बताई जाती है। इसे कीलर माउंटेन भी कहा जाता है।)
अन्नापूर्णा 8,091 (यह चोटी उत्तर मध्य नेपाल में है। माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाले अधिकतर पर्वतारोही पहले यहां चढ़ाई करते हैं।)
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