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27 साल बाद जेल से छूटे पिता को देखते ही बेटे को पड़ा हार्ट अटैक, बांहों में तोड़ा दम

Sun, 22 Jan 2017 12:10 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 22 Jan 2017 12:10 AM IST
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23 years on, youth sees dad freed from jail, dies of shock
- फोटो : फाइल फोटो
मुंबई के साजिद मकवाना चार साल के थे जब उनके पिता हसन को बॉम्बे हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हसन बीतें 23 साल से जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। इस दौरान वो कभी पैरोल पर जेल से बाहर भी नहीं आए। इसलिए हसन और उनके बेटे साजिद मकवाना में कोई मुलाकात भी नहीं हो पाई।
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23 साल बाद साजिद मकवाना ने जब सुना की उसके पिता, हसन की सजा पूरी हो गई है और वो कोलाबा सेंट्रल जेल से बाहर आ गए हैं तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। साजिद काफी खुश था हालांकि उनकी खुशी ज्यादा देर तक न टिक पाई।
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टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक 64 वर्षीय हसन जेल से दोपहर में बाहर आए। जेल के सुप्रिडेंट शरद शेल्के ने बताया, 'हसन जब छूटा तो उसने सबसे पहले जेल से बाहर निकल से जेल को सैल्यूट किया और फिर अपने परिवारजनों से मिलने चला गया। जोकि सड़क के दूसरी तरफ खड़े थे।'
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पिता को देखते ही पड़ा हार्ट अटैक

23 years on, youth sees dad freed from jail, dies of shock
शेल्के ने बताया कि साजिद, अपने पिता से मिलने से पहले काफी खुश था, उसकी खुशी रोके नहीं रुक रही थी। हसन से मिलने के बाद वो उनसे बात करने लगा तभी उसके सीने में दर्द होने लगा। इससे पहले साजिद किसी को कुछ बताता वो सड़क पर गिर गया। 

साजिद के परिवार के बाकि लोग जल्दी से उसे नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि साजिद अपने पिता से मिलने की खुशी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और जिससे उसे दिल का दौरा पड़ गया।

जेल के सुप्रिडेंट शरद शेल्के ने बताया कि हसन 1996 से जेल में था। वह जेल में रहते हुए अपने परिवार वालों से फोन पर बात करता था, लेकिन हसन और साजिद के बीट में कभी भी मुलाकात नहीं हुई थी।

जल्द ही साजिद की होने वाली थी शादी

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साजिद की योजना जल्द ही शादी करने की थी। साजिद ने सोचा था कि शादी के वक्त उसके पिता भी मौजूद होंगे लेकिन साजिद की यह इच्छा अधूरी रह गई। साजिद मुंबई के अंधेरी में एक मोटर ड्राइविंग स्कूल चलाता था। 

साजिद के पिता हसन का एक युवक से झगड़ा हुआ था, झगड़े में उस युवक की मौत हो गई। मामला कोर्ट में पहुंचा लेकिन हसन ने 1981 में जमानत ले ली। बाद में कोर्ट ने 1996 में फैसला सुनाते हुए हसन को उम्र कैद की सजा दी और उसे यरवदा जेल भेज दिया गया। बाद में हसन को कोलाबा जेल स्थानतरित कर दिया गया जहां वो बीते 23 साल से अपनी सजा काट रहा था।

 
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