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21 जुलाई 1993 पुलिस फायरिंग: CM शुभेंदु आज सार्वजनिक करेंगे आयोग की रिपोर्ट, ममता बनर्जी से है क्या कनेक्शन?
Mon, 20 Jul 2026 04:09 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 20 Jul 2026 04:09 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल सरकार ने 21 जुलाई 1993 की पुलिस फायरिंग की जांच से जुड़ी न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुषांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट के साथ यह भी बताया जाएगा कि आयोग की कौन-सी सिफारिशों पर अमल हुआ और कौन-सी लंबित रहीं। यह कदम 21 जुलाई के शहीद दिवस कार्यक्रमों से ठीक पहले उठाया गया है।
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सीएम शुभेंदु अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि 21 जुलाई 1993 को यूथ कांग्रेस की रैली के दौरान पुलिस कार्रवाई में 13 लोगों की मौत की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुषांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट सोमवार को बाद में सार्वजनिक की जाएगी।
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विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए अधिकारी ने कहा कि यह रिपोर्ट राज्य की जनता के सामने 21 जुलाई को होने वाली 'शहीद दिवस' रैलियों से एक दिन पहले रखी जाएगी। इस बार तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट अलग-अलग 'शहीद दिवस' रैलियां आयोजित करेंगे।
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आयोग की रिपोर्ट को लेकर क्या बोले शुभेंदु अधिकारी?
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह यह भी बताएंगे कि आयोग की किन सिफारिशों को लागू किया गया और पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 वर्षों के कार्यकाल में कौन-सी सिफारिशें लागू नहीं की गईं। यह आयोग वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने गठित किया था। इसका उद्देश्य 21 जुलाई 1993 को तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के दौरान एस्प्लेनेड में आयोजित यूथ कांग्रेस की रैली में पुलिस कार्रवाई के दौरान 13 लोगों की मौत की जांच करना था।
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वर्ष 1993 की इस घटना के समय ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। उन्होंने वर्ष 1998 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। मंगलवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला तृणमूल कांग्रेस गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला प्रतिद्वंद्वी गुट, दोनों पुलिस कार्रवाई में मारे गए लोगों की याद में अलग-अलग 'शहीद दिवस' रैलियां आयोजित करेंगे। कांग्रेस भी 1993 के विरोध प्रदर्शन में मारे गए लोगों की स्मृति में एक रैली आयोजित करेगी।
21 जुलाई को ममता के आंदोलन में क्या हुआ था?
21 जुलाई 1993 को पश्चिम बंगाल की तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के दौरान कोलकाता में युवा कांग्रेस के 'राइटर्स बिल्डिंग अभियान' के दौरान पुलिस फायरिंग हुई थी। उस समय राज्य में ज्योति बसु मुख्यमंत्री थे, जबकि ममता बनर्जी प्रदेश युवा कांग्रेस की प्रमुख नेताओं में शामिल थीं और प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही थीं। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मतदाता पहचान पत्र के बिना मतदान की अनुमति न दी जाए। राइटर्स बिल्डिंग की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने गोलीबारी की।
इस फायरिंग में 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इस घटना ने राज्य की राजनीति पर गहरा असर डाला और ममता बनर्जी ने इसे लंबे समय तक राजनीतिक मुद्दा बनाए रखा। बाद के वर्षों में 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस ने 'शहीद दिवस' के रूप में मनाना शुरू किया। यह घटना आज भी पश्चिम बंगाल की राजनीति के सबसे चर्चित और विवादित अध्यायों में गिनी जाती है।