Maharashtra: बिल्डर को धमकाने के मामले में छोटा राजन 20 साल बाद बरी, आरोप साबित करने में विफल रहा अभियोजन पक्ष
Maharashtra: दो दशक पुराने बिल्डर को धमकी देने के मामले में कोर्ट ने छोटा राजन को बरी कर दिया, क्योंकि उसके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं हो सका। हालांकि, वह पत्रकार जे डे की हत्या के मामले में तिहाड़ जेल में रहेगा, जहां वह उम्रकैद की सजा काट रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को उस समय झटका लगा, जब एक विशेष कोर्ट ने दो दशक बाद गैंगस्टर छोटा राजन को एक बिल्डर को धमकाने के मामले में बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह आरोप साबित करने में असफल रहा, क्योंकि गवाहों की गवाही में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला।
हालांकि, छोटा राजन अब भी तिहाड़ जेल में ही रहेगा। वह अभी मुंबई के क्राइम रिपोर्टर ज्योतिर्मय डे की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। विशेष न्यायाधीश ए.एम. पाटिल ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष का सबसे विश्वसनीय गवाह भी इस बात को लेकर निश्चित नहीं है कि फोन पर बिल्डर को धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में छोटा राजन ही था।
ये भी पढ़ें: 'ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ': पीएम मोदी का सेना को सख्त निर्देश, 'वहां से गोली चलेगी तो यहां से गोला चलेगा'
मामले की जांच करने वाली सीबीआई ने कहा था कि बिल्डर नंद कुमार हरचंदानी को छोटा राजन के नाम पर कई धमकी भरे फोन आए थे, जिनमें कहा गया था कि वह कुछ कुछ व्यापारियों के बकाया पैसे चुका दे। अभियोजन पक्ष का दावा था कि पैसे के लेन-देन को लेकर छोटा राजन नाराज था और उसने बिल्डर को सबक सिखाने की योजना बनाई थी। आरोप था कि राजन ने अपने सहयोगियों के जरिए हरंचदानी को कहा था कि वह निर्माण कार्य रोक दे। सितंबर 2004 में सात अज्ञात लोग हरचंदानी के दफ्तर में घुसे और उनके अकाउंटेंट पर गोलीबारी की, लेकिन वह बाल-बाल बच गए।
ये भी पढ़ें: Assam: '1971 की निर्णायक जीत का भारत को नहीं मिला फायदा', सीएम हिमंत ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कोर्ट ने कहा, अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए दो चश्मदीदों की गवाही में छोटा राजन के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला। मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) कोर्ट के जज ने कहा, सबसे अहम गवाह इरशाद शेख था, जिसे छोटा राजन की तरफ से धमकी भरा फोन आया था। लेकिन, जिरह के दौरान उसने स्वीकार किया कि वह पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि फोन करने वाला छोटा राजन ही था या कोई और। यही गवाही इस केस को जड़ से हिला देती है। कुल मिलाकर कहा जाए तो अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.