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अध्ययन: 2050 तक पार्किंसन से प्रभावित होंगे 2.5 करोड़ लोग, बढ़ती बुजुर्ग आबादी बनी मुख्य कारण

Fri, 07 Mar 2025 06:12 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 07 Mar 2025 06:12 AM IST
सार

शोधकर्ताओं के मुताबिक, पार्किंसन के मरीजों की इस अनुमानित संख्या में 2021 के मुकाबले 112 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के दक्षिण एशिया में अनुमानित मामलों की संख्या 68 लाख होगी और यह क्षेत्र दुनिया में पार्किंसन के मरीजों के मामले में दूसरे स्थान पर रहेगा।

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2.5 crore people will be affected by Parkinson's by 2050, increasing elderly population is the main reason
पार्किंसन बीमारी - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी

विस्तार

दुनियाभर में 2.50 करोड़ से अधिक लोगों पर 2050 तक पार्किंसन बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा मंडरा रहा है। इसकी सबसे अहम वजह तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी है। पुरुषों के इसकी चपेट में आने की आशंका अधिक है।
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चीन की कैपिटल मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं सहित अन्य शोधकर्ताओं के अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। इसके   नतीजे ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
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शोधकर्ताओं के मुताबिक, पार्किंसन के मरीजों की इस अनुमानित संख्या में 2021 के मुकाबले 112 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के दक्षिण एशिया में अनुमानित मामलों की संख्या 68 लाख होगी और यह क्षेत्र दुनिया में पार्किंसन के मरीजों के मामले में दूसरे स्थान पर रहेगा। वहीं, पूर्वी एशिया एक करोड़ से अधिक मामलों के साथ पहले नंबर पर होगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अनुमान स्वास्थ्य अनुसंधान, नीतिगत फैसले और संसाधनों के सही इस्तेमाल में मदद कर सकता है। एजेंसी
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बीमारी में लगातार हिलते रहते हैं हाथ-पैर
पार्किंसन बीमारी एक तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारी है। यह मस्तिष्क के गतिविधि को नियंत्रित करने वाले हिस्से को प्रभावित करती है। इस बीमारी में शरीर के अंगों में कंपकंपी और मांसपेशियों में जकड़न और रफ्तार धीमी हो जाती है। इसके साथ ही मरीज को सोचने, संतुलन बनाए रखने यानी चलने, खड़े होने, बात करने और बैठने में भी परेशानी होती है और हाथ व पैर लगातार हिलते रहते हैं। यह बोलने, याददाश्त और व्यवहार से जुड़ी परेशानियां भी पैदा कर सकती है।


बुढ़ापा बनेगा 90 फीसदी नए मामलों की वजह
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2021 के डाटा का विश्लेषण किया। उन्होंने 2022 से 2050 के बीच 195 देशों और क्षेत्रों में इस बीमारी के बढ़ने के कारणों की जांच की। उन्होंने पाया कि बुजुर्ग आबादी का बढ़ना ही 90 फीसदी पार्किंसन के नए मामलों की मुख्य वजह होगा। शोध में यह भी पाया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी की संभावना कम होती है। पुरुषों और महिलाओं में पार्किंसन अनुपात 2021 में 1.46 था, जो 2050 तक 1.64 हो सकता है।
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