1993 Mumbai Bomb blasts: ‘गवाह और परिवार को पुलिस पर्याप्त सुरक्षा दे’; कोर्ट ने दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट में एक सत्र अदालत ने मामले में सरकारी गवाह और उसके परिवार को सुरक्षा देने के आदेश दिया है। 12 मार्च, 1993 को मुंबई के विभिन्न स्थानों पर बारह बम विस्फोट हुए थे जिनमें 257 लोग मारे गए थे।
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मुंबई में 1993 के सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में कोर्ट ने पुलिस को एक सरकारी गवाह और उसके परिवार के सदस्यों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिए हैं। साथ ही सत्र अदालत ने दो सप्ताह के अंदर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
सत्र अदालत के न्यायाधीश वी डी केदार ने कहा कि वह व्यक्ति अभियोजन पक्ष का मुख्य गवाह और मुख्य अनुमोदक है। सात लोगों की देर से गिरफ्तारी के मामले में मुकदमा जल्द ही शुरू होने वाला है।गवाही देने वाले व्यक्ति ने अपने और अपने परिवार के जीवन को खतरे की आशंका जताते हुए पुलिस सुरक्षा बढ़ाने की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया था।
12 मार्च, 1993 को मुंबई के विभिन्न स्थानों पर बारह बम विस्फोट हुए थे जिनमें 257 लोग मारे गए और 700 से अधिक अन्य घायल हो गए।
दाऊद इब्राहिम है मुंबई ब्लास्ट का मास्टरमाइंड
भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई बम धमाकों के मास्टरमाइंड है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दाऊद इब्राहिम का जन्म 26 दिसंबर 1955 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के एक गांव में कोंकणी मुस्लिम परिवार में हुआ था। दाऊद का पूरा नाम दाऊद इब्राहिम कासकर है। दाऊद का पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस में हेड कॉन्सटेबल था। दाऊद का बचपन मुंबई के डोंगरी इलाके में बीता। यह इलाका सेंट्रल मुंबई का मुस्लिम बहुल इलाका है और बाद में यही इलाका दाऊद इब्राहिम की गैरकानूनी गतिविधियों का केंद्र बना।
डी कंपनी से संगठित अपराध का बनाया बड़ा नेटवर्क
डी कंपनी ने दाऊद ने अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों को शामिल किया और तस्करी करने लगा। जल्द ही दाऊद ने अपराध का एक बड़ा नेटवर्क बना लिया, जिसमें ड्रग तस्करी, विवादित जमीन कब्जाना और निर्माण कार्य, हवाला कारोबार और विवादित बिजनेस डील में मध्यस्थता जैसे काम शामिल थे। इस दौरान दाऊद ने क्रिकेट में सट्टेबाजी को भी बढ़ावा दिया और फिल्मों की फाइनेंसिंग भी की। साल 1986 में दाऊद ने अपना बेस मुंबई से शिफ्ट करके दुबई में बना लिया, जिसके बाद दाऊद की डी कंपनी हथियार तस्करी, ड्रग तस्करी आदि गैरकानूनी धंधों को बड़े पैमाने पर करने लगी। इसी दौरान साल 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना हुई, जिससे देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए। मुंबई में भी दंगे हुए।