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आज ही के दिन भारत के शैतान ने चटाई थी चीन को धूल, मार गिराए थे 1300 सैनिक

Sun, 18 Nov 2018 11:53 AM IST
न्यूज डेस्क, नई दिल्ली, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, नई दिल्ली, अमर उजाला Updated Sun, 18 Nov 2018 11:53 AM IST
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1962 Rezang La war, when Indian soldier Shaitan Singh team killed 1300 chinese soldiers
रेजांगला युद्ध

साल 1962, जब चीन और भारत के बीच भयावह युद्ध चल रहा था। यह युद्ध एक महीने तक चला। युद्ध की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध में चीन की ओर से करीब 80 हजार जवान लड़ने के लिए मौजूद थे। वहीं भारत की ओर से उनका मुकाबला करने के लिए महज 10-20 हजार जवान ही थे। लेकिन बावजूद इसके हमारे जवानों ने उनका मुकाबला पूरी निडरता से किया। 


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साल 1962, जब चीन और भारत के बीच भयावह युद्ध चल रहा था। यह युद्ध एक महीने तक चला। युद्ध की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध में चीन की ओर से करीब 80 हजार जवान लड़ने के लिए मौजूद थे। वहीं भारत की ओर से उनका मुकाबला करने के लिए महज 10-20 हजार जवान ही थे। लेकिन बावजूद इसके हमारे जवानों ने उनका मुकाबला पूरी निडरता से किया। 

आज 18 नवंबर है, यानि वो दिन जब रेजांगला युद्ध हुआ था। यह युद्ध रेजांग ला के एक दर्रे पर हुआ, जहां से चुशूल की घाटी में प्रवेश मिलता है। यहां 17-18 नवंबर, 1962 को मेजर शैतान सिंह की छोटी सी टुकड़ी मौजूद थी। चीन के मुकाबले भारत के पास सैनिक तो कम थे ही, साथ ही गोला बारूद भी काफी कम संख्या में मौजूद था। लेकिन अगर हौसले की बात करें तो उसमें भारत आगे था। यहां भारतीय जवानों के आगे चीन की बड़ी सेना भी कमजोर पड़ गई थी। यह स्थान समुद्र तल से 5,000 मीटर (16,000 फीट) की ऊंचाई पर स्थित था।

वक्त रात का था, तेज बर्फीले तूफान के बीच सुबह के 3.30 बजे चीनी सैनिक इलाके में घुस चुके थे। सुबह के 5 बजे जब मौसम थोड़ा बहतर हुआ तब अचानक चीनी सैनिक सामने आ गए। उन्होंने झुंड में आकर हमला करना शुरू कर दिया था। इनका मुकाबला करने के लिए भारतीय सैनिक पूरी तरह तैयार थे। उन्होंने चीनियों पर एलएमली, एलएमजी और मोर्टार से हमला करना शुरू कर दिया। चीन के कई सैनिक इस लड़ाई में मारे जा रहे थे, लेकिन खतरा कम नहीं था। एक के बाद एक चीनी टुकड़ी हमले के लिए आगे आ रही थी।

उन्हें लग रहा था कि वह भारत की छोटी सी टुकड़ी को खत्म करने में सफल हो जाएंगे, इन्हें खत्म किए बिना उनका आगे बढ़ पाना भी मुश्किल था। वहीं भारतीय सैनिकों की टुकड़ी भी कमजोर होती जा रही थी। भारतीय वीर सैनिकों के पास अब सामने से हमला करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा। भारतीय सैनिकों ने बाहर आकर चीनी सैनिकों पर बैनट से हमला करना शुरू कर दिया। जिसके बाद चीनी सैनिक बेबस हो गए। आंकड़े बताते हैं कि भारत के 123 जवानों ने चीन के करीब 1300 जवानों को मार गिराया था। चीनी सैनिक भारत के आगे घुटने टेक चुके थे। 

भारी हथियार सहित आए दुश्मन और भारत था निहत्था

रेजांगला युद्ध
रेजांगला युद्ध
जब चीनी अधिकारियों को अपने सैनिकों के बारे में पता चला तो उन्होंने अपनी रणनीति बदली। उन्होंने भारी संख्या में चीनी सैनिकों को हथियारों के साथ भेजा। चीनी सैनिकों के पास तोप, मोर्टार, 106 आरसीएल और 132 एमएम रॉकेट थे। लेकिन भारत के पास न तो तोपखाना था और न ही कोई मोर्टार। चीनी लगातार हमले कर रहे थे। भारत के पास अब केवल अपने हाथों का सहारा बचा था। 

इस कठिन परिस्थिती में भी शैतान सिंह ने हार नहीं मानी और अपनी टुकड़ी की हिम्मत बढ़ाते रहे। चीनी सैनिकों की निगाहें भी मेजर शैतान सिंह पर टिकी थीं। उन्होंने शैतान सिहं के हाथ में एलएमजी की गोली से हमला किया, फिर भी वह अपनी जान की परवाह न करते हुए चीनियों के आगे टिके रहे। इसके बाद एक अन्य गोली उनके पेट में लगी। लेकिन वह जवानों को कहते रहे कि बटालियन हेडक्वार्टर में जाकर सूचना दें। वह खुद ही अपनी मरहम पट्टी करने लगे। लेकिन हेडक्वार्टर से रेडियो संपर्क भी तब तक टूट चुका था और फोन लाइन भी कट गई थी। उन्होंने दुश्मनों के आगे हार नहीं मानी और शहीद हो गए। इस बड़ी हार के बाद चीन ने 21 नवंबर, 1962 को युद्ध खत्म करने की घोषणा की।

इस युद्ध में भारत के 123 में से 109 सैनिक शहीद हुए। इस कंपनी का नाम 13-कुमाऊं रेजिमेंट में चार्ली कंपनी से बदलकर रेजांग ला कंपनी कर दिया गया। यहां शहीद हुए जवानों के शव बर्फ से ढके पाए गए। उसी स्थान पर मेजर शैतान सिंह का शव भी मिला। मृत्योपरांत साल 1963 में शैतान सिंह को सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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