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17वीं लोकसभा: विपक्ष तहस-नहस, जदयू दूर हुई तो बीजद ने की भरपाई
Wed, 07 Aug 2019 09:51 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 07 Aug 2019 09:51 PM IST
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संसद भवन (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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सत्रहवीं लोकसभा के पहले ही सत्र ने देश की राजनीति को नई दशा से दी। भाजपा के दांव से अविश्वसनीय ढंग से विपक्षी एकता तार-तार हो गई। राज्यसभा में बेहद अप्रत्याशित ढंग से पार्टी अपने मूल एजेंडे से जुड़े बिल को बड़ी आसानी से कानूनी जामा पहनाने में कामयाब हो गई। इस सत्र में सहयोगी जदयू भाजपा से दूर हुई तो पार्टी ने इसकी भरपाई बीजद से कर ली। हालांकि बीजद के अलावा वाईएसआर कांग्रेस और टीआरएस के रुख ने उच्च सदन का सारा समीकरण ही उलट पलट कर रख दिया।
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सत्र शुरू होने से पहले अनुच्छेद 370 निरस्त होना तो दूर किसी ने तीन तलाक बिल के इतनी आसानी से कानूनी जामा पहनने की कल्पना तक नहीं की थी। राजग का सहयोगी जदयू ही इस बिल के खिलाफ था। हालांकि उच्च सदन का समीकरण एकाएक ऐसा बदला की भाजपा अपने एजेंडे से जुड़े सभी बिलों को कानूनी जामा पहनाने में कामयाब हो गई। तीन तलाक, मानवाधिकार संरक्षण संशोधन, गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन बिल ही नहीं अंतिम हफ्ते में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का संकल्प के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुनगर्ठन बिल पर भी उच्च सदन की मुहर लग गई।
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तीन दलों के अप्रत्याशित समर्थन ने बदला नजारा
अहम मौकों पर वाईएसआर कांग्रेस, बीजद और टीआरएस (कुल 15 सांसद) के समर्थन ने राज्यसभा का नजारा बदल कर रख दिया। कई मौकों पर सहयोगी जदयू के विरोध के बावजूद भाजपा ने इन तीन दलों के सहारे उच्च सदन में अहम बिलों पर मुहर लगाने में कामयाबी हासिल की। बीजद ने सभी मौके पर सरकार के पक्ष में वोट किया तो बाकी दो दलों ने कभी समर्थन तो कभी वॉकआउट कर सरकार के लिए सहज स्थिति पैदा की। इन्हीं दलों के समर्थन के सहारे पार्टी अपने कोर एजेंडे से जुड़े सभी अहम बिलों को कानूनी जामा पहनाने में सफल रही।
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