36 प्रतिशत सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज हैं आपराधिक मामले, यूपी नंबर वन
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एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जानकारी मांगी थी कि कि देश के कितने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। इसके जवाब में केंद्र ने हलफनामा दायर कर जानकारी दी है। जिसके मुताबिक देश के 1700 से ज्यादा सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ कुल 3,816 मामले दर्ज हैं। गौर हो कि बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय ने कोर्ट में याचिका दायर कर आपराधिक मामले में दोषी, सांसदों और विधायकों के आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की थी।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1765 सांसद और विधायकों के खिलाफ लंबित 3816 आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जा रहे हैं। 11 राज्यों यानी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में फास्ट ट्रैक कोर्ट बन रहे हैं। वहीं 12 राज्यों की ओर से अभी ऐसा किया जाना बाकी है। इनमें असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा भी शामिल है।
राज्य और केंद्र सासित प्रदेशों की सरकारें इन मामलों को एक जगह एकत्रित कर रही है। राज्यों के मुख्य सचिवों और विधानसभा सचिवों से भी जानकारी मांगी गई है। मंत्रालय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक नवंबर 2017 के आदेश के आलोक में इन अदालतों को बनाया जा रहा है। इस योजना के लिए 11 राज्यों को 7.8 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
दागी सांसद और विधायकों के मामले में यूपी नंबर वन
दर्ज मामलों में यूपी पहले स्थान पर है। यहां 248 सांसदों और विधायकों के खिलाफ कुल 565 मामले दर्ज हैं। केरल में 114 कानून निर्माताओं के खिलाफ 533 मामले दर्ज हैं। कानून मंत्रालय की ओर से शीर्ष अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य विधानसभाओं से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सूचना मांगी गई है।