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कभी स्कूल न जाने वाली 17-वर्षीय मालविका को मिला अमेरिका के एमआईटी में दाखिला
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Wed, 31 Aug 2016 01:47 AM IST
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मालविका को एमआईटी में विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई के लिए मिली है छात्रवृत्ति
- फोटो : stats.ioinformatcs.org
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सत्रह साल की मालविका राज जोशी के पास दसवीं या 12वीं की स्कूली डिग्रियां तो नहीं हैं लेकिन अपनी कंप्यूटर प्रोग्रामिंग योग्यता की बदौलत उनका दाखिला अमेरिका के प्रतिष्ठित मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में होने जा रहा है। वह तब दादर पारसी यूथ एसेंबली स्कूल में सातवीं की छात्रा थीं और बेहतर पढ़ाई कर रही थीं जब उनकी मां ने उन्हें स्कूल से बाहर करने का फैसला किया।
वास्तव में, मालविका कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में काफी अच्छा काम करती हैं और उन्हें यह विषय बहुत पसंद है। मालविका की मां एक ऐसी महिला हैं जो सर्टिफिकेट से ज्यादा ज्ञान को तरजीह देती हैं और एक अलग तरह का रास्ता चुनने में यकीन रखती हैं। मुंबई की इस लड़की को एमआईटी से विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिली है। मालविका ने प्रोग्रामिंग ओलंपियाड (इंटरनेशनल ओलंपियाड ऑफ इन्फॉरमेटिक्स) में तीन बार (दो रजत और एक कांस्य) पदक हासिल किया था, जिसके बाद उन्हें बिना डिग्री के ही एमआइटी में दाखिला मिल गया।
एमआईटी में एक प्रावधान है कि वह विभिन्न ओलंपियाड (गणित, भौतिकी या कंप्यूटर) में मेडल जीतने वाले विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिला देता है। यह मालविका का मेडल ही था जिसने उन्हें इस प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट में न केवल दाखिला दिलाया बल्कि अपने सपनों को पूरा करने का मौका भी दिया।
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मालविका अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा, ‘मैंने चार साल पहले ही स्कूल छोड़ दिया था। उसके बाद मैंने कई विषयों की पढ़ाई की, प्रोग्रामिंग उनमें से एक था। मुझे प्रोग्रामिंग काफी अच्छा लगा और मैंने दूसरे विषयों की अपेक्षा इस पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया।’
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वास्तव में, मालविका कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में काफी अच्छा काम करती हैं और उन्हें यह विषय बहुत पसंद है। मालविका की मां एक ऐसी महिला हैं जो सर्टिफिकेट से ज्यादा ज्ञान को तरजीह देती हैं और एक अलग तरह का रास्ता चुनने में यकीन रखती हैं। मुंबई की इस लड़की को एमआईटी से विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिली है। मालविका ने प्रोग्रामिंग ओलंपियाड (इंटरनेशनल ओलंपियाड ऑफ इन्फॉरमेटिक्स) में तीन बार (दो रजत और एक कांस्य) पदक हासिल किया था, जिसके बाद उन्हें बिना डिग्री के ही एमआइटी में दाखिला मिल गया।
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एमआईटी में एक प्रावधान है कि वह विभिन्न ओलंपियाड (गणित, भौतिकी या कंप्यूटर) में मेडल जीतने वाले विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिला देता है। यह मालविका का मेडल ही था जिसने उन्हें इस प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट में न केवल दाखिला दिलाया बल्कि अपने सपनों को पूरा करने का मौका भी दिया।
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मालविका अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा, ‘मैंने चार साल पहले ही स्कूल छोड़ दिया था। उसके बाद मैंने कई विषयों की पढ़ाई की, प्रोग्रामिंग उनमें से एक था। मुझे प्रोग्रामिंग काफी अच्छा लगा और मैंने दूसरे विषयों की अपेक्षा इस पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया।’