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पूर्वोत्तर में बाढ़ से अब तक 17 मरे, चारों राज्यों में करीब 7 लाख लोग हैं बाढ़ से प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, गुवाहाटी/इंफाल
Updated Sun, 17 Jun 2018 12:44 AM IST
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बाढ़ (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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पूर्वोत्तर में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। असम में सबसे ज्यादा डरावने हालात हैं, जहां पिछले 24 घंटे में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि मणिपुर में 1 मछुआरे की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हुई है। पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ से मरने वालों की तादाद बढ़कर 17 पर पहुंच गई है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि चार पूर्वोत्तर राज्यों में सात लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं। हालांकि अन्य राज्यों में बाढ़ के पानी में कमी आने के संकेत मिल रहे हैं।
असम के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, पिछले 24 घंटे में कछार जिले में 2, जबकि होजाई और दीमा हसाओ में 1-1 आदमी की मौत बाढ़ में डूबने व भूस्खलन की चपेट में आने से हुई है। प्रदेश में अब तक कुल 7 मौत हो चुकी हैं। कई जगह सड़कें टूट गई हैं और जगह-जगह भूस्खलन से ट्रेन सेवाएं ठप हैं। राजधानी गुवाहाटी में भी 3 जगह भूस्खलन की सूचना है।
राज्य के 716 गांव पूरी तरह पानी में डूबे हुए और करीब 3292 हेक्टेयर फसल खराब हो गई है। लगभग सभी प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। करीमगंज में करीब 1.95 लाख और हैलाकांदी जिले में 1.89 लोगों समेत पूरे राज्य में करीब 5 लाख लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है। प्रदेश में इस समय करीब 1.10 लाख लोग 213 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।
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मणिपुर के राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 1.8 लाख से भी अधिक लोग अभी तक बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। 5 हजार लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में ले जाया गया है। अब तक करीब 22,624 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसके चलते 48 नए राहत शिविर लगाने पड़े हैं। हालांकि बारिश में थोड़ी कमी आने से हालात में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन थोऊबाल, नामबोल, इंफाल और इरिलबुंग जिलों की प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रमुख मार्गों पर यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
राज्य में 1 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य की प्रमुख नदियों तियांग और लांगकेह के जल स्तर में कमी आने की रिपोर्ट दी है। लेकिन लुंगलेई में अब भी 500 परिवार बेघर हैं और सैकड़ों मकान पानी के अंदर डूबे हुए हैं। आईजॉल से लुंगलेई जाने वाला हाईवे शुक्रवार रात को पीडब्ल्यूडी की तरफ से मलबा हटाकर चालू किए जाने के कुछ ही घंटे बाद मुआलथुआम गांव के पास भूस्खलन से फिर बंद हो गया।
त्रिपुरा-मिजोरम में स्थिति सुधरी
त्रिपुरा और मिजोरम में बरिश में कमी होने से स्थिति पहले से सुधरी है। हालांकि त्रिपुरा में खोवाई नदी में बढ़े पानी के कारण कई नए इलाकों के डूब जाने की जानकारी मिली है। राज्य में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 189 राहत शिविरों में 40 हजार से ज्यादा लोगों ने शरण ले रखी है। मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव ने शनिवार को प्रमुख विभागों के साथ बाढ़ की समीक्षा बैठक की। मिजोरम के लुंगलेई जिले में अब भी 500 परिवार बेघर हैं और सैकड़ों मकान पानी में डूबे हुए हैं। बाढ़ के कारण नेशनल हाइवे का सौ मीटर लंबा हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।
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असम के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, पिछले 24 घंटे में कछार जिले में 2, जबकि होजाई और दीमा हसाओ में 1-1 आदमी की मौत बाढ़ में डूबने व भूस्खलन की चपेट में आने से हुई है। प्रदेश में अब तक कुल 7 मौत हो चुकी हैं। कई जगह सड़कें टूट गई हैं और जगह-जगह भूस्खलन से ट्रेन सेवाएं ठप हैं। राजधानी गुवाहाटी में भी 3 जगह भूस्खलन की सूचना है।
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राज्य के 716 गांव पूरी तरह पानी में डूबे हुए और करीब 3292 हेक्टेयर फसल खराब हो गई है। लगभग सभी प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। करीमगंज में करीब 1.95 लाख और हैलाकांदी जिले में 1.89 लोगों समेत पूरे राज्य में करीब 5 लाख लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है। प्रदेश में इस समय करीब 1.10 लाख लोग 213 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।
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मणिपुर के राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 1.8 लाख से भी अधिक लोग अभी तक बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। 5 हजार लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में ले जाया गया है। अब तक करीब 22,624 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसके चलते 48 नए राहत शिविर लगाने पड़े हैं। हालांकि बारिश में थोड़ी कमी आने से हालात में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन थोऊबाल, नामबोल, इंफाल और इरिलबुंग जिलों की प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रमुख मार्गों पर यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
राज्य में 1 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य की प्रमुख नदियों तियांग और लांगकेह के जल स्तर में कमी आने की रिपोर्ट दी है। लेकिन लुंगलेई में अब भी 500 परिवार बेघर हैं और सैकड़ों मकान पानी के अंदर डूबे हुए हैं। आईजॉल से लुंगलेई जाने वाला हाईवे शुक्रवार रात को पीडब्ल्यूडी की तरफ से मलबा हटाकर चालू किए जाने के कुछ ही घंटे बाद मुआलथुआम गांव के पास भूस्खलन से फिर बंद हो गया।
त्रिपुरा-मिजोरम में स्थिति सुधरी
त्रिपुरा और मिजोरम में बरिश में कमी होने से स्थिति पहले से सुधरी है। हालांकि त्रिपुरा में खोवाई नदी में बढ़े पानी के कारण कई नए इलाकों के डूब जाने की जानकारी मिली है। राज्य में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 189 राहत शिविरों में 40 हजार से ज्यादा लोगों ने शरण ले रखी है। मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव ने शनिवार को प्रमुख विभागों के साथ बाढ़ की समीक्षा बैठक की। मिजोरम के लुंगलेई जिले में अब भी 500 परिवार बेघर हैं और सैकड़ों मकान पानी में डूबे हुए हैं। बाढ़ के कारण नेशनल हाइवे का सौ मीटर लंबा हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।