Pune Porsche crash: भारत में रोज 1263 हादसे, 24 घंटे में 461 मौतें, US में एक साल में 19 लाख हादसे, 36560 मरे
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विस्तार
महाराष्ट्र में पुणे के कल्याणीनगर में हुई दुर्घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला है। रविवार को लगभग ढाई करोड़ रुपये की महंगी कार से हुए सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी को 7500 रुपये के बॉन्ड और सड़क सुरक्षा पर एक निबंध लिखने की सजा देते हुए जमानत दे दी थी। जब यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो आरोपी और उसके पिता पर कार्रवाई की गई। भारत में हर रोज 1263 सड़क हादसे हो रहे हैं। अगर 24 घंटे की बात करें, तो इस छोटी सी अवधि में 461 लोगों की मौत हो जाती है। देश में नया मोटर वाहन अधिनियम लागू होने के बाद यह उम्मीद बंधी थी कि अब सड़क हादसों में कमी आ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दूसरी तरफ, अमेरिका में 365 दिन में 19 लाख सड़क हादसे हो जाते हैं, लेकिन उनमें मारे जाने वाले लोगों की संख्या 36560 रहती है।
चालान राशि में कई गुना बढ़ोतरी की गई
महाराष्ट्र की घटना में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के फैसले पर जब लोगों का गुस्सा फूटा, तो सरकार भी सक्रिय हो उठी। नतीजा, बुधवार को दोबारा से मामले की सुनवाई हुई। आरोपी की आयु 17 साल 8 महीने बताई गई है। बोर्ड ने आरोपी को 5 जून तक किशोर सुधार गृह में भेज दिया है। आरोपी के पिता भी पुलिस हिरासत में है। वजह, उन्होंने जानते हुए भी कि उनका बेटा नाबालिग है, इसके बावजूद उसे वाहन दिया गया। देश में नया मोटर वाहन अधिनियम लागू होने के बाद भी सड़क हादसों में गिरावट नहीं आ रही है।
पांच साल पहले लागू हुए नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान राशि में कई गुना बढ़ोतरी की गई थी। मकसद था, सड़क हादसों में कमी लाना। देश में प्रतिवर्ष चार लाख से ज्यादा सड़क हादसे हो रहे हैं। सड़क हादसों में मारे जाने वाले लोगों की संख्या के मामले में भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, जर्मनी और जापान सहित 19 देश शामिल हैं। विकसित देशों में भारत के मुकाबले कानून कठोर हैं। साथ ही इन देशों में वाहन से लेकर रोड इंजीनियरिंग तक, इन सभी बातों पर गहराई से काम होता है।
2022 में मारे गए 1,68,491 लोग
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं-2022' शीर्षक से जारी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 4,61,312 सड़क हादसे हुए थे। इन हादसों में 1,68,491 लोगों की जान गई थी, जबकि 4,43,366 लोग घायल हुए थे। पिछले वर्ष की तुलना में सड़क हादसों में 11.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इन हादसों में होने वाली मौतों में 9.4 फीसदी और घायलों की संख्या में 15.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। एक्सप्रेस वे सहित राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,51,997 (32.9 फीसदी) सड़क हादसे हुए। राज्य मार्गों पर 1,06,682 (23.1 फीसदी) हादसे और अन्य मार्गों पर 2,02,633 (43.9 फीसदी) सड़क दुर्घटनाएं देखने को मिलीं। साल 2022 के दौरान सड़क हादसों के 66.5 फीसदी पीड़ितों की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच थी। अधिकांश पीड़ित युवा थे। लगभग 68 फीसदी मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में हुईं थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में 32 फीसदी मौतें हुईं।
उत्तर प्रदेश में मारे गए 22,595 लोग
2022 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं, तमिलनाडु में दर्ज की गई हैं। इस प्रदेश में 64,105 सड़क हादसे हुए थे। इसके बाद मध्यप्रदेश का नंबर आता है। यहां 54,432 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। अगर सड़क-उपयोगकर्ता श्रेणी की बात करें, तो 2022 में हुई मौतों में दोपहिया सवार सबसे ज्यादा रहे। यह प्रतिशत 44.5 फीसदी था। इसके बाद पैदल यात्रियों का नंबर आता है। यह प्रतिशत 19.5 रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश में रही है। इस राज्य में 22,595 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो गई। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 17,884 रहा है।
2021 में हुई थी 153972 लोगों की मौत
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, भारत में 2021 के दौरान हुए 412432 सड़क हादसों में 153972 लोग मारे गए, जबकि 384448 लोग घायल हुए थे। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, कद्दावर नेता राजेश पायलट, केंद्रीय मंत्री रहे गोपीनाथ मुंडे और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा से लेकर टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री तक अनेक लोग सड़क हादसों का शिकार हुए हैं। देश में सितंबर 2019 से लागू हुए नए मोटर वाहन अधिनियम में चालान राशि में कई गुना इजाफा किया गया। इसके बाद उम्मीद बंधी थी कि अब वाहन चालक संभल कर चलेंगे और सड़क हादसों में कमी आ जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
सड़क सुरक्षा पर काम कर रहे 'सेव लाइफ फाउंडेशन' के अध्यक्ष पीयूष तिवारी कहते हैं, सड़क हादसे होने की कई वजह होती हैं। इसमें यह प्वाइंट भी बहुत अहम है कि देश में यातायात के नियमों को लेकर लोगों का व्यवहार क्या है। रिसर्च बताती है कि सड़क हादसे के लिए जिम्मेदार कारणों में 25 फीसदी हिस्सा, चालकों के यातायात व्यवहार से जुड़ा होता है। इसके बाद सड़क इंजीनियरिंग का नंबर आता है।
वाहन सेफ्टी भी एक अहम प्वाइंट है
पीयूष तिवारी के अनुसार, इस तरह के हादसों में रोड इंजीनियरिंग भी जिम्मेदार होती है। इसमें रोड की बनावट कैसी है, टर्न किस तरह बने हैं, सरफेस कैसा है, आदि बातें देखी जाती हैं। वाहन की सेफ्टी का स्टैंडर्ड क्या है, ये भी समझना जरूरी है। ओवरआल एनवायरनमेंट कैसा है, ये भी देखना है। जुर्माना राशि बढ़ने से भी हादसे नहीं थम रहे हैं, इस सवाल के जवाब में तिवारी ने बताया, अभी राज्यों में चालान का प्रतिशत 35 है। इसकी भी रिकवरी नहीं हो पा रही। रिकवरी का प्रतिशत बेहद कम है। ऐसे यातायात उल्लंघन, जिनमें उसी वक्त चालान इश्यू कर सकते हैं, उसका प्रावधान भी बहुत कम है। इस सिस्टम का वाहन और सारथी के साथ जुड़ाव नहीं हुआ है। ये तय है कि चालान राशि की रिकवरी जैसे बढ़ेगी, तो चालकों के व्यवहार में बदलाव आएगा। रोड इंजीनियरिंग की कमियां दूर करने के लिए जिला/राज्य स्तर पर एक स्टैंडिंग कमेटी गठित की जाए। वह लगातार इस काम पर नजर रखे। हर माह समीक्षा हो।
भारत में स्पीड बढ़ी तो हादसों की भयावहता भी बढ़ी
हमारे देश में वाहनों की रफ्तार बढ़ रही है। इसके साथ ही हादसों की भयावहता भी बढ़ रही है। देश में इमरजेंसी केयर जैसी सुविधाओं में सुधार की बहुत ज्यादा जरूरत है। पहले सड़क हादसों में चोट गंभीर नहीं होती थी, लेकिन अस्पताल तक पहुंचने में देरी की वजह से मौत हो जाती थी। अब चोट ज्यादा गंभीर हो गई है। ऐसे में जान बचाना एक बड़ी चुनौती है। अस्पतालों में जान बचाने की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। सरकार को ट्रॉमा केयर पर फोकस करना होगा। सड़क हादसे तो हर देश में होते हैं, लेकिन मौतें उतनी नहीं होती। अमेरिका में भारत से कई गुना ज्यादा हादसे होते हैं, लेकिन मौत एक चौथाई भी नहीं होती।
यह है भारत सहित कई देशों में हादसों की स्थिति
भारत में 2020 के दौरान 432957 सड़क हादसे हुए थे। इनमें 151417 लोग मारे गए थे। चीन में 244937 हादसों में 63194 लोग मारे गए। रूसी फेडरेशन में 168099 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 18214 लोग मारे गए। दक्षिण अफ्रीका में 146773 सड़क हादसे हुए। इनमें 14500 लोगों की मौत हो गई। ईरान में हुए 337891 सड़क हादसों में 16540 लोग मारे गए। तुर्की में 186532 सड़क हादसों में 6675 लोगों की मौत हुई। अमेरिका में 1927654 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 36560 लोगों की मौत हुई। जर्मनी में 308721 सड़क हादसे हुए। इनमें 3275 लोग मारे गए। जापान में 430601 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 4166 लोगों की जान चली गई।
इन कारणों के चलते बढ़ी सड़क हादसों की रफ्तार
- साल 2021 के दौरान हुए सड़क हादसों में 133025 (86.4 फीसदी) पुरुष और 20947 (13.6 प्रतिशत) महिलाओं की जान गई है।
- दुपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट वाले 46593 (30.6 फीसदी) चालक सड़क हादसों का शिकार हुए हैं।
- ऐसे 16397 कार सवार, जिन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी, सड़क हादसों में मारे गए।
- ओवरलोड वाहनों की वजह से जो हादसे हुए, उनमें 11011 लोग मारे गए।
- हिट एंड रन के 57415 केस हुए थे, जिनमें 25938 लोगों की मौत हो गई और 45355 लोग घायल हुए।
- कुल सड़क हादसों में से 13.7 फीसदी घटनाएं ऐसी थीं, जिनमें वाहन चालक के पास वैद्य लाइसेंस नहीं था। कुछ चालक ऐसे भी थे, जिनके पास लर्नर लाइसेंस था।
- 2021 में सड़क पर बने गड्ढों के चलते 1481 हादसे हुए हैं।
- ऐसे वाहन जो दस साल पुराने हैं, उनका भी सड़क हादसों में 25.8 फीसदी हिस्सा रहा है।
- शहरी क्षेत्रों में हुए सड़क हादसों में 47235 लोग मारे गए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 106737 लोगों की जान गई है।
नए एक्ट में किया गया था भारी जुर्माने का प्रावधान
संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में अगर शराब पीकर ड्राइविंग करने का मामला साबित होता है, तो चालक पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगता है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पीसीआर का रास्ता रोकने पर भी 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बिना हेलमेट पकड़े जाने पर तीन माह के लिए लाइसेंस सस्पेंड होता है। ओवर स्पीड और बिना बीमा पॉलिसी के गाड़ी चलाने पर भी दो हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। नाबालिग, गाड़ी चलाता हुआ पकड़ा गया, तो वाहन मालिक और अभिभावक, दोनों को कसूरवार ठहराया जाएगा। इसमें तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द होने का भी प्रावधान है। ट्रैफिक सिग्नल के उल्लंघन पर 500 रुपये जुर्माना होगा। दोबारा यह उल्लंघन होने पर जुर्माना राशि दो हजार रुपये तक पहुंच सकती है। हिट एंड रन केस में पीड़ित परिवारों को दो लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाना, यह जुर्माना भी 100 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है। ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन पर बात करना, इस उल्लंघन पर 5000 रुपये जुर्माना देना पड़ेगा।