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Shakthi SAT: 108 देशों की 12 हजार छात्राएं जानेंगीं अंतरिक्ष का विज्ञान, उपग्रह लॉन्च करने में करेंगी मदद

Sun, 13 Oct 2024 04:22 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sun, 13 Oct 2024 04:22 PM IST
सार

शक्तिसैट मिशन की प्रमुख केसन ने बताया मिशन में हाईस्कूल की छात्राओं (14-18 वर्ष की आयु) को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, पेलोड विकास और अंतरिक्ष यान प्रणालियों के विभिन्न पहलुओं के बारे में सिखाने के लिए 120 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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12 thousand girl students from 108 countries will learn the science of space, will help in launching satellite
अंतरिक्ष (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Istock

विस्तार

108 देशों की 12 हजार छात्राएं अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से जानेंगीं। एयरोस्पेस स्टार्टअप स्पेस किड्ज इंडिया ने छात्राओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि जगाने के लिए वैश्विक मिशन शक्तिसैट लॉन्च किया है। इसके तहत छात्राओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद छात्राओं की मदद से इसरो के चंद्रयान -4 मिशन के तहत एक उपग्रह लॉन्च किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नवंबर 2024 में शक्तिसैट के आधिकारिक पोस्टर का अनावरण करेंगी।

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शक्तिसैट मिशन की प्रमुख केसन ने बताया मिशन में हाईस्कूल की छात्राओं (14-18 वर्ष की आयु) को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, पेलोड विकास और अंतरिक्ष यान प्रणालियों के विभिन्न पहलुओं के बारे में सिखाने के लिए 120 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में यूके, यूएई, ब्राजील, केन्या, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ग्रीस, श्रीलंका और अफगानिस्तान की छात्राएं शामिल होंगीं।
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उन्होंने कहा कि मिशन में हर देश से 108 छात्रों को शामिल किया जाएगा। मिशन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और अंतरिक्ष विज्ञान की विशाल संभावनाओं में रुचि जगाना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल हमारे देश को बल्कि पूरी दुनिया को लाभ मिलेगा। हमारा लक्ष्य युवा महिलाओं को प्रेरित और सशक्त बनाना है। साथ ही अंतरिक्ष अन्वेषण के विस्मयकारी क्षेत्र के माध्यम से जीवन को बदलने और हमें विश्व स्तर पर एकजुट करने के ऐसे अवसर प्रदान करना है, जिनमें शक्ति हो।
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उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मिशन विभिन्न देशों की 108 छात्राओं का चयन करेगा। जो अगले साल जून और अगस्त के बीच पेलोड और अंतरिक्ष यान प्रोटोटाइप के निर्माण में व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए भारत की यात्रा करेंगी। इस साल के अंत में या अगले साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रोटोटाइप प्रस्तुति दी जाएगी। उन्होंने बताया कि मिशन का लक्ष्य 2026 में इसरो के चंद्रयान 4 मिशन के हिस्से के रूप में उपग्रह लॉन्च करना है।


इससे पहले स्पेस किड्ज़ इंडिया ने 18+ एनएसएलवी (बैलूनसैट), 3 सबऑर्बिटल पेलोड और 4 ऑर्बिटल सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। यह हाईस्कूल और कॉलेज के छात्रों की मदद से उपग्रह लॉन्च करने वाला दुनिया का पहला संगठन होने का दावा करता है। स्पेस किड्ज़ इंडिया का लक्ष्य अंतरिक्ष अन्वेषण में अगली पीढ़ी के वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को प्रेरित करना है।

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