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गिर अभ्यारण्य में सीडीवी वायरस और प्रोटोजोआ संक्रमण से हुई थी 11 शेरों की मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
Updated Thu, 04 Oct 2018 05:59 AM IST
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गुजरात के गिर अभ्यारण्य में 12 से 19 सितंबर के बीच 23 शेरों की मौत हो चुकी है। इनमें 11 शेरों की मौत कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और प्रोटोजोआ संक्रमण के कारण हुई है। गुजरात सरकार ने बुधवार को कहा कि 36 में से तीन शेरों की स्थित नाजुक है। उन्हें वन विभाग की निगरानी में रखा गया है।
राज्य के वन और पर्यावरण मंत्री गणपत वासवा के मुताबिक, पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में जांच के बाद पता चला कि जिन 11 शेरों की मौत हुई है, उनमें चार में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस पाया गया है। सात में प्रोटोजोआ संक्रमण पाया गया था। वहीं, राज्य के वन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि शेरों की मौत के लिए केवल कैनाइन डिस्टेंपर वायरस ही जिम्मेदार नहीं है। हालांकि, इससे शेरों का प्रतिरक्षा तंत्र जरूर प्रभावित हुआ।
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राज्य के वन और पर्यावरण मंत्री गणपत वासवा के मुताबिक, पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में जांच के बाद पता चला कि जिन 11 शेरों की मौत हुई है, उनमें चार में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस पाया गया है। सात में प्रोटोजोआ संक्रमण पाया गया था। वहीं, राज्य के वन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि शेरों की मौत के लिए केवल कैनाइन डिस्टेंपर वायरस ही जिम्मेदार नहीं है। हालांकि, इससे शेरों का प्रतिरक्षा तंत्र जरूर प्रभावित हुआ।
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केवल वायरस के कारण नहीं हुई शेरों की मौत
राजीव कुमार ने कहा कि इस वायरस के प्रभावित शेरों में प्रोटोजोआ संक्रमण भी पाया गया था, जिस कारण उनकी मौत हुई। उन्होंने बताया कि गिर अभ्यारण्य के शेरों को संक्रमण से बचाने के लिए अटलांटा से तत्काल 300 टीके मंगवाए गए हैं। अगले सात दिनों ने सभी शेरों का टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वेटरनरी सोसायटी ऑफ लंदन के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से अनुरोध किया गया है।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस
कैनाइन डिस्टेंपर खतरनाक वायरस है। इस बीमारी से ग्रसित जानवरों का बचना मुश्किल होता है। यह बीमारी मुख्यत रूप से कुत्तों में पाई जाती है। कुत्तों के जरिये यह वायरस दूसरों जानवरों में फैल जाता है। पूर्वी अफ्रीका के सेरेंगेटी जंगल के कुल शेरों में 30 फीसदी की मौत का कारण कैनाइन डिस्टेंपर वायरस ही है।
राजीव कुमार ने कहा कि इस वायरस के प्रभावित शेरों में प्रोटोजोआ संक्रमण भी पाया गया था, जिस कारण उनकी मौत हुई। उन्होंने बताया कि गिर अभ्यारण्य के शेरों को संक्रमण से बचाने के लिए अटलांटा से तत्काल 300 टीके मंगवाए गए हैं। अगले सात दिनों ने सभी शेरों का टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वेटरनरी सोसायटी ऑफ लंदन के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से अनुरोध किया गया है।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस
कैनाइन डिस्टेंपर खतरनाक वायरस है। इस बीमारी से ग्रसित जानवरों का बचना मुश्किल होता है। यह बीमारी मुख्यत रूप से कुत्तों में पाई जाती है। कुत्तों के जरिये यह वायरस दूसरों जानवरों में फैल जाता है। पूर्वी अफ्रीका के सेरेंगेटी जंगल के कुल शेरों में 30 फीसदी की मौत का कारण कैनाइन डिस्टेंपर वायरस ही है।
गिर वन में शेरों की मौत बेहद गंभीर : सुप्रीम कोर्ट
बीते 20 दिनों में गिर वन में 23 शेरों की मौत को बेहद गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर बात है, इतनी संख्या में आखिर शेरों की मौत कैसे हो गई?
पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी से कहा, ‘शेरों का संरक्षण होना चाहिए। आप शेरों की मौत के कारणों का पता लगाइए और इसे रोकने के लिए कुछ तो कीजिए।’
जवाब में नादकर्णी ने बताया कि उन्हें इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि अखबारों में लगातार प्रमुखता से ये खबरें आ रही हैं। हर दिन शेरों की मौत हो रही है। इसके बाद बाद पीठ ने राज्य और केंद्र सरकार को एक हफ्ते में जवाब देने को कहा।
पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी से कहा, ‘शेरों का संरक्षण होना चाहिए। आप शेरों की मौत के कारणों का पता लगाइए और इसे रोकने के लिए कुछ तो कीजिए।’
जवाब में नादकर्णी ने बताया कि उन्हें इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि अखबारों में लगातार प्रमुखता से ये खबरें आ रही हैं। हर दिन शेरों की मौत हो रही है। इसके बाद बाद पीठ ने राज्य और केंद्र सरकार को एक हफ्ते में जवाब देने को कहा।